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09:56 IST

वाठोड़ा के कॉलेज में प्रोफेसर को हटाए जाने का दावा, आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं

सूत्रों का दावा है कि नागपुर के वाठोड़ा इलाके के एक कॉलेज ने आरोपों से घिरे प्रोफेसर को हटा दिया है। कॉलेज प्रशासन ने इसकी पुष्टि नहीं की है।

वाठोड़ा के कॉलेज में प्रोफेसर को हटाए जाने का दावा, आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

नागपुर के वाठोड़ा इलाके के एक जाने-माने कॉलेज के मामले में नई बात सामने आई है। एक प्रोफेसर पर आरोप है कि उन्होंने एक छात्रा को कथित तौर पर अश्लील और धर्म से जुड़े आपत्तिजनक मैसेज भेजे। सूत्रों के मुताबिक अब इन प्रोफेसर को कॉलेज से हटा दिया गया है।

सूत्रों का कहना है कि कॉलेज में छात्रों की नाराजगी बढ़ती जा रही थी। कुछ शिक्षक भी इस मामले से नाखुश बताए जा रहे हैं। इसी माहौल को देखते हुए कॉलेज प्रबंधन ने प्रोफेसर के खिलाफ यह कदम उठाया।

लेकिन कॉलेज प्रशासन ने अब तक इस बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। फैसले की वजह भी लिखित में सामने नहीं आई है। यह भी साफ नहीं है कि प्रोफेसर को सस्पेंड किया गया है, पद से हटाया गया है या उनकी सेवाओं को लेकर कोई और प्रशासनिक कदम उठाया गया है।

अगर यह जानकारी सही निकलती है, तो यह भी बताना होगा कि यह कार्रवाई सिर्फ एहतियात के तौर पर की गई है या किसी अंदरूनी जांच के नतीजों पर टिकी है। एक बात और ध्यान देने की है कि प्रोफेसर को हटा दिए जाने भर से आरोप सही साबित नहीं हो जाते।

इस मामले से जुड़े कुछ सूत्रों ने नए दावे भी किए हैं। उनके मुताबिक इन प्रोफेसर के संस्थान की दो और शिक्षिकाओं से भी कथित संबंध थे, और छात्रा को इन कथित संबंधों का पता बाद में चला। यह भी कहा जा रहा है कि छात्रा को उर्दू में लिखा एक पत्र मिला, जिसमें कथित तौर पर प्रेम जताने वाले संदेश थे।

हालांकि पत्र असली है या नहीं, उसे किसने लिखा और वह छात्रा तक कैसे पहुंचा, इसकी कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। इन दावों के समर्थन में कोई जांचा-परखा दस्तावेज या संबंधित लोगों का आधिकारिक बयान भी फिलहाल नहीं है। इसलिए कथित संबंधों या पत्र को पक्की हकीकत नहीं माना जा सकता।

सूत्रों के अनुसार कथित संबंधों की जानकारी मिलने के बाद छात्रा ने प्रोफेसर से दूरी बनानी शुरू कर दी। इसके बाद दावा किया जा रहा है कि प्रोफेसर ने कथित तौर पर उसे ब्लैकमेल किया। सूत्रों का कहना है कि इसी के बाद छात्रा ने अपने घरवालों को पूरी बात बताई।

ब्लैकमेलिंग के इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। यह साफ नहीं है कि इस बारे में कोई औपचारिक शिकायत दर्ज हुई है या डिजिटल सबूत पुलिस को सौंपे गए हैं। अगर आरोपों में दम है, तो जांच मूल मैसेज, कॉल रिकॉर्ड, पत्र और संबंधित लोगों के बयानों के आधार पर होनी चाहिए। छात्रा की निजता और सुरक्षा का ख्याल रखना भी जरूरी है।

अब कॉलेज प्रबंधन को बताना होगा कि प्रोफेसर के खिलाफ असल में क्या कार्रवाई हुई, क्या कोई अंदरूनी जांच चल रही है और क्या दूसरे कर्मचारियों की भूमिका भी देखी जा रही है। पुलिस की तरफ से भी यह साफ होना बाकी है कि उन्हें कोई औपचारिक शिकायत मिली है या नहीं और जांच शुरू हुई है या नहीं।

प्रोफेसर, कथित पत्र में जिनका जिक्र है वे लोग और कॉलेज प्रशासन, इन सबका पक्ष सामने आने के बाद ही पूरी तस्वीर साफ हो पाएगी। शैक्षणिक संस्थानों में छात्राओं की सुरक्षा सबसे ऊपर होनी चाहिए और उनकी शिकायत को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। साथ ही जिस पर आरोप लगे हैं, उसे भी अपनी बात रखने का मौका मिलना चाहिए, क्योंकि प्रशासनिक कार्रवाई को दोष साबित होना नहीं माना जा सकता।

फिलहाल सबसे बड़े सवाल ये हैं कि क्या प्रोफेसर को सचमुच आधिकारिक तौर पर हटाया गया है, प्रबंधन के फैसले की वजह क्या है, और कथित मैसेज, पत्र तथा ब्लैकमेलिंग के आरोपों की जांच हुई है या नहीं।

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