मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

अभी सब्सक्राइब करें
प्राइम अलर्ट
सारे लाइव अपडेट
19:13 IST

UPI पर MDR चार्ज लगाया तो कैश लेनदेन फिर बढ़ेगा, महाराष्ट्र चेंबर की सरकार को चेतावनी

2000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई पेमेंट पर MDR लगाने के फैसले पर महाराष्ट्र चेंबर ऑफ कॉमर्स ने केंद्र सरकार से पुनर्विचार की मांग की है।

UPI पर MDR चार्ज लगाया तो कैश लेनदेन फिर बढ़ेगा, महाराष्ट्र चेंबर की सरकार को चेतावनी
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

2000 रुपये से ज्यादा रकम के यूपीआई पेमेंट पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR लगाने का जो फैसला हुआ है, उस पर महाराष्ट्र चेंबर ऑफ कॉमर्स, इंडस्ट्री एंड एग्रीकल्चर ने केंद्र सरकार को साफ चेतावनी दी है। चेंबर का कहना है कि सरकार इस फैसले पर दोबारा सोचे, वरना डिजिटल पेमेंट बढ़ाने की मुहिम को ही झटका लग सकता है। इस फैसले से देशभर के व्यापारियों और उद्योग जगत में चिंता का माहौल बन गया है।

चेंबर के मुताबिक पिछले कुछ सालों में यूपीआई भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुका है। छोटी दुकानों से लेकर बड़े कारोबार तक हर जगह डिजिटल लेनदेन को इसी से बढ़ावा मिला है। लेकिन अगर 2000 रुपये से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर MDR लगा दिया गया, तो कम मुनाफे पर काम करने वाले व्यापारियों का पूरा हिसाब-किताब बिगड़ जाएगा। खासकर खुदरा कारोबार, सर्विस सेक्टर और डिस्ट्रिब्यूशन में लगे लोगों के लिए यह एक्स्ट्रा खर्च धंधा चलाना मुश्किल बना सकता है।

चेंबर का कहना है कि व्यापारियों पर वैसे ही लॉजिस्टिक्स, किराया, टैक्स और मैनपावर का बड़ा खर्च पहले से रहता है। ऐसे में अगर MDR की मार भी पड़ी, तो व्यापारियों के पास दो ही रास्ते बचेंगे - या तो यह भार ग्राहकों पर डाल दें, या फिर डिजिटल पेमेंट के बजाय कैश लेनदेन को तरजीह देना शुरू कर दें। और यही बात डिजिटल इंडिया के मूल मकसद को ही नुकसान पहुंचा सकती है। चेंबर की मांग है कि सरकार सिर्फ रेवेन्यू बढ़ाने के बारे में न सोचे, बल्कि देश के करोड़ों छोटे-मझोले उद्योगपतियों और ग्राहकों के हितों को ध्यान में रखकर पॉलिसी बनाए।

महाराष्ट्र चेंबर ने यह भी साफ किया है कि व्यापारी वर्ग डिजिटल लेनदेन के खिलाफ नहीं है, बल्कि वे अर्थव्यवस्था को औपचारिक रूप देने में अपना योगदान दे रहे हैं। इसलिए सरकार, बैंक, पेमेंट सेक्टर के लोग और व्यापारी संगठन - सबको मिलकर इस पर बीच का रास्ता निकालना चाहिए। चेंबर के मुताबिक यही सही वक्त है जब यूपीआई की तरक्की और व्यापारियों के आर्थिक हित - दोनों में संतुलन बनाने वाली पॉलिसी बनाई जाए।

महाराष्ट्र चेंबर ऑफ कॉमर्स, इंडस्ट्री एंड एग्रीकल्चर के अध्यक्ष रविंद्र मानगावे ने कहा, "UPI का विरोध नहीं है, अतिरिक्त आर्थिक भार का सवाल है। डिजिटल लेनदेन बढ़ने चाहिए, UPI और मजबूत होना चाहिए और भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था आगे बढ़नी चाहिए। लेकिन इस तरक्की का खर्चा उन व्यापारियों और उद्यमियों के कंधों पर नहीं पड़ना चाहिए जो पहले से यह जिम्मेदारी उठा रहे हैं। सरकार इस फैसले पर दोबारा विचार करे और उद्योग, व्यापार और डिजिटल अर्थव्यवस्था, तीनों के हित में संतुलित रास्ता तय करे।"

अभी कोई अपडेट नहीं

खबर छप चुकी है, लेकिन लाइव थ्रेड अभी शुरू नहीं हुआ। डेस्क कोई अपडेट डालते ही वह यहाँ दिखेगा।

क्या हम इस विज़िट को गिन लें? PT24 गूगल एनालिटिक्स से देखता है कि कौन सी खबरें किस पर पढ़ी जाती हैं। आपके हां कहने तक यह बंद है, आप सोच रहे हैं तब तक कुछ नहीं गिना जाता, और आप You पर कभी भी अपना मन बदल सकते हैं। हम क्या लेंगे