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22:40 IST

UPI पर नया MDR चार्ज सिर्फ बड़े मर्चेंट पेमेंट पर, आम ग्राहकों को कोई फीस नहीं

सरकार ने साफ किया कि UPI से पर्सन-टू-पर्सन ट्रांसफर और छोटी खरीदारी पूरी तरह मुफ्त रहेगी, नया चार्ज सिर्फ कुछ बड़े व्यापारी लेनदेन पर लगेगा।

UPI पर नया MDR चार्ज सिर्फ बड़े मर्चेंट पेमेंट पर, आम ग्राहकों को कोई फीस नहीं
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

चाय की टपरी से लेकर बड़े शॉपिंग मॉल तक, सब्जी खरीदने से लेकर रेलवे टिकट बुक करने तक, आजकल हर छोटे-बड़े काम में UPI का इस्तेमाल आम बात हो गई है। ऐसे में जब खबरें आईं कि UPI लेनदेन पर अब चार्ज लगेगा, तो देश भर के करोड़ों डिजिटल पेमेंट यूजर्स में घबराहट फैल गई। लोगों के मन में उठे इसी डर और कंफ्यूजन को दूर करने के लिए केंद्र सरकार और वित्त मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान जारी कर नए नियम साफ-साफ बता दिए हैं।

सवाल यह है कि क्या इस नई व्यवस्था में आम आदमी को सच में जेब से पैसे देने पड़ेंगे। मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR आखिर है क्या, किन लेनदेन पर यह लागू होगा और रोजाना की ट्रांजैक्शन लिमिट पर इसका क्या असर पड़ेगा, यह समझना जरूरी है।

सबसे पहली और सबसे जरूरी बात, दो लोगों के बीच होने वाला हर लेनदेन पूरी तरह मुफ्त रहेगा। एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के बैंक खाते में पैसे भेजना या लेना, चाहे रकम कितनी भी हो, इस पर एक रुपया भी चार्ज नहीं लगेगा। वित्त मंत्रालय ने साफ कह दिया है कि इस पर किसी भी तरह की प्लेटफॉर्म फीस या छुपा चार्ज लगाना सख्त मना है। देश में होने वाले कुल UPI लेनदेन के मूल्य में करीब 70 फीसदी हिस्सा इसी कैटेगरी का है।

दुकान में या ऑनलाइन 2,000 रुपये तक की खरीदारी पर भी कोई MDR नहीं लगेगा। गली-मोहल्ले की छोटी दुकानें, सब्जी-फल बेचने वाले और रेहड़ी-पटरी वाले, जिनका UPI QR कोड से महीने भर में 1 लाख रुपये तक का कारोबार होता है, उनसे भी शून्य फीसदी MDR वसूला जाएगा। यानी छोटे कारोबारियों पर इसका कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा।

MDR दरअसल कोई सरकारी टैक्स या यूजर्स पर लादा गया चार्ज नहीं है। यह डिजिटल पेमेंट का ढांचा चलाने के लिए बैंक, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर और गूगल पे, फोनपे, पेटीएम जैसी UPI ऐप कंपनियों के बीच बंटने वाली एक सर्विस रकम है। नए नियमों के मुताबिक 2,000 रुपये से ज्यादा के कुछ खास मर्चेंट पेमेंट पर मामूली MDR लगाया जाएगा।

आम मर्चेंट लेनदेन पर, यानी 2,000 रुपये से ज्यादा के P2M पेमेंट पर 0.4 फीसदी MDR लगेगा। बड़े लेनदेन के लिए, यानी 75,000 रुपये या उससे ज्यादा की रकम पर यह चार्ज अधिकतम 300 रुपये प्रति लेनदेन तय किया गया है। रेलवे टिकट बुकिंग, टेलिकॉम सेवा, इंश्योरेंस प्रीमियम, पेट्रोल-डीजल और खेती से जुड़े सामान व खाद जैसी जरूरी और रोजमर्रा की सेवाओं पर, जहां मुनाफा वैसे भी बहुत कम होता है, 2,000 रुपये से ज्यादा की रकम पर पर्सेंटेज की जगह 5 रुपये प्रति लेनदेन का फ्लैट रेट रखा गया है। म्युचुअल फंड, शेयर, स्टॉकब्रोकर और डीलर को किए जाने वाले पेमेंट पर 0.02 फीसदी MDR लगेगा, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये प्रति लेनदेन होगी। छोटे और खुदरा निवेशकों को शेयर बाजार से जुड़े रहने का भरोसा बना रहे, इसलिए यह दर सबसे कम रखा गया है।

सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि MDR ग्राहक पर लगाया गया टैक्स या फीस नहीं है, यह खर्च सिर्फ मर्चेंट और पेमेंट सिस्टम के बीच का है। बैंकों को साफ निर्देश दिए गए हैं कि कोई भी दुकानदार यह चार्ज ग्राहकों से वसूल न करे। UPI ऐप कंपनियों को भी यूजर्स पर कोई प्लेटफॉर्म फीस, प्रोसेसिंग फीस या छुपा चार्ज लगाने की इजाजत नहीं है। लोग बिना किसी मासिक कोटे या लिमिट के UPI का मुफ्त इस्तेमाल करते रहेंगे।

बैंक और एनपीसीआई की तरफ से तय रोजाना की ट्रांजैक्शन लिमिट, जो आमतौर पर 1 लाख से 5 लाख रुपये के बीच होती है, इस MDR व्यवस्था से जुड़ी नहीं है। यह लिमिट सिर्फ सुरक्षा और रिस्क मैनेजमेंट के लिए बनाई गई है, इसका MDR देने या न देने से कोई लेना-देना नहीं।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश में होने वाले कुल मर्चेंट लेनदेन में से करीब 96 फीसदी इस चार्ज से पूरी तरह मुक्त रहेंगे, क्योंकि ज्यादातर लेनदेन या तो 2,000 रुपये के अंदर होते हैं या छोटे व्यापारियों की कैटेगरी में आते हैं। बाकी बचे सिर्फ 4 फीसदी बड़े मर्चेंट लेनदेन पर ही MDR लागू होगा।

यह नया ढांचा पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 के तहत UPI स्टीयरिंग कमेटी की गहन चर्चा के बाद लागू किया गया है। संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति ने अपनी 32वीं रिपोर्ट में कहा था कि डिजिटल पेमेंट सिस्टम को लंबे समय तक टिकाए रखने के लिए एक मजबूत रेवेन्यू मॉडल की जरूरत है। बड़े लेनदेन से मिलने वाले रेवेन्यू का इस्तेमाल ग्रामीण और छोटे शहरों में बैंक और UPI नेटवर्क बढ़ाने में होगा। इसके अलावा कुल MDR रकम का 5 फीसदी हिस्सा एक खास फंड में जमा किया जाएगा, जिसका इस्तेमाल छोटे व्यापारियों के बीच UPI के प्रसार और उन्हें डिजिटल इकोनॉमी से जोड़ने में किया जाएगा।

यानी आम आदमी को किसी दूसरे व्यक्ति को पैसे भेजते वक्त, दुकान से 2,000 रुपये तक की खरीदारी करते वक्त या छोटे व्यापारियों को पेमेंट करते वक्त एक रुपया भी अतिरिक्त नहीं देना होगा। यह नई व्यवस्था सिर्फ बड़े मर्चेंट लेनदेन के जरिए डिजिटल पेमेंट सिस्टम को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के मकसद से लाई गई है।

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