मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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18:20 IST

GST काउंसिल की मीटिंग 7 अक्टूबर को, यूपीआई एमडीआर चार्ज पर छोटे कारोबारियों को राहत मिलने की उम्मीद

वस्तू और सेवा कर काउंसिल की 57वीं बैठक 7 अक्टूबर 2026 को होगी, जिसमें यूपीआई एमडीआर चार्ज पर बड़ा फैसला आ सकता है।

GST काउंसिल की मीटिंग 7 अक्टूबर को, यूपीआई एमडीआर चार्ज पर छोटे कारोबारियों को राहत मिलने की उम्मीद
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

जीएसटी काउंसिल की 57वीं बैठक अब 7 अक्टूबर 2026 को होने जा रही है। पहले यह मीटिंग 12 सितंबर 2026 को होनी थी, लेकिन ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की वजह से इसे आगे बढ़ा दिया गया था। इस बैठक से पहले 5 और 6 अक्टूबर को अधिकारियों की मीटिंग रखी गई है।

माना जा रहा है कि इस बैठक में यूपीआई एमडीआर चार्ज को लेकर भी अहम फैसले लिए जा सकते हैं, जिस पर आजकल कारोबारियों में काफी नाराजगी है। सरकार ने ऐलान किया है कि 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से ज्यादा के पर्सन-टू-मर्चेंट यूपीआई ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर चार्ज लगेगा।

उम्मीद जताई जा रही है कि छोटे कारोबारियों को इस यूपीआई एमडीआर चार्ज से राहत मिल सकती है। पिछले साल जीएसटी काउंसिल की 56वीं बैठक 3 और 4 सितंबर 2025 को हुई थी, जिसमें जीएसटी दरों और कैटेगरी में बदलाव किए गए थे। इसी आधार पर माना जा रहा है कि इस बार की मीटिंग में भी बड़े बदलाव और राहत मिल सकती है।

कई व्यापारी पहले ही यूपीआई से पेमेंट लेना बंद कर चुके हैं। उनका कहना है कि इससे उन्हें ही नुकसान होगा, इसलिए वे धीरे-धीरे यह सुविधा बंद कर रहे हैं। एमडीआर का बोझ ग्राहकों पर नहीं, बल्कि व्यापारियों पर पड़ता है। यानी यूपीआई पेमेंट ग्राहकों के लिए मुफ्त ही रहेगा, लेकिन छोटे व्यापारियों की टेंशन बढ़ सकती है। यह चार्ज सिर्फ मर्चेंट पेमेंट पर लगेगा, यानी पर्सन-टू-पर्सन पेमेंट पर कोई चार्ज नहीं लगेगा।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन ने साफ किया है कि यह कोई टैक्स नहीं है, बल्कि डिजिटल पेमेंट सिस्टम को मेंटेन करने और इंफ्रास्ट्रक्चर का काम सुचारू रूप से चलाने के लिए सिर्फ एक चार्ज है। सरकार ने यह भी कहा है कि ज्यादातर ट्रांजैक्शन 2,000 रुपये से कम के हैं, जिन पर यह चार्ज नहीं लगेगा।

बावजूद इसके, सबसे ज्यादा विरोध छोटे कारोबारियों की तरफ से हो रहा है, क्योंकि जिन कारोबारियों का टर्नओवर जीएसटी रजिस्ट्रेशन की लिमिट से कम है, वे रजिस्ट्रेशन नहीं कराते। इसका नतीजा यह होता है कि उन्हें इनपुट टैक्स क्रेडिट का फायदा नहीं मिल पाता, जिससे छोटे कारोबारियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। यही वजह है कि अगली जीएसटी काउंसिल मीटिंग में सरकार से इन छोटे कारोबारियों को कुछ राहत देने की उम्मीद की जा रही है।

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