स्वीकृत नगरसेवकों पर फैसला लें, वरना हाईकोर्ट जाएंगे; KDMC प्रशासन को ठाकरे गुट की चेतावनी
शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट ने KDMC प्रशासन से कहा है कि आगामी महासभा में स्वीकृत नगरसेवकों पर फैसला लेकर अधिकृत घोषणा की जाए, वरना मुंबई उच्च न्यायालय में दाद मांगी जाएगी।
कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका (KDMC) में स्वीकृत नगरसेवकों की नियुक्ति का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट ने महापालिका प्रशासन को चेतावनी दी है कि आने वाली महासभा में इस पर फैसला लेकर अधिकृत घोषणा की जाए, वरना मुंबई उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जाएगा।
ठाकरे गुट का आरोप है कि केडीएमसी का चुनाव हुए करीब नौ महीने बीत चुके हैं, फिर भी स्वीकृत नगरसेवकों की नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। पार्टी का दावा है कि चुनाव के बाद नियमों के मुताबिक एक तय अवधि के भीतर स्वीकृत नगरसेवकों की नियुक्ति या चयन होना चाहिए। इसी वजह से गुट की मांग है कि इस प्रक्रिया को और लटकाया न जाए। यानी गुट का कहना है कि नौ महीने बाद भी मामला अटका हुआ है और अब इस पर साफ फैसला होना चाहिए।
इस सिलसिले में शिवसेना ठाकरे गुट के गटनेता उमेश बोरगावकर ने केडीएमसी आयुक्त अभिनव गोयल को लिखित पत्र दिया है। पत्र में मांग की गई है कि आगामी महासभा के कामकाज में स्वीकृत नगरसेवकों की नियुक्ति का विषय लिया जाए, उस पर फैसला हो और उसकी अधिकृत घोषणा की जाए। यानी सिर्फ चर्चा नहीं, बल्कि फैसला और उसका एलान, दोनों की मांग पत्र में रखी गई है।
बोरगावकर ने चेतावनी दी है कि अगर महासभा में इस विषय पर कोई फैसला नहीं हुआ, तो ठाकरे गुट मुंबई उच्च न्यायालय में दाद मांगेगा। इससे स्वीकृत नगरसेवकों का मामला प्रशासनिक स्तर के साथ-साथ कानूनी मोड़ भी ले सकता है। यानी जो मसला अब तक महापालिका के भीतर का था, वह अदालत तक पहुंच सकता है।
स्वीकृत नगरसेवकों को महापालिका के कामकाज में हिस्सेदारी मिलती है, इसलिए उनकी नियुक्ति का राजनीतिक महत्व भी है। यही वजह है कि राजनीतिक पार्टियों की नजर इस पर है कि नियुक्ति की प्रक्रिया कब पूरी होती है।
ठाकरे गुट ने सीधे उच्च न्यायालय जाने की चेतावनी दी है। ऐसे में अब कल्याण-डोंबिवली के राजनीतिक हलकों की नजर इस पर टिकी है कि आगामी महासभा में प्रशासन यह विषय एजेंडे पर लेगा या नहीं, और नियुक्ति को लेकर आखिर क्या फैसला करेगा।