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23:26 IST

2000 रुपये तक की UPI पेमेंट पर अब कोई चार्ज नहीं, सरकार ने नोटिफिकेशन जारी किया

वित्त मंत्रालय ने 14 सितंबर 2026 को गजट नोटिफिकेशन जारी करके UPI और RuPay डेबिट कार्ड पेमेंट पर चार्ज लगाने की अफवाहों पर विराम लगाया।

2000 रुपये तक की UPI पेमेंट पर अब कोई चार्ज नहीं, सरकार ने नोटिफिकेशन जारी किया
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

रोज UPI से पेमेंट करने वाले करोड़ों लोगों को केंद्र सरकार ने बड़ी राहत दी है। अब 2,000 रुपये तक के UPI ट्रांजैक्शन पर और RuPay डेबिट कार्ड से किए गए किसी भी पेमेंट पर बैंक या पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर सीधा या घुमा-फिरा कर कोई चार्ज नहीं वसूल पाएंगे। यह जानकारी वित्त मंत्रालय ने खुद एक ऑफिशियल गजट नोटिफिकेशन जारी करके दी है।

वित्त मंत्रालय के वित्तीय विभाग ने यह नोटिफिकेशन 14 सितंबर 2026 को जारी किया। पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम एक्ट, 2007 के तहत इन दोनों पेमेंट तरीकों को साफ-साफ शामिल किया गया है। नोटिफिकेशन में लिखा है कि इन माध्यमों से पैसा भेजने या लेने वाले किसी भी व्यक्ति से कोई चार्ज नहीं लिया जाएगा।

नए आदेश में साफ किया गया है कि इस व्यवस्था में दो इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट तरीके आते हैं - RuPay डेबिट कार्ड से किया गया पेमेंट, और 2,000 रुपये तक के सभी UPI ट्रांजैक्शन। सरकार ने यह भी बता दिया कि इन दोनों तरीकों का इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों या दुकानदारों से बैंक और फिनटेक कंपनियां किसी भी तरीके से फीस नहीं ले सकतीं। मतलब आपका रोज का 2,000 रुपये तक का UPI पेमेंट पूरी तरह फ्री ही रहेगा।

कुछ समय से यह चर्चा जोरों पर थी कि UPI ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR लागू किया जा सकता है। डिजिटल पेमेंट तेजी से बढ़ने के चलते बैंकों, फिनटेक कंपनियों और पूरे पेमेंट सिस्टम पर पड़ रहे आर्थिक बोझ को लेकर बहस चल रही थी। लेकिन सरकार ने 2,000 रुपये तक के ट्रांजैक्शन पर स्थिति साफ कर दी, जिससे आम आदमी और छोटे व्यापारियों के मन का कन्फ्यूजन दूर हो गया है।

यहां एक बात समझना जरूरी है - नए नोटिफिकेशन में सिर्फ 2,000 रुपये तक के UPI ट्रांजैक्शन को यह खास छूट दी गई है। इसका मतलब यह नहीं है कि सारे UPI ट्रांजैक्शन हमेशा के लिए फ्री रहेंगे। बड़ी रकम वाले बिजनेस UPI ट्रांजैक्शन पर आगे चलकर MDR लगाने को लेकर सरकार पहले से ही विचार-विमर्श कर रही है।

यह फैसला वित्त मंत्रालय ने पेमेंट सेटलमेंट सिस्टम एक्ट, 2007 के सेक्शन 10A के तहत लिया है। इस कानूनी प्रावधान के मुताबिक केंद्र सरकार को यह पूरा अधिकार है कि वह कुछ खास इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट तरीकों को तय करे और उन पर किसी भी तरह का चार्ज लगाने पर रोक लगा दे।

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