ट्रम्प को तीसरी बार राष्ट्रपति बनने की चाह, मानी कानूनी अड़चन
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डोनाल्ड ट्रम्प ने पॉडकास्ट इंटरव्यू में तीसरी बार राष्ट्रपति बनने की इच्छा जताई, पर माना कि अमेरिकी कानून में यह शायद मुमकिन न हो।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर कहा है कि वे तीसरी बार व्हाइट हाउस पहुंचना चाहते हैं। यह बात उन्होंने 'पॉड फोर्स वन' नाम के पॉडकास्ट में मिरांडा डिवाइन को दिए इंटरव्यू के दौरान कही। साथ ही उन्होंने यह भी माना कि अमेरिका के कानून के हिसाब से तीसरी बार राष्ट्रपति बनना शायद मुमकिन नहीं होगा।
ट्रम्प के इस बयान के बाद अमेरिका के सियासी हलकों में चर्चा फिर शुरू हो गई है। यह चर्चा उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा को लेकर भी है और अमेरिकी संविधान की तय की हुई हदों को लेकर भी।
इंटरव्यू में ट्रम्प से पूछा गया कि क्या वे फिर चुनाव लड़ना चाहेंगे। इस पर उन्होंने कहा कि मौका मिला तो उन्हें दोबारा चुनाव लड़ना अच्छा लगेगा। ट्रम्प ने यह दावा भी किया कि हाल के एक सर्वे में वे बाकी संभावित उम्मीदवारों से आगे हैं। हालांकि मौजूदा संवैधानिक प्रावधानों को देखते हुए उन्होंने इशारा किया कि वे फिर चुनाव नहीं लड़ पाएंगे।
अमेरिकी संविधान के 22वें संशोधन के मुताबिक कोई भी शख्स दो बार ही राष्ट्रपति चुना जा सकता है। यानी ट्रम्प के तीसरी बार चुनाव लड़ने के रास्ते में संवैधानिक रुकावट है। वे इससे पहले भी तीसरे कार्यकाल को लेकर अपनी इच्छा जता चुके हैं। लेकिन अब उन्होंने माना है कि कानून इस कोशिश पर पाबंदी लगाता है।
तीसरे कार्यकाल की इच्छा जताने के साथ ही ट्रम्प ने मौजूदा कार्यकाल के बचे हुए वक्त को अहम बताया। उन्होंने कहा कि उनके राष्ट्रपति पद के कार्यकाल में अभी दो साल से ज्यादा का वक्त बाकी है। उन्हें भरोसा है कि इस दौरान देश के लिए कई जरूरी काम किए जा सकते हैं। इस हिसाब से देखें तो तीसरे कार्यकाल की गुंजाइश भले न हो, पर उनका जोर बचे हुए वक्त में अपने प्रशासन के कामकाज को और असरदार बनाने पर दिखता है।
ट्रम्प के बयान से 2028 के राष्ट्रपति चुनाव की चर्चा को भी हवा मिली है। लेकिन 22वां संशोधन दो बार चुने जाने की जो हद तय करता है, उसे बदलने के लिए संविधान संशोधन की प्रक्रिया से गुजरना होगा। ऐसे में ट्रम्प की इच्छा और असल में मौजूद संवैधानिक रास्ते के बीच काफी बड़ा फासला है।
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