मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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18:54 IST

अमेरिका-डेन्मार्क का ऐतिहासिक करार, ग्रीनलैंड में बनेगा अमेरिकी सैन्य अड्डा

ट्रम्प, डेन्मार्क की पीएम फ्रेडरिक्सन और ग्रीनलैंड के पीएम नील्सन ने त्रिपक्षीय रक्षा समझौते पर दस्तखत किए, जो 1951 के पुराने करार की जगह लेगा।

अमेरिका-डेन्मार्क का ऐतिहासिक करार, ग्रीनलैंड में बनेगा अमेरिकी सैन्य अड्डा
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

आर्कटिक इलाके में सुरक्षा का पूरा गणित बदलने वाला एक बड़ा कदम उठाया गया है, जो दुनिया में सामरिक नजरिए से सबसे संवेदनशील माने जाने वाले क्षेत्रों में से एक है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, डेन्मार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन और ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रेडरिक नील्सन ने एक ऐतिहासिक त्रिपक्षीय रक्षा समझौते पर दस्तखत किए हैं। यह नया करार 1951 में वॉशिंगटन और कोपनहेगन के बीच हुए पुराने रक्षा समझौते की जगह लेगा और उसे आज के दौर की चुनौतियों के हिसाब से ज्यादा असरदार बनाएगा।

दस्तखत के बाद हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए ट्रम्प ने खुशी जाहिर की। उन्होंने इस करार को सालों की मेहनत का नतीजा बताया और कहा कि इस पर दस्तखत करने के लिए बरसों से कोशिशें चल रही थीं, जो अब आखिरकार पूरी हुई हैं। ट्रम्प के मुताबिक यह करार अमेरिका, यूरोप और ग्रीनलैंड, तीनों के लिए बहुत फायदेमंद साबित होगा। उन्होंने भरोसा जताते हुए कहा, "हमारे आपसी रिश्ते और भी बेहतर और सुरक्षित रहेंगे।"

डेन्मार्क की पीएम मेटे फ्रेडरिक्सन ने भी इस करार का स्वागत करते हुए इसे अमेरिका के साथ लंबे समय से चले आ रहे सहयोग का एक सुनहरा पड़ाव बताया। उन्होंने कहा कि 75 साल पहले 1951 में ग्रीनलैंड की सुरक्षा के लिए एक समझौता हुआ था, लेकिन आज का यह अपडेटेड करार उससे भी कहीं ज्यादा मजबूत, व्यापक और लंबे समय तक टिकने वाला है। फ्रेडरिक्सन ने खासतौर पर कहा कि इस करार से आर्कटिक इलाके में सुरक्षा और डेटरेंस यानी रोकथाम की ताकत काफी मजबूत होगी, जिससे कोई भी दुश्मन देश या बाहरी ताकत ग्रीनलैंड की जमीन पर पैर नहीं जमा पाएगी।

करार का सबसे अहम पहलू यह है कि इसमें ग्रीनलैंड की स्वायत्तता और सार्वभौमत्व को पूरी तरह बरकरार रखा गया है। फ्रेडरिक्सन ने साफ किया कि यह समझौता डेन्मार्क राज्य की क्षेत्रीय अखंडता और ग्रीनलैंड की जनता के आत्मनिर्णय के अधिकार को अछूता रखता है। इस बात का पूरा ख्याल रखा गया है कि कोई भी बाहरी देश सीधे ग्रीनलैंड पर कब्जा न कर सके। साथ ही आर्कटिक क्षेत्र में पश्चिमी मित्र देशों की मौजूदगी बनी रहेगी, ताकि रूस और चीन जैसे देशों के संभावित असर को समय रहते रोका जा सके। डेनिश पीएम ने कहा कि यह करार नाटो को मजबूत करने की एक बड़ी कड़ी है।

ग्रीनलैंड के पीएम जेन्स-फ्रेडरिक नील्सन ने इसे "ग्रीनलैंड के लिए एक नए दौर की शुरुआत" बताया। उन्होंने कहा कि 1951 का पुराना करार अब 2026 की आधुनिक चुनौतियों से निपटने के लिए अपडेट किया गया है और यह समझौता सिर्फ ग्रीनलैंड के बारे में नहीं बल्कि सीधे ग्रीनलैंड की जनता के साथ किया गया है, जिसमें स्थानीय लोगों के हक, उनकी रोजी-रोटी और देश के टिकाऊ विकास का गंभीरता से ध्यान रखा गया है।

दूसरे विश्व युद्ध और शीत युद्ध के दौर में ग्रीनलैंड ने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा में अहम भूमिका निभाई थी। आज जब आर्कटिक क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों और समुद्री रास्तों को लेकर बड़ी ताकतों के बीच होड़ बढ़ी है, ग्रीनलैंड ने पश्चिमी गठबंधन और नाटो के प्रति अपनी प्रतिबद्धता फिर साबित की है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रम्प से जब ग्रीनलैंड के मालिकाना हक को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने सीधा जवाब देने से बचते हुए कहा, "मुझे ग्रीनलैंड के लोग बहुत पसंद हैं और वहां का नेतृत्व बहुत अच्छा काम कर रहा है।"

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