मंगलवार, 3 नवंबर 2026

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चंद्रपुर में विदर्भ राज्य आंदोलन समिति का 'मिशन २०२७' मेला, ३१ दिसंबर २०२७ तक अलग विदर्भ का संकल्प

चंद्रपुर में विदर्भ राज्य आंदोलन समिति का 'मिशन २०२७' मेला, ३१ दिसंबर २०२७ तक अलग विदर्भ का संकल्प तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
सियासत PT24 टीम

चंद्रपुर के जिजाऊ लॉन में हुए जनजागृति मेले में विदर्भ राज्य आंदोलन समिति ने ३१ दिसंबर २०२७ से पहले स्वतंत्र विदर्भ राज्य बनाने का निर्धार जताया।

चंद्रपुर में स्वतंत्र विदर्भ राज्य की मांग ने फिर जोर पकड़ा है। विदर्भ राज्य आंदोलन समिति की तरफ से शहर के जिजाऊ लॉन में 'मिशन २०२७' नाम से जनजागृति मेला रखा गया। इस मेले में ३१ दिसंबर २०२७ से पहले स्वतंत्र विदर्भ राज्य बनाने का निर्धार जताया गया।

मेले की अध्यक्षता पूर्व विधायक ॲड. वामनराव चटप ने की। वरिष्ठ पत्रकार प्रकाशभाऊ पोहरे के हाथों इसका उद्घाटन हुआ। कार्यक्रम में विदर्भ के विकास का अनुशेष, सिंचाई, किसान आत्महत्या और बेरोजगारी के सवाल उठाए गए। मेले से पहले माता महाकाली का आशीर्वाद लेकर करीब पाँच सौ दुपहिया गाड़ियों की रैली शहर में निकाली गई।

समिति के नेताओं ने नारा दिया, "ना दान चाहिए, ना अनुदान चाहिए, हमे तो सिर्फ विदर्भ राज्य चाहिए"। इसी नारे के साथ उन्होंने ३१ दिसंबर २०२७ से पहले अलग विदर्भ बनाने का संकल्प लिया। नेताओं का कहना था कि स्वतंत्र विदर्भ की मांग को १२१ साल की ऐतिहासिक विरासत है और अब इसे निर्णायक मोड़ पर ले जाने का पक्का इरादा है।

वक्ताओं ने नागपुर करार (१९५३) और १९५६ की संविधान संशोधन का हवाला दिया। उनके मुताबिक केंद्र ने विदर्भ का वैधानिक विकास मंडल वक्त पर नहीं बनाया, इसलिए सिंचाई का ६० हजार करोड़ रुपये का फंड अटक गया। वक्ताओं ने कहा कि इसी वजह से १३१ बांध अधूरे रह गए और १४ लाख हेक्टेयर जमीन सिंचाई से वंचित रही। नेताओं ने दावा किया कि इसी सूखे और कर्ज के बोझ से अमरावती विभाग और वर्धा जिले में ४७ हजार किसानों ने आत्महत्या की।

वक्ताओं ने यह भी कहा कि अलग-अलग क्षेत्रों में १५ हजार करोड़ के अनुशेष से विकास रुक गया है। कुपोषण से होने वाली बच्चों की मौतें, बेरोजगारी, युवाओं का पलायन और महाराष्ट्र पर चढ़ा ९ लाख ३७ हजार करोड़ का कर्ज, इन सबको देखते हुए उनकी राय थी कि महाराष्ट्र में रहकर विदर्भ का ७५ हजार करोड़ का अनुशेष कभी नहीं भर सकता। इसलिए किसान आत्महत्या, बेरोजगारी और नक्सलवाद जैसे गंभीर सवालों का एकमात्र रास्ता स्वतंत्र विदर्भ है, ऐसा वक्ताओं ने कहा।

मेले में अरुण केदार, प्रा. मंजुषा तिरपुडे, मुकेश मासुरकर, डॉ. रमेश गजबे, ॲड. दीपक चटप, शालिक माऊलीकर और विदर्भ के सभी जिलाध्यक्षों ने मार्गदर्शन किया। प्रास्ताविक मुन्ना आवळे ने रखा, संचालन मितीन भागवत ने किया और सुरेश शंभरकर ने आभार माना।

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