मंगलवार, 3 नवंबर 2026

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इंडिया गठबंधन का भरोसा: यूपी और उत्तराखंड के नतीजे तय करेंगे 2029 की दिल्ली

इंडिया गठबंधन का भरोसा: यूपी और उत्तराखंड के नतीजे तय करेंगे 2029 की दिल्ली तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
सियासत PT24 टीम

उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के विधानसभा चुनावों पर इंडिया गठबंधन ने ध्यान लगाया है। गठबंधन को लगता है कि इन्हीं नतीजों से 2029 में दिल्ली की सत्ता तय होगी।

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, और इंडिया गठबंधन ने अपना पूरा ध्यान इन्हीं दो राज्यों पर लगा दिया है। गठबंधन को भरोसा है कि इन राज्यों के नतीजे ही 2029 में दिल्ली की सत्ता का फैसला करेंगे। यानी इन दोनों राज्यों की जीत उसके लिए 2029 के लोकसभा चुनाव के सियासी हिसाब-किताब के लिहाज से अहम है।

उत्तर प्रदेश को लेकर गठबंधन कितना गंभीर है, यह इस बात से दिखता है कि रैली से एक दिन पहले अखिलेश यादव, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने दिल्ली में देर रात बैठक की थी। समाजवादी पार्टी के प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पिछले हफ्ते में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से पांच बार मिल चुके हैं। हर बैठक में सीटों के बंटवारे पर नहीं, बल्कि वोटर लिस्ट और बूथ मैनेजमेंट पर बात हुई।

इस गंभीरता की सबसे बड़ी वजह हाल ही में हुए विधान परिषद चुनाव के नतीजे बताए जा रहे हैं। उस चुनाव के बाद से इंडिया गठबंधन उत्तर प्रदेश को लेकर पूरी तरह जोश में है। दोनों सीटों पर हार हुई, खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वाराणसी चुनाव क्षेत्र में, और इससे गठबंधन के कार्यकर्ताओं में नई जान आ गई है।

इधर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गढ़ माने जाने वाले गोरखपुर में भी भाजपा को जीत के लिए जूझना पड़ा। एक सीट पर जीत का अंतर कम रहा, और यह भाजपा खेमे में चिंता की वजह बन गया है। भाजपा ब्रज को एक मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है।

मंच पर अखिलेश यादव के साथ प्रोफेसर रामगोपाल यादव, कैराना की सांसद इकरा हसन, धर्मेंद्र यादव और अवधेश प्रसाद मौजूद थे। इकरा हसन की मौजूदगी को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जाट, मुस्लिम और किसान समीकरण से जोड़ा जा रहा है, जिसे 'जेएमएफ' समीकरण कहा गया है।

आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने भी उत्तर प्रदेश का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने बिहार में डकैती डालकर हमें रोका है, लेकिन अब अखिलेशजी के साथ मिलकर हम उन्हें उत्तर प्रदेश में हराएंगे।

इस सबके बीच उत्तराखंड दूसरे नंबर पर रहा। उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने मंच से अंकिता भंडारी का मुद्दा उठाया।

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