काँगो में इबोला का प्रकोप बढ़ा, मरीज 10 हजार के पार, अब तक 4,887 मौतें
डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ काँगो में बुंदिबुग्यो प्रकार के इबोला वायरस से 27 अक्टूबर तक 10,060 मरीज दर्ज हुए और 4,887 लोगों की जान गई। संक्रमण केन्या और नाइजीरिया तक पहुंच चुका है।
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अफ्रीका के डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ काँगो में इबोला वायरस का प्रकोप गंभीर हो गया है। संक्रमण तेजी से फैल रहा है और मरीजों की गिनती 10 हजार के पार चली गई है। 27 अक्टूबर को मिले आंकड़ों के मुताबिक देश में अब तक 10 हजार 60 मरीज दर्ज किए गए हैं और 4 हजार 887 लोगों की मौत हो चुकी है। यह प्रकोप इबोला के बुंदिबुग्यो (Bundibugyo) प्रकार के वायरस से फैला है।
यह संक्रमण मई 2026 में शुरू हुआ था और अब अफ्रीका के दूसरे देशों तक भी पहुंच गया है। केन्या और नाइजीरिया में भी मरीज सामने आए हैं, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था की चिंता बढ़ गई है। काँगो में यह अब तक का सबसे बड़ा इबोला प्रकोप है और इसमें सबसे ज्यादा मौतें दर्ज हुई हैं।
बीमारी का फैलाव बहुत बड़े इलाके में हुआ है। देश के आठ प्रांतों के 66 स्वास्थ्य क्षेत्रों में संक्रमण दर्ज किया गया है। इनमें इतुरी प्रांत सबसे ज्यादा प्रभावित है। उत्तर किवू प्रांत में भी बड़ी संख्या में मरीज मिले हैं।
कई इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाएं कम पड़ रही हैं, इसलिए मरीजों को वक्त पर इलाज नहीं मिल पा रहा। यह बात भी सामने आई है कि कई मरीजों की मौत अस्पताल पहुंचने से पहले ही हो जाती है। ऐसे में संक्रमण की पहचान करना और मरीजों को फौरन इलाज दिलाना स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती बन गया है।
अब यह संक्रमण सिर्फ काँगो तक सीमित नहीं रहा और अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय बन गया है। काँगो से सफर करने वाले एक व्यक्ति की वजह से केन्या में इबोला पहुंचा। केन्या में नौ मरीज दर्ज हुए हैं और दो की मौत हुई है। नाइजीरिया में भी काँगो और युगांडा के रास्ते सफर से जुड़ा एक मरीज मिला है।
इसके बाद अफ्रीका के देशों ने एयरपोर्ट, सीमा वाले इलाकों और स्वास्थ्य केंद्रों पर जांच बढ़ा दी है। संदिग्ध मरीजों को अलग रखने, उनके संपर्क में आए लोगों को ढूंढने और लैब टेस्ट पर जोर दिया जा रहा है।
इबोला पर काबू पाने में लगे स्वास्थ्य कर्मचारियों के सामने सिर्फ मेडिकल ही नहीं, सुरक्षा की भी समस्या खड़ी हो गई है। पूर्वी काँगो के त्शोपो प्रांत में इबोला की जांच मुहिम के दौरान हुए हमले में एक नर्स की मौत हो गई, जबकि एक और स्वास्थ्य कर्मचारी गंभीर रूप से घायल हो गया। स्थानीय लोगों में फैला डर, गलतफहमियां और स्वास्थ्य व्यवस्था पर भरोसे की कमी की वजह से बचाव के उपाय लागू करने में दिक्कतें आ रही हैं।
बुंदिबुग्यो वायरस के इस प्रकार के लिए फिलहाल कोई आधिकारिक रूप से मान्यता प्राप्त खास वैक्सीन या इलाज उपलब्ध नहीं है। इसलिए मरीजों की जल्दी पहचान, उन्हें अलग रखना और सही मेडिकल देखभाल और भी जरूरी हो गई है। अफ्रीका की स्वास्थ्य व्यवस्थाएं और विश्व स्वास्थ्य संगठन संक्रमण को काबू में करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन बढ़ते मरीजों और मौतों को देखते हुए इस संकट पर काबू पाना बड़ी चुनौती बना हुआ है।
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