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थर्मल प्लांट की राख से बनेंगे महाराष्ट्र के एक्सप्रेसवे, महानिर्मिति और एमएसआरडीसी में करार

चार परियोजनाओं में कुल 6.17 करोड़ मीट्रिक टन राख इस्तेमाल करने की योजना है।

थर्मल प्लांट की राख से बनेंगे महाराष्ट्र के एक्सप्रेसवे, महानिर्मिति और एमएसआरडीसी में करार तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

महाराष्ट्र में अब सड़क और एक्सप्रेसवे बनाने में थर्मल पावर प्लांट की राख काम आएगी। इसके लिए महाराष्ट्र राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी यानी महानिर्मिति और महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास महामंडल के बीच समझौता हो गया है।

समझौते के मुताबिक जनवरी 2027 से दिसंबर 2028 के बीच पूर्वी महाराष्ट्र की प्रस्तावित सड़क परियोजनाओं में करीब 6.17 करोड़ मीट्रिक टन राख इस्तेमाल करने की योजना है।

ऊर्जा राज्य मंत्री मेघना साकोरे-बोर्डीकर की मौजूदगी में इस समझौते पर दस्तखत हुए। महानिर्मिति की तरफ से अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक राधाकृष्णन बी. ने और एमएसआरडीसी की तरफ से उपाध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक अनिल कुमार गायकवाड ने हस्ताक्षर किए। इस पहल का मकसद बिजली संयंत्रों से निकलने वाली राख का बेहतर इस्तेमाल करना और राज्य में बुनियादी ढांचे के विकास को आगे बढ़ाना है।

थर्मल पावर प्लांट की राख को लंबे वक्त तक जमा रखने से पर्यावरण और संचालन से जुड़ी दिक्कतें खड़ी हो सकती हैं। सड़क परियोजनाओं में राख का इस्तेमाल बढ़ने से पुराने राख भंडारों का उपयोग हो सकता है और राख को बरसों तक जमा रखने के जोखिम भी घट सकते हैं। समझौते में यह शर्त है कि राख की ढुलाई, रखरखाव और इस्तेमाल के दौरान पर्यावरण के नियम, तकनीकी मानक और कानूनी प्रावधान मानने होंगे।

इसका एक मकसद केंद्र सरकार की 31 दिसंबर 2021 की राख अधिसूचना के हिसाब से राख के 100 प्रतिशत उपयोग को बढ़ावा देना है। साथ ही महाराष्ट्र सरकार की 19 सितंबर 2025 की राख उपयोग नीति को लागू करना भी इसका हिस्सा है। यह समझौता 31 मार्च 2032 तक या संबंधित परियोजनाओं के पूरा होने तक, जो भी पहले हो, लागू रहेगा। दोनों संस्थाओं के सक्षम अधिकारियों की मंजूरी मिलने पर इसकी अवधि बढ़ाई जा सकती है।

राख कहां से मिलेगी, यह भी तय है। नागपुर क्षेत्र की परियोजनाओं के लिए कोराडी या खापरखेड़ा थर्मल पावर प्लांट से राख दी जाएगी, जबकि चंद्रपुर क्षेत्र की परियोजनाओं के लिए चंद्रपुर थर्मल पावर प्लांट से। राख की मात्रा, उसे उठाने का समय, ढुलाई का इंतजाम और आर्थिक सहायता की शर्तें तय करने के लिए संबंधित बिजली संयंत्र, एमएसआरडीसी और अधिकृत ठेकेदार या संबंधित संस्था के बीच अलग-अलग त्रिपक्षीय समझौते होंगे। आर्थिक सहायता के पात्र दावों पर कार्रवाई राख की मात्रा और उसके इस्तेमाल की पुष्टि के बाद ही की जाएगी।

अब परियोजनाओं का हिसाब देखें। नागपुर-गोंदिया एक्सप्रेसवे के लिए 2.09 करोड़ मीट्रिक टन राख की जरूरत का अनुमान है। भंडारा-गड़चिरोली एक्सप्रेसवे के लिए 1.14 करोड़ मीट्रिक टन और नागपुर-चंद्रपुर एक्सप्रेसवे के लिए 2.79 करोड़ मीट्रिक टन राख इस्तेमाल करने की योजना है। नवेगांव मोरे सुरजागढ़ खनिज परिवहन मार्ग के लिए 15 लाख मीट्रिक टन राख लगने का अनुमान है। इस तरह चारों परियोजनाओं में कुल 6.17 करोड़ मीट्रिक टन राख का इस्तेमाल प्रस्तावित है।

हालांकि राख की असल खपत परियोजनाओं की तकनीकी जरूरत, साइट की हालत और राख की उपलब्धता के हिसाब से बदल सकती है। पर्यावरण को होने वाला फायदा भी परियोजनाओं के अमल और तय तकनीकी मानकों के पालन पर टिका रहेगा।

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