मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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17:33 IST

शक्तीपीठ महामार्ग: 409 में से 129 गांवों में जमीन की संयुक्त गिनती पूरी

शक्तीपीठ महामार्ग के लिए 13 जिलों में संयुक्त जमीन की नपाई चल रही है। 409 गांवों में से 129 में काम पूरा हो चुका है।

शक्तीपीठ महामार्ग: 409 में से 129 गांवों में जमीन की संयुक्त गिनती पूरी
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

महाराष्ट्र सरकार के शक्तीपीठ महामार्ग प्रोजेक्ट के लिए जमीन अधिग्रहण का काम अब तेज हो गया है। 13 जिलों में संयुक्त जमीन पैमाइश चल रही है। इस द्रुतगति मार्ग का संशोधित नक्शा 5 मई 2026 को अधिसूचित किया गया था। उसके बाद से प्रशासन ने काम में तेजी लाई है।

पवनार (जिला वर्धा) से पत्रादेवी (जिला सिंधुदुर्ग) के बीच इस महामार्ग की कुल लंबाई 856.765 किमी प्रस्तावित है। यह मार्ग विदर्भ, मराठवाड़ा, पश्चिम महाराष्ट्र और कोंकण को जोड़ेगा। इसे धार्मिक, पर्यटन और औद्योगिक नजरिए से अहम माना जा रहा है।

जिलाधिकारी प्रशासन 40 तालुकों के 409 गांवों में संयुक्त पैमाइश करा रहा है। इनमें से 129 गांवों में पैमाइश पूरी हो चुकी है। 15 गांवों में यह काम आंशिक रूप से हुआ है। बाकी 265 गांवों में पैमाइश को लेकर किसानों से बातचीत चल रही है। अब तक 129 गांवों में सौ फीसदी पैमाइश किसानों के राजस्व विभाग को दिए सहयोग से पूरी हुई है।

संशोधित नक्शे के हिसाब से पैमाइश विदर्भ के वर्धा और यवतमाल जिलों में चल रही है। मराठवाड़ा में नांदेड, हिंगोली, परभणी, बीड, लातूर और धाराशिव जिले शामिल हैं। पश्चिम महाराष्ट्र में सोलापुर, सातारा, सांगली और कोल्हापुर जिलों में, और कोंकण में सिंधुदुर्ग जिले में यह काम चल रहा है।

विदर्भ में वर्धा जिले के दो तालुकों के 20 गांवों और यवतमाल जिले के छह तालुकों के 70 गांवों में संयुक्त पैमाइश हो चुकी है।

मराठवाड़ा में नांदेड जिले के एक तालुका के 11 गांवों में, हिंगोली के तीन तालुकों के 40 गांवों में, परभणी के दो तालुकों के छह गांवों में और बीड के दो तालुकों के आठ गांवों में पैमाइश पूरी हो गई है। लातूर के तीन तालुकों के चार गांवों में पैमाइश हुई है, जबकि आठ गांवों में आंशिक रूप से हुई है। धाराशिव के एक तालुका के आठ गांवों में पैमाइश पूरी हुई है और पांच गांवों में आंशिक रूप से हुई है। पश्चिम महाराष्ट्र के जिलों में अभी किसानों के साथ बातचीत चल रही है।

किसानों का भरोसा जीतने के लिए महामंडल के अमले और जिलाधिकारी स्तर पर संवाद चल रहा है। महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास महामंडल (एमएसआरडीसी) ने जनजागरण और संवाद के लिए शक्तीपीठ संवाद यात्रा निकाली थी। उसका पहला चरण वर्धा जिले में हुआ। इसके अलावा जिलाधिकारी प्रशासन, राजस्व विभाग और महामंडल के बीच तालमेल के लिए पुणे में यशदा में एक कार्यशाला भी हो चुकी है।

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