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थर्मल पावर स्टेशनों की राख से बनेंगे विदर्भ के तीन एक्सप्रेसवे, महानिर्मिती और MSRDC में करार

महानिर्मिती और महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास महामंडल (एमएसआरडीसी) के बीच सामंजस्य करार हुआ। जनवरी 2027 से दिसंबर 2028 के बीच करीब 6.17 करोड़ मेट्रिक टन राख के इस्तेमाल का प्रस्ताव है।

थर्मल पावर स्टेशनों की राख से बनेंगे विदर्भ के तीन एक्सप्रेसवे, महानिर्मिती और MSRDC में करार तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

गोंदिया, 22 तारीख: थर्मल पावर स्टेशनों की राख का टिकाऊ इस्तेमाल हो और साथ ही राज्य में बुनियादी सुविधाओं का विकास भी आगे बढ़े, इसी मकसद से महानिर्मिती और महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास महामंडल (एमएसआरडीसी) के बीच सामंजस्य करार हुआ। यह करार ऊर्जा राज्यमंत्री मेघना साकोरे-बोर्डीकर की मौजूदगी में किया गया।

करार के मुताबिक जनवरी 2027 से दिसंबर 2028 के बीच पूर्व महाराष्ट्र में प्रस्तावित एक्सप्रेसवे और खनिज ढुलाई मार्ग के प्रोजेक्ट्स में करीब 6.17 करोड़ मेट्रिक टन राख इस्तेमाल करने का प्रस्ताव है।

महानिर्मिती के अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक राधाकृष्णन बी. और एमएसआरडीसी के उपाध्यक्ष व प्रबंध निदेशक अनिलकुमार बी. गायकवाड ने करार पर दस्तखत किए। इस मौके पर महानिर्मिती के संचालक (प्रोजेक्ट) अभय हरणे, कार्यकारी संचालक (पर्यावरण) डॉ. नितीन वाघ और एमएसआरडीसी के मुख्य व्यवस्थापक (पर्यावरण) नरेंद्र टोके समेत कई अधिकारी मौजूद थे।

इस करार से महानिर्मिती के कोराडी, खापरखेड़ा और चंद्रपुर थर्मल पावर स्टेशनों की राख राज्य के अहम बुनियादी प्रोजेक्ट्स में काम आएगी। अनुमानित जरूरत इस तरह है: नागपुर-गोंदिया एक्सप्रेसवे के लिए 2.09 करोड़ मेट्रिक टन, भंडारा-गडचिरोली एक्सप्रेसवे के लिए 1.14 करोड़ मेट्रिक टन, नागपुर-चंद्रपुर एक्सप्रेसवे के लिए 2.79 करोड़ मेट्रिक टन और नवेगाव मोरे-सुरजागड खनिज ढुलाई मार्ग के लिए 0.15 करोड़ मेट्रिक टन।

नागपुर इलाके के प्रोजेक्ट्स के लिए राख कोराडी या खापरखेड़ा थर्मल पावर स्टेशन से दी जाएगी, जबकि चंद्रपुर इलाके के प्रोजेक्ट्स के लिए चंद्रपुर स्टेशन से। प्रोजेक्ट की तकनीकी जरूरत, मौके की हालत और राख की उपलब्धता के हिसाब से इस्तेमाल की मात्रा बदल सकती है।

हर प्रोजेक्ट के लिए राख की मात्रा, उठान का शेड्यूल, राख का स्रोत, ढुलाई का इंतजाम और आर्थिक मदद की शर्तें तय करने के लिए अलग से त्रिपक्षीय करार होंगे। ये करार संबंधित थर्मल पावर स्टेशन, एमएसआरडीसी और अधिकृत ठेकेदार या संबंधित संस्था के बीच होंगे। राख की माप, इस्तेमाल की पुष्टि और जरूरी कागजात की जांच के बाद पात्र आर्थिक मदद के दावों पर कार्रवाई होगी।

राख की खुदाई, ढुलाई, हैंडलिंग और इस्तेमाल के दौरान पर्यावरण के नियमों, तकनीकी मानकों और कानूनी प्रावधानों का पालन किया जाएगा। केंद्र सरकार की 31 दिसंबर 2021 की फ्लाई ऐश अधिसूचना के मुताबिक राख का सौ फीसदी इस्तेमाल हासिल करना और राज्य सरकार की 19 सितंबर 2025 की राख उपयोग नीति को लागू करना, इस सहयोग का अहम मकसद है।

इस करार से थर्मल पावर स्टेशनों की पुरानी राख का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो सकेगा। लंबे समय तक राख जमा रखने से जुड़े पर्यावरण और कामकाज के जोखिम भी कम होने में मदद मिलेगी। साथ ही राज्य के बुनियादी प्रोजेक्ट्स के लिए राख के टिकाऊ इस्तेमाल की व्यवस्था बनेगी।

यह करार 31 मार्च 2032 तक या संबंधित प्रोजेक्ट पूरा होने तक, इनमें से जो पहले हो, तब तक वैध रहेगा। दोनों संस्थाओं के सक्षम अधिकारियों की मंजूरी से करार की अवधि बढ़ाई जा सकेगी।

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