महाजेनको की 6.17 करोड़ मीट्रिक टन फ्लाई ऐश समृद्धि महामार्ग विस्तार में लगेगी
महाजेनको और एमएसआरडीसी के बीच करार हुआ है। नागपुर से निकलने वाले तीन नए कॉरिडोर में थर्मल पावर प्लांट की राख इस्तेमाल होगी।
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नागपुर: औद्योगिक कचरे के निपटारे की बड़ी समस्या को सुलझाने के लिए महाराष्ट्र राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी (महाजेनको) ने महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास महामंडल (एमएसआरडीसी) के साथ करार किया है। इसके तहत समृद्धि महामार्ग के प्रस्तावित विस्तार कॉरिडोर के निर्माण के लिए 6.17 करोड़ मीट्रिक टन फ्लाई ऐश दी जाएगी।
थर्मल पावर प्लांट से निकलने वाली यह राख नागपुर से शुरू होने वाले तीन नए सड़क कॉरिडोर में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होगी। चंद्रपुर कॉरिडोर के लिए 2.79 करोड़ मीट्रिक टन, गोंदिया कॉरिडोर के लिए 2.09 करोड़ मीट्रिक टन और भंडारा-गढ़चिरौली कॉरिडोर के लिए 1.14 करोड़ मीट्रिक टन फ्लाई ऐश लगेगी।
राख कहां से आएगी, यह जगह के हिसाब से तय होगा। नागपुर की तरफ वाले हिस्सों के लिए फ्लाई ऐश कोराडी और खापरखेड़ा थर्मल पावर प्लांट से ली जाएगी। आगे के विस्तार वाले हिस्सों की जरूरत चंद्रपुर सुपर थर्मल पावर स्टेशन सीधे पूरी करेगा।
काम का ढांचा यह रहेगा कि हर सड़क हिस्से का टेंडर जिस ठेकेदार को मिलेगा, वह सप्लाई करने वाले थर्मल पावर प्लांट और एमएसआरडीसी के साथ सीधे त्रिपक्षीय करार करेगा। उम्मीद है कि इससे इलाके के थर्मल पावर स्टेशनों पर राख के भंडारण और निपटारे का जो भारी बोझ और पर्यावरण का दबाव है, वह काफी कम होगा।
महाजेनको की ओर से जारी सरकारी विज्ञप्ति के मुताबिक यह करार 31 मार्च 2032 तक मान्य रहेगा, या प्रोजेक्ट के भौतिक रूप से पूरा होने तक, इनमें से जो पहले हो। औद्योगिक कचरे का इतने बड़े पैमाने पर इस्तेमाल केंद्र और राज्य सरकार के उस निर्देश के मुताबिक है, जिसमें इन्फ्रास्ट्रक्चर के निर्माण में 100 प्रतिशत राख के इस्तेमाल की बात कही गई है।
इस तरह समृद्धि महामार्ग के विस्तार का काम और बिजली प्लांटों की राख का मसला, दोनों एक ही करार से जुड़ गए हैं। चंद्रपुर, गोंदिया और भंडारा-गढ़चिरौली, तीनों कॉरिडोर में निर्माण के दौरान यही फ्लाई ऐश काम आएगी।
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