सूखे के बीच विधायक जोरगेवार ने इरई डैम देखा, पानी के बंटवारे की साफ योजना मांगी
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चंद्रपुर जिले में सूखे के हालात को देखते हुए विधायक किशोर जोरगेवार ने कलेक्टर वसुमना पंत के साथ इरई डैम का दौरा किया और प्रशासन को पानी के इस्तेमाल की बारीक योजना बनाने के निर्देश दिए।
चंद्रपुर जिले में सूखे जैसे हालात बन गए हैं। ऐसे में जो पानी मौजूद है, उसका सही हिसाब लगाकर एक-एक बूंद सोच-समझकर खर्च करना जरूरी है। विधायक किशोर जोरगेवार ने यही बात कहते हुए प्रशासन को निर्देश दिए। उन्होंने जिलाधिकारी वसुमना पंत के साथ इरई डैम का दौरा किया और वहां मौजूद पानी के स्टॉक का जायजा लिया।
जोरगेवार ने कहा कि आने वाले दिनों में पानी की कितनी जरूरत पड़ेगी, इसे ध्यान में रखकर मौजूदा पानी की बारीक प्लानिंग की जाए। किसी भी हालत में पानी बर्बाद नहीं होना चाहिए। प्रशासन इसका ध्यान रखे कि पानी आखिरी आदमी तक पहुंचे।
इस दौरे में नगर निगम आयुक्त नरेश अकुनरी, चंद्रपुर थर्मल पावर स्टेशन के मुख्य अभियंता अनिल काथोये, उपविभागीय अधिकारी विशाल कुमार मेश्राम, नगर निगम के उपायुक्त शेषराव टाले, तहसीलदार विजय पवार और जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी सलीम शेख मौजूद थे। इनके अलावा चंद्रपुर सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता जलेश सिंग, कार्यकारी अभियंता महेश गवरी, नगर निगम के शहर अभियंता रवींद्र हजारे और दूसरे अधिकारी भी साथ थे।
भाजपा की तरफ से पूर्व महानगर अध्यक्ष और पार्षद सुभाष कासनगोट्टूवार, भारतीय जनता पार्टी राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य प्रकाश देवतले, भाजपा महामंत्री नामदेव डाहुले, रविंद्र गुरनुले, मनोज पाल, दल नेता शेखर शेट्टी, जितेश कुलमेथे, बलराम डोडानी, तुषार सोम, दशरथ सिंग ठाकुर, अमोल शेंडे, प्रलय मशाखेत्री और प्रवीण गिलबिले के साथ छह कार्यकर्ता भी मौजूद थे।
बैठक में डैम में अभी कितना पानी है, कितना मिल सकता है, आगे कितनी जरूरत पड़ सकती है और पानी बांटने की योजना कैसी हो, इन सब पर तफसील से बात हुई। जोरगेवार ने कहा कि सूखे में पानी की प्लानिंग करते वक्त हर बात को गंभीरता से लेना होगा। मौजूदा स्टॉक कितने दिन चलेगा, अलग-अलग क्षेत्रों को कितना पानी चाहिए और उसी हिसाब से बंटवारा कैसे हो, इसकी साफ योजना प्रशासन बनाए। उन्होंने यह भी कहा कि पानी की सप्लाई में किसी भी इलाके के साथ नाइंसाफी नहीं होनी चाहिए।
जोरगेवार के मुताबिक सिर्फ डैम के पानी के भरोसे बैठे रहना ठीक नहीं है। दूसरे जलस्रोतों को फिर से जिंदा करने के लिए भी खास कोशिश होनी चाहिए। कई जगह पानी के कुदरती स्रोत हैं, लेकिन देखभाल और संरक्षण न होने से वे बंद पड़ गए हैं। ऐसे स्रोतों की पहचान कर उन्हें दोबारा बहाने के लिए जरूरी काम शुरू किए जाएं। नदियों, नालों और धाराओं का पानी रोककर उसका स्टॉक बढ़ाने के असरदार उपाय भी किए जाएं।
उन्होंने कहा कि जिले में जहां भी बांध बनाना मुमकिन हो, उन जगहों का मुआयना करके बांधों के निर्माण की योजना बने। जहां हो सके, वहां बारिश का बहता पानी रोकने को प्राथमिकता दी जाए। इससे भूजल स्तर बढ़ने में मदद मिलेगी और आगे की पानी की किल्लत से निपटने में भी सहारा मिलेगा। पानी सप्लाई करने वाली पाइपलाइनों में जहां लीकेज हो, उसे ढूंढकर फौरन ठीक किया जाए। सप्लाई सिस्टम में पानी का नुकसान घटे, ताकि ज्यादा से ज्यादा पानी लोगों के काम आ सके।
जोरगेवार ने बताया कि इरई डैम से बिजली बनती है और लोगों को पीने का पानी भी मिलता है, ये दोनों जरूरतें अहम हैं। इसलिए बिजली बनाने के काम में रुकावट डाले बिना पीने के पानी की जरूरत का संतुलन रखने वाली योजना बने। इसके लिए संबंधित विभाग आपस में तालमेल बिठाकर फैसले लें। पानी बांटते समय आखिरी छोर की बस्तियों तक नियमित और पूरा पानी पहुंचे, इसका ख्याल रखा जाए।
सूखे में पानी का सवाल और गंभीर हो सकता है, इसलिए प्रशासन को अभी से जरूरी एहतियात बरतनी चाहिए, यह भी जोरगेवार ने कहा। फौरी इंतजाम के साथ-साथ ऐसे लंबे काम भी तेज किए जाएं, जिनसे आगे पानी की उपलब्धता बढ़े। पानी रोकना, पानी का संरक्षण, जलस्रोतों को फिर जिंदा करना और सप्लाई सिस्टम की खामियां दूर करना, इन सबको साथ लेकर एक एक्शन प्लान बने। उन्होंने कहा कि पानी के सही मैनेजमेंट और सभी विभागों के तालमेल से जिले के लोगों को पानी की किल्लत न झेलनी पड़े, इसके लिए प्रशासन सोच-समझकर कदम उठाए।
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