स्टारलिंक पर पाबंदी अब भी बरकरार, ट्रम्प के भरोसे के बाद भी यूक्रेन की फिक्र नहीं गई
यूक्रेन के राष्ट्राध्यक्ष झेलेंस्की ने कहा कि स्टारलिंक सेवा में ज़मीन पर कोई खास सुधार नहीं हुआ है, जबकि ट्रम्प ने सेवा बहाल होने की बात कही थी।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
रूस और यूक्रेन की जंग अब सिर्फ मिसाइल, टैंक और फौजियों तक सीमित नहीं रही। आज की लड़ाई में इंटरनेट और सैटेलाइट टेक्नोलॉजी का रोल फैसला करने वाला बन गया है। इसी बीच यूक्रेन की फौजी कार्रवाइयों के लिए अहम स्टारलिंक नेटवर्क पर लगी पाबंदियों का मुद्दा फिर से गरमा गया है।
अमेरिका के राष्ट्राध्यक्ष डोनाल्ड ट्रम्प ने इलॉन मस्क से बातचीत के बाद कहा था कि सेवा बहाल हो गई है। लेकिन यूक्रेन के राष्ट्राध्यक्ष वोलोदिमिर झेलेंस्की ने शुक्रवार को 'एबीसी न्यूज' को बताया कि असल हालात में अभी तक कोई सुधार नहीं हुआ है। इसलिए अमेरिका के भरोसे के बावजूद यूक्रेन की फौजी व्यवस्था की चिंता बनी हुई है।
यूक्रेन की फौज रूसी ठिकानों पर हमले करने और दुश्मन के ड्रोन से निपटने के लिए बिना पायलट वाले ड्रोन का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करती है। इन ड्रोन को कंट्रोल करने और उनसे संपर्क बनाए रखने के लिए स्टारलिंक और फौजी इस्तेमाल वाली स्टारशील्ड टेक्नोलॉजी बहुत ज़रूरी है।
यूक्रेन ने बताया है कि 14 अक्टूबर से लागू पाबंदियों की वजह से करीब 161 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पार करते ही कुछ उपकरणों का इंटरनेट कनेक्शन कट जाता है। नतीजा यह है कि तेज़ ड्रोन की मुहिमों में रुकावट आ रही है। खबर है कि कुछ फौजी टुकड़ियों को कम रफ्तार पर भी कनेक्टिविटी की दिक्कत हो रही है।
ट्रम्प ने गुरुवार को कहा था कि इलॉन मस्क ने सेवा बहाल कर दी है। मगर झेलेंस्की ने साफ किया कि यूक्रेन की फौजी व्यवस्था को अब तक उम्मीद के मुताबिक सुधार नज़र नहीं आ रहा। कुछ जगहों पर थोड़ा सुधार दिख रहा है, पर पूरे यूक्रेन में सेवा पहले जैसी नहीं हुई है। इससे ट्रम्प के दावे पर सवाल खड़े हो गए हैं। यह भी सामने आया है कि यूक्रेन को इन पाबंदियों पर अमेरिका से साफ जवाब भी नहीं मिला है।
इस मामले में इलॉन मस्क और अमेरिकी प्रशासन अलग-अलग बातें कह रहे हैं। मस्क के मुताबिक स्टारशील्ड नेटवर्क अमेरिकी सरकार की मिल्कियत है और उसी के कंट्रोल में है। इसलिए इस पर इस्तेमाल की हदें तय करने का हक अमेरिकी फौज और राष्ट्राध्यक्ष के पास है। दूसरी तरफ, विदेश मंत्री मार्को रुबिओ ने कहा है कि ट्रम्प प्रशासन ने पाबंदियां लगाने का कोई आदेश नहीं दिया। इन उलटी बातों की वजह से यह उलझन बनी हुई है कि फैसला आखिर किसने लिया।
यूक्रेन के लिए यह सवाल सिर्फ इंटरनेट सेवा का नहीं है। यह जंग के मैदान में संपर्क, ड्रोन के कंट्रोल और हवाई सुरक्षा व्यवस्था के काम से सीधे जुड़ा है। रूस की तरफ से लगातार ड्रोन हमले हो रहे हैं, ऐसे में सैटेलाइट संपर्क में रुकावट यूक्रेन की सुरक्षा के लिए गंभीर साबित हो सकती है। इसलिए पूरी दुनिया की नज़र इस पर है कि अमेरिका पाबंदियां पूरी तरह हटाता है या नहीं और सेवा पहले की तरह चालू होती है या नहीं।
कमेंट
अभी कोई कमेंट नहीं। पहले आप लिखिए।