पीपल्स एजुकेशन सोसाइटी विदर्भ में फैलेगी, नागपुर बनेगा केंद्र, सरकार से 15 एकड़ जमीन की मांग
डॉ. बाबासाहब आंबेडकर की बनाई संस्था नागपुर को विदर्भ का मुख्य केंद्र बनाकर नए कोर्स शुरू करना चाहती है।
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भारतरत्न डॉ. बाबासाहब आंबेडकर की बनाई पीपल्स एजुकेशन सोसाइटी (PES) अब विदर्भ में अपना काम बढ़ाने जा रही है। इस विस्तार का मुख्य केंद्र नागपुर रहेगा। संस्था ने इसके लिए राज्य सरकार से शहर के परिसर में 15 एकड़ जमीन मांगी है।
इतना ही नहीं, आगे चलकर शैक्षणिक परिसर बनाने के लिए 150 से 200 एकड़ जमीन की मांग भी की गई है। संस्था की बढ़त के लिए राज्य सरकार से हर साल 500 करोड़ रुपये के अनुदान की उम्मीद भी जताई गई है।
यह सारी जानकारी संस्था के अध्यक्ष और केंद्रीय सामाजिक न्याय राज्य मंत्री रामदास आठवले ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी। आठवले ने कहा कि बाबासाहब के शिक्षा के काम की विरासत को विदर्भ में बड़े पैमाने पर आगे ले जाने की पहल संस्था के गवर्निंग बोर्ड ने की है। संस्था की कोशिश रहेगी कि वंचित, दलित और समाज के हर तबके के होनहार विद्यार्थियों को अच्छी शिक्षा के मौके मिलें।
आठवले ने बताया कि बाबासाहब ने 1944 में मुंबई में पीपल्स एजुकेशन सोसाइटी की स्थापना की थी। वंचित और उपेक्षित वर्गों को अच्छी शिक्षा के जरिए आगे बढ़ने लायक बनाना संस्था का मुख्य मकसद है। पिछले 8 दशकों में संस्था मुंबई, नवी मुंबई, छत्रपति संभाजीनगर, पुणे, कोल्हापुर और बेंगलुरु तक फैल चुकी है।
अलग-अलग शाखाओं की कुल 43 शैक्षणिक संस्थाओं में आज 1 लाख से ज्यादा विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में संस्था के उपाध्यक्ष और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के पूर्व अध्यक्ष डॉ. सुखदेव थोरात मौजूद थे। उनके साथ अन्ना बनसोडे, डॉ. वासुदेव गोडे, विश्वास पाटिल, बाबूराव बवे, अरविंद सोनटके, चंद्रशेखर कांबले और विदर्भ प्रमुख डॉ. सुनील खापढ़ें भी थे।
डॉ. थोरात ने बताया कि विदर्भ में शिक्षा के विकास के लिए केंद्र सरकार, राज्य सरकार और सीएसआर के जरिए पैसा जुटाया जाएगा। संस्था का इरादा है कि स्कूल से लेकर इंजीनियरिंग, मेडिकल और पैरामेडिकल की पढ़ाई तक कई तरह के मौके लोगों को मिलें।
थोरात के मुताबिक डिजिटल तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसे नए जमाने के क्षेत्रों के कोर्स को भी पहले नंबर पर रखा जाएगा। इसकी योजना विदर्भ समिति और इन विषयों के जानकारों की मदद से बनाई जाएगी।
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