मीरा भाईंदर में पानी की किल्लत बढ़ी, एमआईडीसी 10 की जगह 15 फीसदी से ज्यादा कटौती कर रही
राज्य सरकार ने 10 फीसदी पानी कटौती लागू की है, लेकिन एमआईडीसी के आंकड़ों के हिसाब से मीरा भाईंदर को असल में 15 फीसदी से ज्यादा कम पानी मिल रहा है।
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मीरा भाईंदर शहर में पानी की कटौती के चलते लोग भारी किल्लत झेल रहे हैं और पानी का मसला गरमाने लगा है। कटौती सरकार की तरफ से 10 फीसदी तय की गई है, मगर महाराष्ट्र औद्योगिक विकास महामंडल यानी एमआईडीसी असल में 15 फीसदी से भी ज्यादा पानी काट रही है। इसका खामियाजा शहर के लोगों को बेवजह भुगतना पड़ रहा है।
शहर को स्टेम प्राधिकरण से रोज 86 मिलियन लीटर और एमआईडीसी से 125 मिलियन लीटर पानी मंजूर है। एमआईडीसी को यह 125 मिलियन लीटर पानी 2031 तक देना है। नगर निगम का दावा है कि अभी एमआईडीसी से करीब 118 मिलियन लीटर और स्टेम से 83 से 84 मिलियन लीटर पानी रोज आता है। यानी नगर निगम को औसतन रोज 202 मिलियन लीटर पानी मिलता है। मंजूर कोटे से कम पानी आने की वजह लीकेज और प्रोसेसिंग वगैरह बताई जाती है।
शहर की आबादी बढ़ रही है और अधिकृत और अनधिकृत, दोनों तरह के निर्माण बड़े पैमाने पर चल रहे हैं, इसलिए पानी की मांग पहले से ज्यादा है। इतने सालों में नया पानी जुड़ा नहीं है। नेता और नगर निगम सूर्या पानी योजना के भरोसे लोगों को आश्वासन देते आ रहे हैं। ऊपर से मीरा भाईंदर पानी देने वाले बांधों से आखिरी छोर पर है, इसलिए यहां पानी कम और कम दबाव से पहुंचता है। एक दिन भी शट डाउन हो जाए तो सप्लाई सामान्य होने में 3 से 4 दिन लग जाते हैं।
इस साल मानसून के बाद बारिश कम हुई है, अलनीनो का असर है और अक्टूबर से ही बारिश गायब है। लौटती बारिश भी ज्यादा नहीं हुई। सरकारी स्तर पर अगले साल भी कम बारिश की आशंका जताई गई है। इसलिए बारवी बांध के उपलब्ध पानी का 31 अगस्त 2027 तक सही नियोजन हो सके और आगे किल्लत की नौबत न आए, इसके लिए राज्य सरकार ने 10 फीसदी पानी कटौती लागू की है।
इसके तहत स्टेम की तरफ से हर बुधवार सुबह 9 बजे से गुरुवार तड़के 3 बजे तक, यानी 18 घंटे, सप्लाई बंद रहती है। एमआईडीसी की तरफ से हर गुरुवार रात 12 बजे से शनिवार दोपहर 12 बजे तक, यानी कुल 36 घंटे, शहर की सप्लाई बंद की जाती है।
नतीजा यह रहा कि एमआईडीसी से रोज आने वाले करीब 118 मिलियन लीटर पानी की जगह पिछले शुक्रवार को सिर्फ 12 मिलियन लीटर और शनिवार को सिर्फ 27 मिलियन लीटर पानी आया। स्टेम से भी बुधवार को 83 से 84 मिलियन लीटर की जगह महज 35 मिलियन लीटर पानी आया।
19 से 25 अक्टूबर के हफ्ते का हिसाब देखें तो एमआईडीसी से कुल 631 मिलियन लीटर पानी आया। रोज 118 मिलियन लीटर मानें तो हफ्ते का पानी 826 मिलियन लीटर बनता है। इसमें से 10 फीसदी, यानी 83 मिलियन लीटर, घटाएं तो शहर को 743 मिलियन लीटर मिलना चाहिए था। लेकिन एमआईडीसी ने 112 मिलियन लीटर कम दिया, इसलिए सिर्फ 631 मिलियन लीटर ही मिला। यानी असल में 10 नहीं, 15 फीसदी से ज्यादा कटौती हो रही है।
वक्त के मामले में भी यही हाल है। हफ्ते के घंटों के हिसाब से 10 फीसदी कटौती में करीब 18 घंटे सप्लाई बंद रहनी चाहिए, मगर एमआईडीसी लगातार 36 घंटे पानी बंद रख रही है। पानी और वक्त, दोनों में 10 फीसदी से ज्यादा कटौती होने से मीरा भाईंदर के लोगों पर किल्लत की मार बेवजह भारी पड़ रही है। शहर के कई इलाकों में सप्लाई 70 से 75 घंटे तक खिंच गई है, जिससे कई जगह लोग परेशान हैं। दूसरी तरफ प्राइवेट टैंकर लॉबी ने भी पानी के रेट हजार से 2 हजार रुपये तक बढ़ा दिए हैं।
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