भारतीय नौदल के जहाज को पाकिस्तानी जहाज की टक्कर, 1991 समझौते के कलम 10 का उल्लंघन
अरब सागर में पाकिस्तानी नौदल के जहाज ने भारतीय युद्धपोत को टक्कर मारी, भारत ने पाकिस्तानी उच्चायुक्तालय के प्रभारी दूत को तलब कर कड़ा विरोध जताया।
पिछले कुछ महीनों से पाकिस्तान की तरफ से लगातार गलत हरकतें सामने आ रही हैं। जमीन और आसमान के बाद अब समुद्र में भी पाकिस्तान की कारस्तानी भारत के सब्र का इम्तिहान ले रही है। मंगलवार शाम अरब सागर में एक भारतीय युद्धपोत का सामना अचानक पाकिस्तानी नौदल के एक जहाज से हुआ। पाकिस्तान ने जानबूझकर खतरनाक तरीके से और तेज रफ्तार में जहाज को मोड़ने की कोशिश की, जिसकी वजह से दोनों जहाजों में मामूली टक्कर हो गई। यह पूरी घटना अंतरराष्ट्रीय सागरी सीमा में घटी। किसी बड़े जान-माल के नुकसान की कोई रिपोर्ट नहीं है।
भारत ने इस घटना पर सख्त एतराज जताया है। पाकिस्तानी नौदल के इस लापरवाह और गैर-पेशेवर रवैये के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराने के लिए दिल्ली में पाकिस्तान उच्चायुक्तालय के प्रभारी दूत को तलब किया गया। भारत ने पाकिस्तान से कहा है कि जब भी उनके सैन्य जहाज समुद्र में हों, वे जरूरी एहतियात बरतें। साथ ही आगे ऐसी घटनाएं टालने के लिए दोनों देशों के बीच जो समझौते हैं, उनका पालन करना जरूरी है।
नई दिल्ली स्थित विदेश मंत्रालय ने संबंधित पाकिस्तानी उच्चायुक्तालय को इस बारे में जानकारी दी है। भारत का कोई नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन पाकिस्तान ने 35 साल पुराने एक समझौते का उल्लंघन जरूर किया है।
भारत और पाकिस्तान के बीच अप्रैल 1991 में एक समझौता हुआ था। हाल की इस घटना से इसी समझौते के कलम 10 का सीधा उल्लंघन हुआ है। यह 1991 का समझौता सैन्य कवायद, युद्धाभ्यास और सैन्य हलचल की पहले से जानकारी देने से जुड़ा है। इससे पहले भी दोनों देश समुद्री घटनाओं के मामले में इसी समझौते के कलम 10 का हवाला दे चुके हैं।
यह समझौता 6 अप्रैल 1991 को नई दिल्ली में साइन हुआ था। इसका मकसद सागरी और सैन्य कार्रवाइयों के दौरान गलतफहमी, टक्कर या किसी हादसे का खतरा कम करना है। कलम 10 के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय सागरी सीमा में जहाजों या पनडुब्बियों के बीच कम से कम 3 सागरी मील की दूरी बनाए रखना जरूरी है।
यह समझौता भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य तनाव कम करने, गलतफहमियां दूर करने और सीमा पर किसी हादसे से टकराव टालने के लिए भरोसा बढ़ाने वाले उपायों के तहत किया गया था। इस समझौते के मुताबिक दोनों देशों को अपनी सीमा के पास किसी भी बड़ी सैन्य कवायद, सैन्य हलचल या युद्धाभ्यास से पहले एक-दूसरे को पहले से सूचना देनी होगी। इससे यह तय होता है कि बॉर्डर पर तैनात दस्ते सतर्क रहें और इसे खतरा न समझें।