शादी के झूठे वादे पर यौन शोषण का आरोप: प्रज्वल मटे की अग्रिम जमानत हाईकोर्ट से खारिज
बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने सीताबर्डी पुलिस स्टेशन में दर्ज मामले में आरोपी प्रज्वल राजकुमार मटे की अग्रिम जमानत अर्जी ठुकरा दी।
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नागपुर: बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने प्रज्वल राजकुमार मटे की अग्रिम जमानत की अर्जी खारिज कर दी है। मटे पर आरोप है कि उसने शादी का झूठा वादा करके एक महिला का यौन शोषण किया।
यह आदेश जस्टिस एम. एम. नेरलीकर ने 14 अक्टूबर 2026 को क्रिमिनल एप्लिकेशन नंबर 806/2026 में दिया। मामला सीताबर्डी पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 64(2)(m) और 69 के तहत दर्ज हुआ था।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक आरोपी और महिला की जान-पहचान इंस्टाग्राम के जरिए हुई थी। महिला का आरोप है कि आरोपी ने शादी का वादा करके उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए और ऐसा कथित तौर पर करीब 20 से 25 बार हुआ।
शिकायत में आगे कहा गया है कि बाद में आरोपी शादी की बात से बचने लगा। इसके बाद महिला ने जहरीला पदार्थ खा लिया। इलाज के बाद उसकी जान बच गई और फिर उसने कथित घटनाओं के बारे में अपने परिवार को बताया।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि दोनों के बीच रिश्ता आपसी सहमति का था और आरोपी महिला से शादी करना चाहता था। अभियोजन पक्ष और महिला के वकीलों ने अग्रिम जमानत की अर्जी का विरोध किया।
कोर्ट ने उपलब्ध चैट रिकॉर्ड, एफआईआर (FIR) और रिकॉर्ड पर मौजूद दूसरी सामग्री देखने के बाद कहा कि चैट से यह नहीं लगता कि आरोपी का महिला से शादी करने का इरादा था।
कोर्ट ने यह भी कहा कि इस स्तर पर आरोपों से बीएनएस की धारा 69 के जरूरी तत्व पूरे होते दिखते हैं। अग्रिम जमानत देने का कोई आधार न पाते हुए कोर्ट ने अर्जी खारिज कर दी।
महिला की ओर से एडवोकेट सुमित सुनील बोकाडे और दीपक खांडैत पेश हुए। आरोपी की तरफ से वरिष्ठ एडवोकेट अक्षय नाइक और के. एस. मोटवानी ने पैरवी की, जबकि राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक एस. एन. ठाकुर मौजूद थे।
अग्रिम जमानत खारिज होने का मतलब यह नहीं है कि आरोपी का दोष तय हो गया। आरोप अभी आरोप ही हैं और कानून के मुताबिक आगे की आपराधिक कार्यवाही और फैसले के अधीन रहेंगे।