वर्धा के सावंगी (मेघे) में सड़क का काम अटका, हाईकोर्ट ने चार हफ्ते में जांच करने को कहा
नागपुर खंडपीठ ने जिला परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष विलास कांबले की याचिका पर अधिकारियों को नियमों के मुताबिक जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए।
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सावंगी (मेघे) ग्राम पंचायत में विकास कामों में कथित देरी और उससे जुड़ी शिकायतों का मामला अब बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ में पहुंचा है। जिला परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष विलास कांबले ने इस बारे में याचिका दाखिल की थी। उस पर सुनवाई हुई और अदालत ने संबंधित अधिकारियों को चार हफ्ते के अंदर जांच करने और नियमों के मुताबिक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
अदालत ने 20 अगस्त को पेश किए गए निवेदन में उठाए गए मुद्दों पर यह निर्देश दिया है। कांबले ने अपनी याचिका में जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पराग सोमन, सावंगी (मेघे) ग्राम पंचायत के ग्राम विकास अधिकारी राहुल जुमडे और ठेकेदार अरविंद निकोसे का नाम लिया है। निवेदन में जितने भी मुद्दे बताए गए हैं, उन सबको देखते हुए नियमों के हिसाब से जांच और जरूरी कार्रवाई करने को कहा गया है।
मामला सावंगी (मेघे) ग्राम पंचायत के तहत सारिका अपार्टमेंट से पालोती मार्ग की तरफ जाने वाली सड़क के निर्माण का है।
सड़क के लिए 7 लाख 66 हजार रुपये का प्रावधान
कांबले के मुताबिक 17 सितंबर 2024 को हुई ग्राम पंचायत की सभा में 15वें वित्त आयोग के फंड से इस सड़क के निर्माण के लिए 7 लाख 66 हजार रुपये का प्रावधान मंजूर किया गया था। इसके बाद तकनीकी और प्रशासकीय मंजूरी दी गई और 20 जून 2025 को वर्क ऑर्डर जारी हुआ। टेंडर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह काम वर्धा की अरविंद कंस्ट्रक्शन को सौंपा गया।
कांबले का कहना है कि करार की शर्तों के हिसाब से काम तीन महीने में पूरा होना चाहिए था। उनका आरोप है कि काम शुरू कराने के लिए ग्राम पंचायत और संबंधित अधिकारियों को बार-बार पत्र और निवेदन दिए गए, फिर भी कोई खास प्रगति नहीं हुई। इसके अलावा उन्होंने मांग की है कि ग्राम पंचायत के अलग-अलग कामों की टेंडर प्रक्रिया की भी जांच हो। साथ ही पहले के ऑडिट में जो आपत्तियां उठाई गई थीं, उनकी भी जांच की जाए।
नहीं हुई कार्रवाई तो फिर कोर्ट जाएंगे
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद कांबले ने उम्मीद जताई है कि सभी संबंधित बातों की निष्पक्ष जांच होगी और जो दोषी पाए जाएंगे, उन पर नियमों के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि तय समय के अंदर कार्रवाई नहीं हुई तो वे दोबारा अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे। याचिकाकर्ता की तरफ से एडवोकेट सौरभ भेंडे और एडवोकेट तेजल आगरे ने पैरवी की।