टीईटी घोटाला: हाईकोर्ट ने रद्द निकाल सही माने, उम्र भर की पाबंदी हटाई, दोबारा परीक्षा दे सकेंगे
हाईकोर्ट ने 2018 और 2019 की TET के रद्द निकाल सही ठहराए, पर हमेशा की पाबंदी हटाकर उम्मीदवारों को दोबारा परीक्षा देने का रास्ता खोल दिया।
शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी TET में हुए घोटाले पर हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है। 2018 और 2019 की TET में उत्तरपत्रिका बदलकर मार्क बढ़ाने का आरोप लगा था। इसी मामले में कोर्ट ने एक अहम फैसला दिया है।
न्यायमूर्ति किशोर संत और न्यायमूर्ति जितेंद्र जैन ने यह फैसला सुनाया। सरकार और महाराष्ट्र राज्य परीक्षा परिषद ने जिन उम्मीदवारों के निकाल रद्द किए थे, कोर्ट ने उस कार्रवाई को सही ठहराया है। लेकिन उन पर जो हमेशा के लिए पाबंदी लगाई गई थी कि वे जिंदगी में दोबारा परीक्षा नहीं दे सकते, उस पाबंदी को कोर्ट ने हटा दिया है।
कोर्ट ने कहा कि किसी पर हमेशा के लिए पाबंदी लगानी हो तो पहले उसे बोलने का मौका देना पड़ता है और उसकी बात सुननी पड़ती है। यहां ऐसा कुछ नहीं किया गया और सीधे पाबंदी लगा दी गई। यह नैसर्गिक न्याय के खिलाफ है, इसलिए कोर्ट ने पाबंदी रद्द कर दी। इसका मतलब यह है कि उन उम्मीदवारों का पुराना निकाल रद्द ही रहेगा, मगर वे आगे फिर से TET दे सकते हैं। उनके लिए दूसरा चांस खुल गया है।
कोर्ट ने यह भी साफ किया कि पाबंदी हटने का मतलब यह नहीं कि उम्मीदवार निर्दोष मान लिए गए। उन पर लगा आरोप अब भी कायम है। सरकार और परीक्षा परिषद उनकी जांच कर सकती है, और जांच में दोषी पाए गए तो फिर से कार्रवाई हो सकती है। जिन लोगों ने कोर्ट से सच छिपाया, यानी जिनका नाम पुलिस के बयान में था लेकिन उन्होंने याचिका में यह बात छिपा ली, उन्हें इस फैसले का फायदा नहीं मिलेगा। उन पर 3 अगस्त 2022 को जो कार्रवाई हुई थी, वह वैसी ही रहेगी और कोर्ट ने उनकी याचिकाएं खारिज कर दी हैं।
इस फैसले में सबसे अहम मुद्दा पहले से नौकरी कर रहे शिक्षकों का था। TET जरूरी होने के बाद कई पुराने शिक्षक मुश्किल में आ गए थे। इसके लिए कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के अंजुमन इशआत-ए-तालीम ट्रस्ट केस का सहारा लिया, जिसका फैसला 29 मई 2026 को आया था।
कोर्ट ने कहा कि नौकरी में मौजूद शिक्षकों को TET पास करने के लिए 31 अगस्त 2028 तक का वक्त दिया गया है। तब तक उन्हें TET पास करनी होगी। इस वक्त में पास नहीं हुए तो उनकी नौकरी पर खतरा आ सकता है।
फिलहाल उनकी तनख्वाह और शालार्थ ID बंद करने के आदेश जैसे हैं वैसे ही रहेंगे। सरकार से कहा गया है कि पूरे मामले की जांच 31 दिसंबर 2027 तक पूरी करे।
जिन शिक्षकों ने पहले ही CTET या TAIT या कोई दूसरी सरकार से मान्य परीक्षा पास कर ली है, उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है। सिर्फ TET का निकाल रद्द होने की वजह से उन्हें नौकरी से नहीं निकाला जा सकेगा। लेकिन अगर उन पर TET घोटाले को लेकर फौजदारी केस या दंडात्मक कार्रवाई चल रही है, तो यह फैसला उन्हें नहीं बचाएगा।
इस केस में याचिकाकर्ताओं की तरफ से वकील व्ही. डी. सपकाळ, एस. आर. सपकाळ, ए. आर. सय्यद और व्ही. एस. पानपट्टे ने पैरवी की। सरकार की तरफ से व्ही. डी. होन और पी. एस. पाटील ने दलील दी, जबकि परीक्षा परिषद की तरफ से ए. आर. निकम ने बात रखी। कुल मिलाकर कोर्ट ने सरकार की निकाल रद्द करने की कार्रवाई को सही माना, मगर हमेशा की पाबंदी को गलत ठहराकर उम्मीदवारों और शिक्षकों को एक बार फिर मौका दिया है।