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04:43 IST

शादी का वादा कर संबंध बनाने के आरोप में प्रज्वल मते की अग्रिम जमानत अर्जी हाई कोर्ट से खारिज

शादी का वादा कर संबंध बनाने के आरोप में प्रज्वल मते की अग्रिम जमानत अर्जी हाई कोर्ट से खारिज तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

मुंबई हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने आरोपी प्रज्वल राजकुमार मते की अग्रिम जमानत की अर्जी खारिज कर दी है। उन पर आरोप है कि उन्होंने शादी का वादा करके एक महिला से शारीरिक संबंध बनाए। जस्टिस एम. एम. नेर्लीकर ने 14 अक्टूबर 2026 को क्रिमिनल एप्लीकेशन नंबर 806/2026 में यह आदेश दिया।

यह मामला नागपुर के सीताबर्डी पुलिस स्टेशन में अपराध क्रमांक 534/2026 के तहत दर्ज है। भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 64(2)(m) और 69 के तहत केस बनाया गया है। सुनवाई के दौरान पीड़िता की ओर से एड. सुमित सुनील बोकाडे और एड. दीपक खंडाईत मौजूद थे। आरोपी की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता एड. अक्षय नाईक और एड. के. एस. मोटवानी ने पैरवी की। राज्य सरकार की ओर से सरकारी अभियोक्ता एड. एस. एन. ठाकुर हाजिर थीं।

कोर्ट के आदेश के मुताबिक आरोपी और पीड़िता की पहचान इंस्टाग्राम के जरिए हुई थी। पीड़िता का कहना है कि आरोपी ने शादी का वादा किया और उसी वादे के भरोसे उसने संबंध बनाए। आदेश में दर्ज है कि ऐसे संबंध करीब 20 से 25 बार बनने का आरोप है। बाद में जब आरोपी शादी की बात पर टालमटोल करने लगा, तो पीड़िता ने जहरीला पदार्थ खा लिया। इलाज के बाद वह बच गई और उसने घरवालों को पूरी बात बताई।

अग्रिम जमानत की अर्जी पर सुनवाई के दौरान आरोपी की ओर से दलील दी गई कि दोनों के बीच संबंध आपसी रजामंदी से बने थे और उसका शादी करने का इरादा था। वहीं सरकारी पक्ष और पीड़िता की तरफ से अर्जी का विरोध किया गया। कोर्ट ने मौजूद चैट, एफआईआर और दूसरे रिकॉर्ड को देखा।

कोर्ट ने अपने निरीक्षण में कहा कि उपलब्ध चैट से यह नहीं दिखता कि आरोपी का पीड़िता से शादी करने का इरादा था। कोर्ट के मुताबिक शादी का झूठा वादा करके धोखा देने के आरोपों में भारतीय न्याय संहिता की धारा 69 के जरूरी तत्व पूरे होते दिखते हैं। इसी वजह से कोर्ट ने कहा कि यह अग्रिम जमानत देने लायक मामला नहीं है और अर्जी खारिज कर दी।

हाई कोर्ट का यह आदेश दिखाता है कि शादी का वादा करके धोखा देने के आरोपों में उपलब्ध सबूत और हालात कितने मायने रखते हैं। अग्रिम जमानत की अर्जी भले खारिज हो गई हो, लेकिन मामले में आखिरी फैसला आगे की कानूनी कार्यवाही में ही होगा।

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