सुप्रीम कोर्ट का निर्देश: निर्मल उज्ज्वल के सचिव हाई कोर्ट में बिना शर्त माफी मांगें
सुप्रीम कोर्ट ने निर्मल उज्ज्वल क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटी के संस्थापक और सचिव प्रमोद नत्थूजी मानमोडे से कहा है कि वे आपराधिक अवमानना के एक मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच के सामने बिना शर्त माफी मांगें।
यह आदेश भारत के चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अगुवाई वाली तीन जजों की बेंच ने दिया। बेंच में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना भी थे। बेंच ने हाई कोर्ट से गुजारिश की कि वह स्वतः संज्ञान से शुरू की गई आपराधिक अवमानना की कार्रवाई को बंद करने पर विचार करे। साथ ही मानमोडे पर लगाया गया 5 लाख रुपये का खर्च माफ करने और उन पर संदेह जताने वाली टिप्पणियां हटाने पर भी विचार करने को कहा गया।
सुप्रीम कोर्ट यह आदेश मानमोडे की विशेष अनुमति याचिका की सुनवाई के दौरान दे रहा था। याचिका में हाई कोर्ट के 1 सितंबर के आदेश को चुनौती दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने उनसे हाई कोर्ट में माफी देने को कहा और डिवीजन बेंच से अनुरोध किया कि वह राहत की इन बातों पर उदारता और हमदर्दी के साथ गौर करे।
कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि तब तक अवमानना की कार्रवाई रुकी रहेगी। मामले को आगे की सुनवाई के लिए 3 नवंबर 2026 को सूचीबद्ध किया गया है।
अब मामले की पृष्ठभूमि देखें। अवमानना का यह मामला हाई कोर्ट के 29 अप्रैल 2025 के फैसले का कथित तौर पर पालन न करने से उठा। उस फैसले में सोसाइटी को 24 मीटर चौड़ी डेवलपमेंट प्लान रोड पर बने सबस्टेशन, ट्रांसफॉर्मर, वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट और दूसरे ढांचे हटाने का निर्देश दिया गया था। सोसाइटी के सड़क पर कब्जे का हवाला देते हुए हाई कोर्ट ने 5 लाख रुपये का खर्च भी लगाया था।
अवमानना की सुनवाई के दौरान मानमोडे ने जस्टिस अनिल एल. पानसरे को सुनवाई से अलग करने की मांग की। उनका आरोप था कि सोसाइटी से जुड़े पुराने संबंधों और विवादों की वजह से पूर्वाग्रह है। हाई कोर्ट ने यह अर्जी खारिज कर दी और कहा कि वे अपने आरोपों के समर्थन में कोई सामग्री पेश नहीं कर सके।
इसके बाद हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान से आपराधिक अवमानना की कार्रवाई शुरू की। हाई कोर्ट का कहना था कि जज के खिलाफ लगाए गए आरोप बेबुनियाद थे और न्याय के प्रशासन में दखल दे सकते थे। फिर मानमोडे ने हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।