बुधवार, 4 नवंबर 2026

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सातारा में मुंबई-बेंगलुरू हाईवे 30 घंटे से जाम, हजारों मुसाफिर सड़क पर फंसे

सातारा में मुंबई-बेंगलुरू हाईवे 30 घंटे से जाम, हजारों मुसाफिर सड़क पर फंसे तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
शहर PT24 टीम

गन्ने के दाम की मांग को लेकर स्वाभिमानी शेतकरी संघटना के आंदोलन से मुंबई-बेंगलुरू राष्ट्रीय महामार्ग पर लगातार 30 घंटे से ट्रैफिक ठप है और आम मुसाफिर परेशान हैं।

गन्ने के दाम की मांग को लेकर चल रहे किसान आंदोलन की मार अब आम मुसाफिरों पर पड़ रही है। स्वाभिमानी शेतकरी संघटना के आंदोलन की वजह से मुंबई-बेंगलुरू राष्ट्रीय महामार्ग पर ट्रैफिक लगातार 30 घंटे से बंद पड़ा है।

आंदोलन की मांग है कि गन्ने को प्रति टन 4 हजार 500 रुपये की पहली उचल मिले। इसी मांग के चलते हाईवे पर एक हजार से ज्यादा गाड़ियां फंसी हुई हैं। इनमें भारी वाहन, प्राइवेट कारें और मुसाफिर गाड़ियां, सब शामिल हैं। बहुत से लोगों के लिए अपनी मंजिल तक पहुंचना नामुमकिन हो गया है। सबसे बुरा हाल लंबी दूरी के ट्रक ड्राइवरों का है।

हजारों मुसाफिर और ड्राइवर सड़क पर ही अटके हैं, इसलिए उनका सफर का पूरा प्लान बिगड़ गया है। घंटों तक बिना खाने और पानी के रुकना पड़ रहा है, जिससे लोगों में गुस्सा बढ़ता जा रहा है। कुछ जगहों पर तो पुलिस से भी उनकी कहासुनी हुई।

ट्रैफिक ठप होने के बाद मुसाफिरों के सामने खाने और पीने के पानी की दिक्कत खड़ी हो गई। ड्राइवरों का कहना है कि प्रशासन की तरफ से न कोई दूसरा इंतजाम किया गया, न कोई मदद पहुंची, इसलिए परेशानी और बढ़ गई। ड्राइवरों ने आरोप लगाया कि इस हालात का फायदा उठाकर कुछ दुकानदारों ने पानी की बोतलों के दाम बढ़ा दिए। बीस रुपये की बोतल पचास रुपये में बिक रही है, जिससे मुसाफिरों में नाराजगी फैल गई है।

आंदोलन का मसला सुलझ नहीं रहा और मुसाफिरों की मदद के लिए भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा, इसलिए ड्राइवरों ने प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। हालात संभालने पहुंची पुलिस से गुस्साए ड्राइवरों की जमकर कहासुनी हुई। उनका कहना है कि उन्हें किसानों की मांगों से कोई ऐतराज नहीं है। सवाल यह है कि आंदोलन की वजह से फंसे लोगों को पानी, खाना और सुरक्षा देना क्या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है?

इस बीच हाईवे के जाम का असर कारोबारी माल ढुलाई पर भी पड़ा है। जरूरी सेवाओं की गाड़ियों को भी रास्ता निकालने में दिक्कत आ रही है। एक तरफ किसानों के आंदोलन का मसला है और दूसरी तरफ आम मुसाफिरों की बढ़ती परेशानी। अब सबकी नजर इस पर है कि ट्रैफिक चालू कराने के लिए प्रशासन कौन से कदम उठाता है।

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