चिमूर में चार लोगों की जान लेने वाला बाघ 'त्रिशूल' पकड़ा गया, किसानों ने ली राहत की सांस
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की स्पेशल टीम ने 3 नवंबर 2026 की रात गदगांव बीट के कक्ष क्रमांक 380 में करीब पांच साल के नर बाघ को डार्ट मारा। उसे ब्रह्मपुरी के टीटीसी सेंटर में रखा गया है।
चिमूर तालुका के किसानों को आखिरकार बड़ी राहत मिली है। फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की स्पेशल टीम ने मंगलवार 3 नवंबर 2026 की रात 'त्रिशूल' नाम के बाघ को पकड़ लिया। यह करीब पांच साल का नर बाघ है। फॉरेस्ट डिपार्टमेंट का कहना है कि यह बाघ चार लोगों की मौत से जुड़ा है।
बाघ को चिमूर रीजनल फॉरेस्ट रेंज के तहत आने वाले गदगांव बीट के उरकुडपार में, संरक्षित जंगल के कक्ष क्रमांक 380 में डार्ट मारा गया। फिलहाल उसे ब्रह्मपुरी के टीटीसी सेंटर में रखा गया है, जहां आगे के इलाज और खास निगरानी का इंतजाम है।
पिछले करीब डेढ़ साल से यह बाघ चिमूर तालुका में दहशत फैलाए हुए था। इस दौरान उसने चार लोगों की जान ली। 23 अप्रैल 2026 को वाहनगांव के शंकर मसराम और 6 जुलाई को नवेगांव पुनर्वास के राजेंद्र भोयर खडसंगी बफर क्षेत्र में उसका शिकार बने। इसके कुछ ही दिन पहले, 30 अक्टूबर को गरडापार के 50 साल के किसान सदाशिव चिरकुटा पर इसी कक्ष में घात लगाकर बैठे बाघ ने हमला किया और वे मौके पर ही मारे गए।
इस हमले के बाद चिमूर इलाके में गुस्सा और डर का माहौल था। खेतों में अभी कपास चुनाई का सीजन चल रहा है, इसलिए किसानों को जान हथेली पर रखकर काम करना पड़ रहा था। ऐसे में इस आदमखोर बाघ को जल्द से जल्द पकड़ने की मांग जोर पकड़ने लगी थी।
लोगों के बढ़ते गुस्से और सुरक्षा के सवाल को देखते हुए उप वन संरक्षक डॉ. कुमारस्वामी एस.आर. और सहायक वन संरक्षक डॉ. महेश गायकवाड़ के मार्गदर्शन में संयुक्त मुहिम बनाई गई। इसमें चिमूर के वन परिक्षेत्र अधिकारी किशोर देवरकर, ताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व की आरआरटी (RRT) टीम और स्थानीय पुलिस शामिल थी। मंगलवार 3 नवंबर की रात गदगांव इलाके के कक्ष क्रमांक 380 में बाघ की सही लोकेशन मिल गई।
ताडोबा के वन्यजीव चिकित्सा अधिकारी और रैपिड रेस्क्यू टीम के प्रमुख डॉ. रविकांत एस. खोब्रागडे और आरआरटी के शूटर अजय सी. मराठे ने हिम्मत के साथ कार्रवाई की। रात 11:40 बजे बाघ को डार्ट (ट्रैंक्विलाइजर) मारकर बेहोश किया गया। डार्ट लगने के कुछ ही मिनट बाद, रात 12:10 बजे उसे सुरक्षित स्ट्रेचर पर लिया गया। 12:25 बजे उसे रिवर्सल डोज दिया गया और 12:27 बजे बाघ ने पूरी तरह हरकत शुरू कर दी।
इस मुहिम में डॉ. रविकांत एस. खोब्रागडे, शूटर अजय सी. मराठे (RRT TATR) और ब्रह्मपुरी के जीवविज्ञानी राकेश आहुजा के साथ योगेश लकडे, दिपेश टेंभुर्णे, वसीम शेख, विकास ताजणे, प्रफुल वाटगुरे, अमोल कोरपे, अक्षय दांडेकर और गुरुनानक ढोरे ने भी, जो वन और रेस्क्यू टीम के कर्मचारी हैं, अहम भूमिका निभाई।
इस मिली-जुली और कामयाब कार्रवाई से चिमूर इलाके के लोगों ने बड़ी राहत जताई है।
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