कर्जत की राजनाला नहर की मरम्मत तेज, 40 गांवों की खेती के लिए पानी छोड़ने की तैयारी
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सिंचाई विभाग ने दिसंबर के पहले हफ्ते में नहर का पानी छोड़ने की कार्यवाही शुरू की है। इस साल कर्जत तालुका को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है।
कर्जत तालुका का पूर्वी हिस्सा हराभरा रखने वाली राजनाला नहर की मरम्मत का काम अब तेजी से चल रहा है। सभी नहरों और उप नहरों की साफ-सफाई जोरों पर है। सिंचाई विभाग ने इसी साल दिसंबर के पहले हफ्ते में नहर का पानी छोड़ने की कार्यवाही शुरू कर दी है।
राजनाला सिंचाई समूह टाटा के भिवपूरी जलविद्युत केंद्र के अपशिष्ट जल (वेस्ट वॉटर) पर चलता है। राजनाला डावा नहर से सिंचाई 1959 से हो रही है। राजनाला उजवा नहर और पालीपोटल नहर 1972-73 में पूरी हुईं और इनसे सिंचाई 1973-74 में शुरू हुई। राजनाला डावा नहर का पानी 21 गांव इस्तेमाल करते हैं। उजवा नहर से सात गांवों को पानी मिलता है, और पाली पोटल नहर को जोड़कर कुल 2542 हेक्टेयर जमीन सिंचाई के दायरे में आती है।
जलविद्युत केंद्र से मिलने वाले अपशिष्ट जल में से 42.330 द.ल.घ.मी. अपशिष्ट जल राजनाला सिंचाई समूह के लिए मंजूर है। यह पानी बांध के जरिए छोड़ा जाता है और आगे राजनाला डावा नहर, राजनाला उजवा नहर और पालीपोटल नहर में मोड़ा जाता है। कर्जत तालुका के 40 गांवों में दोहरी खेती के लिए यह पानी बहुत अहम है।
किसानों पर पिछले दो साल से मार पड़ रही है। 2025 में पूरे मई महीने बारिश होती रही, जिससे खेतों में खड़ी धान की फसल भीगकर खराब हो गई और किसान आर्थिक संकट में आ गए। इस साल मानसून में बारिश कम हुई, इसलिए धान की खेती पूरी तरह नहीं पनप पाई और नुकसान हुआ।
इसी वजह से सरकार ने इस साल कर्जत तालुका को सूखाग्रस्त घोषित किया है। गर्मियों की धान की खेती ठीक से हो सके, इसलिए सिंचाई विभाग ने राजनाला नहर इलाके में खेती के लिए जल्दी पानी छोड़ने की हलचल शुरू की है। इसके लिए मशीनों से नालों की सफाई शुरू हो गई है, और विभाग की तरफ से नहरों, उप नहरों और नालों की सफाई की जा रही है।
बाकी सारा अपशिष्ट जल उल्हास नदी में छोड़ा जाता है। यह पानी नल पानी योजनाओं की प्यास बुझाता है। ठाणे जिले की कल्याण, डोंबिवली, उल्हासनगर, ठाणे, मीरा-भाईंदर और भिवंडी-निजामपुर महानगरपालिकाएं, साथ ही अंबरनाथ और बदलापुर नगरपालिकाएं इसे पीने और उद्योगों के काम के लिए इस्तेमाल करती हैं। राजनाला सिंचाई समूह की प्रस्तावित सिंचाई क्षमता 2542 हेक्टेयर है, जबकि निर्मित सिंचाई क्षमता 2362 हेक्टेयर है।
बारिश के अनियमित रहने से खरीफ का सीजन हाथ से निकल गया है और किसान संकट में हैं। पूर्व विधायक सुरेश लाड ने कहा कि जिन जगहों पर गर्मियों में खेती होती है, वहां दिसंबर में नहरों में पानी छोड़ा जाए तो खेती समय पर हो सकेगी और किसानों को राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि राजनाला नहरों की मरम्मत के काम नवंबर महीने में पूरे करके दिसंबर के पहले हफ्ते में खेती के लिए पानी छोड़ा जाना चाहिए।
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