संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी: मौजूदा हाल रहा तो 2100 तक धरती 2.8 डिग्री सेल्सियस गर्म हो सकती है
संयुक्त राष्ट्र के पर्यावरण कार्यक्रम की नई रिपोर्ट के मुताबिक 1.5 डिग्री का लक्ष्य अब लगभग पहुंच से बाहर है।
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जलवायु परिवर्तन का खतरा दिन-ब-दिन गंभीर होता जा रहा है और संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक वैश्विक तापमान को 1.5 डिग्री सेल्सियस की सीमा में रखने का लक्ष्य अब लगभग नामुमकिन हो गया है। वजह यह बताई गई है कि दुनिया का कोई भी देश इस काम में पूरी तरह और ईमानदारी से नहीं जुटा है। सब एक-दूसरे के भरोसे बैठे हैं।
इसका नमूना नेपाल में आई भीषण तबाही में दिख चुका है। दुनिया के देश जलवायु परिवर्तन रोकने के लिए कई वादे तो कर रहे हैं, लेकिन ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन घटाने की कोशिशें हकीकत में कम पड़ रही हैं। संयुक्त राष्ट्र के पर्यावरण कार्यक्रम ने गंभीर चेतावनी दी है कि हालात ऐसे ही रहे तो 2100 तक धरती का तापमान 2.8 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है।
संयुक्त राष्ट्र के पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की Emissions Gap Report 2026 में यह कड़वी सच्चाई दुनिया के सामने रखी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक औद्योगिक क्रांति से पहले के तापमान के मुकाबले वैश्विक तापमान को 1.5 डिग्री की सीमा में रखने का मौका अब खत्म हो चुका है। सबसे अच्छे हालात में भी 2050 के आसपास तापमान में 1.7 से 1.8 डिग्री तक की बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सही कदम उठाए गए तो इस सदी के आखिर तक तापमान को फिर 1.5 डिग्री के नीचे लाने का मौका बना हुआ है।
अगर जलवायु परिवर्तन की रफ्तार धीमी करनी है तो दुनिया को ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में बड़ी कटौती करनी होगी। 2025 के मुकाबले 2030 तक उत्सर्जन 18 फीसदी, 2035 तक 45 फीसदी और 2040 तक 69 फीसदी घटाने की जरूरत है। मगर 2025 के मुकाबले 2030 तक सिर्फ 5 से 8 फीसदी कटौती का अनुमान है।
यानी देशों के वादों और असल कार्रवाई के बीच बहुत बड़ा फासला है। रिपोर्ट से साफ है कि अब दुनिया के सभी देशों को अगली पीढ़ी को बेहतर माहौल और बेहतर हालत वाली धरती सौंपने के लिए ईमानदार कोशिश करनी होगी।
तापमान बढ़ने का असर सिर्फ पर्यावरण तक सीमित नहीं रहेगा। इसका असर इंसानी जिंदगी, खेती, पानी की सप्लाई और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा। समुद्र का स्तर बढ़ना, ग्लेशियरों का पिघलना, भारी बारिश, जंगलों की आग और तेज गर्मी की लहरें जैसी मुसीबतें और तीखी हो सकती हैं।
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव अंटोनियो गुटेरेस ने भी देशों से उत्सर्जन घटाने के लिए फौरन ठोस कदम उठाने की अपील की है। आने वाली COP31 जलवायु परिषद में इन मुद्दों पर वैश्विक स्तर पर चर्चा होगी। अब सिर्फ वादों का नहीं, असल कार्रवाई का वक्त आ गया है।
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