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09:38 IST

रिकॉर्ड गर्मी की ओर बढ़ रहा 2026: सुपर अल नीनो और गर्म समंदर से चढ़ा पारा

वैज्ञानिक आंकड़ों के मुताबिक 2026 में धरती का औसत तापमान औद्योगिक युग से 1.49 से 1.5 डिग्री सेल्सियस ऊपर रह सकता है। जेम्स हैन्सन समेत मौसम विशेषज्ञों ने भारत और दक्षिण एशिया के लिए चेतावनी दी है।

रिकॉर्ड गर्मी की ओर बढ़ रहा 2026: सुपर अल नीनो और गर्म समंदर से चढ़ा पारा तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

दुनिया भर में जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग का खतरा हर दिन गंभीर होता जा रहा है। हाल में सामने आए वैज्ञानिक आंकड़ों और विश्लेषणों के मुताबिक 2026 इंसानी इतिहास का सबसे गर्म साल बनने की दहलीज पर खड़ा है। मशहूर मौसम वैज्ञानिक जेम्स हैन्सन ने जो चेतावनी दी थी, वह अब सच होती दिख रही है। अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों और वैज्ञानिक गणनाओं के आधार पर अनुमान लगाया जा रहा है कि इस साल की बढ़ती गर्मी पिछले सारे वैश्विक रिकॉर्ड तोड़ देगी।

यूरोपियन यूनियन की कोपर्निकस क्लाइमेट चेंज सर्विस (C3S) और बर्कले अर्थ की ताजा रिपोर्टों के अनुसार 2026 के सबसे गर्म साल बनने की संभावना और मजबूत हुई है। वैज्ञानिक रिपोर्टें कहती हैं कि अगर यह साल 2024 का रिकॉर्ड पूरी तरह न भी तोड़ पाए, तब भी दर्ज इतिहास का दूसरा सबसे गर्म साल बनना लगभग तय माना जा रहा है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के छह प्रमुख वैश्विक डेटासेट के मुताबिक 2024 में वैश्विक तापमान औद्योगिक क्रांति से पहले के दौर की सीमा पार कर गया था। 2023 और 2025 में भी तापमान इस खतरनाक स्तर के बेहद करीब पहुंच गया था।

इस साल पारा इतनी तेजी से चढ़ने के पीछे दो बड़ी वजहें बताई गई हैं। पहली वजह प्रशांत महासागर में बना बेहद तीव्र सुपर अल नीनो है। भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर की यह घटना इस बार असामान्य रूप से तेज हो गई है और इसकी तीव्रता ने इतिहास के तीन सबसे खतरनाक माने गए अल नीनो वर्षों, यानी 1982-83, 1997-88 और 2015-16, को भी पीछे छोड़ दिया है।

दूसरी और उतनी ही चिंताजनक वजह महासागरों का अभूतपूर्व रूप से बढ़ा तापमान है। दुनिया भर में समुद्र की सतह का तापमान रोज नए खतरनाक रिकॉर्ड बना रहा है। अगस्त और सितंबर 2026 में समुद्र की सतह का औसत तापमान अब तक का सबसे ऊंचा दर्ज हुआ। मई में प्रशांत महासागर में बनने वाले अल नीनो का असली असर आम तौर पर दो से चार महीने की देरी से दिखता है। इसी वजह से इस साल अगस्त अब तक का सबसे गर्म महीना दर्ज किया गया।

WMO के आंकड़ों के अनुसार 2026 में धरती का औसत तापमान औद्योगिक युग (1850-1900) के औसत से 1.49 डिग्री सेल्सियस से 1.5 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रह सकता है। यह वही 1.5 डिग्री सेल्सियस की सीमा है, जिसे पेरिस जलवायु समझौते ने वैश्विक जलवायु को स्थिर रखने की अधिकतम हद तय किया था। कुछ डेटासेट यह अंतर 1.4 से 1.5 डिग्री सेल्सियस के बीच दिखा रहे हैं। फिर भी सभी अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक इस पर एकमत हैं कि 2024 को छोड़कर 2026 बाकी सभी पिछले सालों से काफी ज्यादा गर्म रहेगा।

साल के आखिरी महीने, यानी अक्टूबर से दिसंबर, तय करेंगे कि यह साल कुल मिलाकर कितना गर्म रहा। 1.5 डिग्री सेल्सियस की सीमा पार करने के लिए अब बहुत कम गर्मी की जरूरत है और अल नीनो की मौजूदा रफ्तार देखते हुए यह सीमा लांघना आसान लग रहा है। उत्तरी गोलार्ध के सर्दी वाले महीनों में भी तापमान लगातार बढ़ रहा है, इसलिए सालाना औसत तापमान के 1.5 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जाने का नया रिकॉर्ड बन सकता है।

जेम्स हैन्सन समेत दूसरे मौसम विशेषज्ञों ने चेताया है कि अगर यह सीमा स्थायी रूप से या लगातार पार हो गई, तो दुनिया भर में प्राकृतिक आपदाओं और विनाशकारी मौसम का नया दौर शुरू हो जाएगा। खासकर भारत, पाकिस्तान और दक्षिण एशिया के दूसरे देशों में आने वाले समय में जानलेवा हीटवेव, भीषण सूखा और मानसून के बुनियादी चक्र में खतरनाक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। बारिश की अनियमितता से खेती, खाद्य सुरक्षा और पानी की सप्लाई पर बहुत बुरा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

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