6 जुलाई 2008 से धरती पर रोज कहीं न कहीं बन रहा है हीट स्टॉर्म, ऐसा दावा
दावा है कि 6 जुलाई 2008 से धरती पर हर दिन कम से कम एक जगह हीट स्टॉर्म बन रहा है और यह सिलसिला 18 साल से ज्यादा हो गया है।
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दावा किया गया है कि धरती पर 6 जुलाई 2008 से हर दिन कम से कम एक जगह उष्णता का तूफान यानी हीट स्टॉर्म बन रहा है। यह सिलसिला 18 साल से ज्यादा वक्त से चल रहा है और अब तक एक दिन के लिए भी टूटा नहीं है। मौसम की बढ़ती अनिश्चितता, तापमान के रिकॉर्ड और तेज गर्मी की घटनाओं ने पूरी दुनिया के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है।
दिन-ब-दिन धरती का वातावरण कई तरह के प्रदूषण की वजह से गरम होता जा रहा है। हाल ही में हमने नेपाल की भयानक बाढ़ देखी, जिसका दिल दहला देने वाला रूप भी सामने आया। दुनिया भर के वैज्ञानिक और पर्यावरण से जुड़े लोग बर्फ पिघलने की प्रक्रिया से चिंता में हैं। बढ़ते तापमान के नतीजे अब और गंभीर शक्ल में सामने आ रहे हैं।
हीट स्टॉर्म का मतलब सिर्फ किसी शहर में तापमान बढ़ना नहीं है। जब किसी इलाके में असामान्य और तेज गर्मी के हालात बन जाते हैं और वे इंसानी सेहत, पर्यावरण और रोज की जिंदगी के लिए खतरनाक साबित होते हैं, तब ऐसी घटनाओं को व्यापक मायने में हीट स्टॉर्म कहा जाता है।
इसमें बढ़ता तापमान, लंबे वक्त तक टिकने वाली गर्मी की लहरें और वातावरण में बदलाव शामिल हैं। ऐसे हालात में रात का तापमान भी कम नहीं होता। इसलिए शरीर को दिन भर की गर्मी से उबरने का मौका नहीं मिलता। नतीजा यह कि लू लगने और दिल की तकलीफें बढ़ने का खतरा ज्यादा हो जाता है।
मौसम के जानकार बताते हैं कि दुनिया का तापमान बढ़ने से तेज गर्मी की घटनाएं ज्यादा बार हो रही हैं और ज्यादा तीखी भी। जीवाश्म ईंधन का बढ़ता इस्तेमाल, कोयला और तेल का जलना, जंगलों की कटाई और ग्रीनहाउस गैसों का ज्यादा उत्सर्जन धरती को गरम कर रहे हैं।
शहरों में कंक्रीट की इमारतें, गाड़ियों की बढ़ती तादाद और घटते पेड़ों की वजह से गर्मी का असर ज्यादा महसूस होता है। खासकर रात में भी शहरों का तापमान ऊंचा रहता है। इससे लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ती है।
गर्मी की बढ़ती घटनाओं का सबसे ज्यादा असर खेती और कुदरती संसाधनों पर हो रहा है। फसलों को जितनी नमी चाहिए, वह कम हो जाती है। जमीन से पानी का वाष्पीकरण बढ़ता है और सिंचाई की जरूरत ज्यादा पड़ती है। इसका असर किसानों की पैदावार की क्षमता पर पड़ सकता है। दूसरी तरफ गर्मी से नदियों, तालाबों और बांधों में पानी की उपलब्धता पर भी असर हो सकता है।
मजदूरों, निर्माण क्षेत्र में काम करने वालों और धूप में काम करने वाले लोगों के लिए यह हालात और ज्यादा खतरनाक हैं। धरती पर गर्मी की घटनाओं की यह लंबी कड़ी जलवायु परिवर्तन की बढ़ती चुनौतियों की ओर ध्यान खींचती है। बढ़ते तापमान को रोकने के लिए कार्बन उत्सर्जन घटाना, पेड़ लगाना, अक्षय ऊर्जा का इस्तेमाल और ठोस विकास को तरजीह देना वक्त की जरूरत बन गया है।