सांगली का पानी रोकने वाले आप कौन? नहर समिति की बैठक में पडळकर ने उठाए सवाल
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सांगली के पानी को लेकर गुरुवार को जिलाधिकारी कार्यालय में हुई नहर समिति की बैठक में जमकर हंगामा हुआ।
सांगली के पानी के मुद्दे पर गुरुवार को जिलाधिकारी कार्यालय में हुई नहर समिति की बैठक खूब गरमाई रही। जलसंपदा मंत्री राधाकृष्ण विखे-पाटील की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में विधायक गोपीचंद पडळकर समेत सांगली जिले के जनप्रतिनिधियों ने सख्त रुख अपनाया। मंत्री जयकुमार गोरे बैठक में ऑनलाइन जुड़े थे।
बैठक में सवाल उठा कि सांगली का पानी रोकने वाले आप कौन हैं और सांगली के हक के पानी पर फैसला लेने का अधिकार आपको किसने दिया। कहा गया कि पिछले आठ से पंद्रह दिन से सांगली का पानी रोके जाने की वजह से कृष्णा नदी का पात्र सूख गया है। इसके बावजूद सांगली पर ही पानी उठाने पर पाबंदी और बिजली कनेक्शन बंद करने की नौबत क्यों आई, यह सवाल भी बैठक में रखा गया।
पिछले कुछ दिनों से सांगली के हिस्से का पानी नहीं मिल रहा है। इसकी वजह से नदी किनारे के गांवों में पानी की किल्लत गहरा गई है। कृष्णा नदी का पात्र सूखने से खेती के साथ पीने के पानी का सवाल भी गंभीर हो गया है। बैठक में यह मुद्दा उठा कि एक तरफ सांगली जिले में पानी उठाने पर पाबंदी लगाई जा रही है, जबकि सातारा जिले में बिजली आपूर्ति और पानी का उठाव जारी है। सांगली के हक के पानी में भेदभाव क्यों, यह पूछते हुए विधायकों ने प्रशासन और जलसंपदा विभाग को घेरा।
पडळकर का सवाल
विधायक गोपीचंद पडळकर ने गुस्से में कहा, "हर बार हमारा पानी रोका जाता है। सांगली का पानी रोकने वाले आप कौन?" सांसद विशाल पाटील ने भी पूछा कि सातारा जिले में पानी उठाया जा रहा है तो सांगली में पानी उठाने पर पाबंदी क्यों है। उन्होंने यह मुद्दा भी रखा कि पानी सांगली के हक का है, फिर उसके इस्तेमाल के लिए दूसरे जिले पर निर्भर क्यों रहना पड़ता है।
शंभूराजे देसाई की भूमिका
मंत्री शंभूराजे देसाई ऑनलाइन उपस्थित रहे और उन्होंने साफ किया कि उन्होंने पानी नहीं रोका है। उन्होंने कहा कि पिछले साल के मुकाबले कोयना बांध में पानी का भंडार कम है और न्यायसंगत पानी बंटवारे की बात रखी। फिर भी सांगली में नदी पात्र सूखा पड़ा है तो पानी छोड़ने का अधिकार आखिर किसके पास है और सांगली को वक्त पर पानी क्यों नहीं मिलता, इन सवालों पर बैठक का राजनीतिक माहौल गरमा गया।
म्हैसाळ और टेंभू योजना के आवर्तन की मांग
पूर्व सांसद संजयकाका पाटील ने भी पानी के मुद्दे पर आक्रामक रुख अपनाया और कहा कि सांगली को उसके हक का पानी मिलना जरूरी है। विधायक जयंत पाटील समेत दूसरे जनप्रतिनिधियों ने सूखा प्रभावित इलाके में पानी के नियोजन, म्हैसाळ और टेंभू योजनाओं के आवर्तन की मांग की। उन्होंने यह भी मांग रखी कि बिजली बनाने में इस्तेमाल होने वाला पानी सिंचाई के लिए उपलब्ध कराया जाए।
सांगली का पानी, सातारा का दखल और प्रशासन का नियोजन, इन सवालों पर जनप्रतिनिधियों के बीच बैठक में जोरदार खींचतान हुई। विधायकों का कहना था कि सिर्फ बैठकें करने और आश्वासन देने से मसला नहीं सुलझेगा, सांगली के नदी पात्र में असल में पानी छोड़ना होगा। अब पूरे जिले की नजर इस पर है कि जलसंपदा विभाग इन मांगों पर क्या फैसला लेता है और सांगली को उसके हक का पानी कब मिलता है।
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