सांगली जिला बैंक चुनाव: 21 में से 19 सीटों पर सहमति, जत और कवठेमहांकाल में सीधा मुकाबला
सीट बंटवारे पर सहमति से 19 सीटें बिनविरोध होंगी; जत और कवठेमहांकाल में उम्मीदवार आमने-सामने।
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सांगली जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के चुनाव में सीटों के बंटवारे पर सियासी सहमति बन गई है। इसके चलते 21 में से 19 सीटों पर चुनाव बिनविरोध होने का रास्ता साफ हो गया है। सिर्फ जत और कवठेमहांकाल के सोसायटी गुटों में उम्मीदवार आमने-सामने होंगे।
सीट बंटवारे के लिए आज सुबह से ही जिला परिषद अध्यक्ष के बंगले पर प्रमुख नेताओं की बैठकों का दौर चल रहा था। दिन भर वहां चर्चा होती रही। महाविकास आघाड़ी और भाजपा के बीच हुई सहमति से ज्यादातर सीटों पर टकराव टल गया है।
बैठक में राष्ट्रवादी कांग्रेस के नेता जयंत पाटील, सांसद विशाल पाटील, ऋतुराज देशमुख, पृथ्वीराज पाटील, राहुल महाडिक, विश्वजीत कदम, सम्राट महाडिक, इंद्रिस नायकवडी, महेंद्र लाड और अमोल बाबर मौजूद थे। इनके अलावा भाजपा, राष्ट्रवादी कांग्रेस, कांग्रेस और शिवसेना के प्रमुख नेता भी शामिल हुए। अलग-अलग पार्टियों के नेताओं की बातचीत से सीट बंटवारे का फॉर्मूला तय हुआ।
फॉर्मूले के मुताबिक बैंक की 21 सीटों में से भाजपा को चार, राष्ट्रवादी कांग्रेस को सात और कांग्रेस को छह सीटें मिलेंगी। राष्ट्रवादी कांग्रेस के अजित पवार गुट को एक और शिवसेना के शिंदे गुट को तीन सीटें दी गई हैं। कुल मिलाकर यह आंकड़ा 21 बैठता है।
बैंक पर दबदबे के लिए पार्टियों में खींचतान की आशंका थी। लेकिन प्रमुख नेताओं ने एक साथ बैठकर सीटों का पेच सुलझाने की कोशिश की और कई सीटों पर संभावित टकराव टल गया।
जिन 19 उम्मीदवारों का बिनविरोध चुना जाना तय हुआ है, उनके नाम ये हैं: अमोल बाबर, विश्वजीत कदम, महेंद्र लाड, देवराज पाटील, विराज नाईक, तानाजी पाटील, अण्णासाहेब कोरे, सुमनताई पाटील, राहुल महाडिक, पृथ्वीराज पाटील, सतीश देशमुख, रणधीर नाईक, के. डी. कांबळे, वैभव विलासराव शिंदे, पूजा विशाल पाटील, वर्षा विक्रम सावंत, रेणुका सत्यजित देशमुख, संभाजी कचरे और नितीन होणराव।
कवठेमहांकाल सोसायटी गुट में पूर्व मंत्री अजितराव घोरपडे और टी. व्ही. पाटील के बीच मुकाबला होगा। वहीं जत सोसायटी गुट में भाजपा के विधायक गोपीचंद पडळकर और विनोद पवार आमने-सामने होंगे। जिले के सियासी हलकों की नजर इस लड़ाई पर लगी है।
ज्यादातर सीटें बिनविरोध होने के बावजूद इन दो गुटों की लड़ाई की वजह से चुनाव में सियासी दिलचस्पी बनी हुई है। इन दोनों गुटों के नतीजे अहम माने जा रहे हैं।
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