सभी समाजों के छात्रों के लिए एक ही छत के नीचे हॉस्टल, बावनकुले ने कलेक्टरों को दिए निर्देश
राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने सभी जिलाधिकारियों से 13 अक्टूबर तक हॉस्टल के लिए सरकारी जगहों के प्रस्ताव भेजने को कहा है।
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मुंबई: आदिवासी, अनुसूचित जाति-जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, मराठा और बाकी सभी समाजों के छात्रों के लिए अब अलग-अलग हॉस्टल बनाने के बजाय आगे से एक ही जगह सबको रहने की सुविधा देने की सोच पर काम होगा। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने सभी जिलाधिकारियों को इसी बारे में निर्देश दिए हैं।
योजना के मुताबिक विभागीय स्तर पर करीब 1 हजार छात्रों की क्षमता वाला हॉस्टल बनाने का नियोजन चल रहा है, जबकि जिला स्तर पर 500 छात्रों की क्षमता वाला हॉस्टल बनाया जाएगा। इन हॉस्टलों के लिए सही और सुविधाजनक सरकारी जगह तय करके उसके प्रस्ताव 13 अक्टूबर तक भेजने को कहा गया है।
यह निर्देश मंत्रालय में हुई एक बैठक में दिए गए, जो अन्य पिछड़ा वर्ग बहुजन कल्याण विभाग के हॉस्टलों के लिए जगह उपलब्ध कराने के बारे में थी। बैठक में विधायक राणा जगजितसिंह पाटील, विधायक संजय बनसोडे, राजस्व विभाग के सहसचिव सं. द. सूर्यवंशी, सहसचिव मनीषा जायभाये, उपसचिव गौरी म्हस्के, उपसचिव भगवान सावंत और अन्य पिछड़ा वर्ग बहुजन कल्याण विभाग की सह निदेशक स्नेहा देवकाते मौजूद थे। राज्य के सभी जिलाधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए जुड़े थे।
बावनकुले ने कहा कि हॉस्टल की जगह तय करते वक्त सिर्फ यह न देखा जाए कि जगह खाली पड़ी है। पहले एक छात्र की नजर से सोचा जाए कि वह जगह कैसी रहेगी। पढ़ाई के लिए, आने-जाने के लिए और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने के लिए जगह सुविधाजनक होनी चाहिए। इलाके की बुनियादी सुविधाएं, ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था और आगे चलकर विस्तार की गुंजाइश भी ध्यान में रखी जाए।
उन्होंने बताया कि राज्य में पहले अलग-अलग समाजों के लिए अलग हॉस्टल बनाए गए हैं। लेकिन आगे जो हॉस्टल बनेंगे, उनमें सभी समाजों के छात्र साथ रहेंगे। बावनकुले के मुताबिक इस सोच का मकसद सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना है और साथ ही छात्रों को अच्छी बुनियादी सुविधाएं देना है।
महाज्योति की तरफ से हॉस्टल के लिए जिन जगहों की मांग की गई है, उन पर संबंधित जिलाधिकारी तुरंत कार्रवाई करें, ऐसा भी कहा गया। चंद्रपुर, बीड, परभणी, धाराशिव, नांदेड, सांगली, सोलापुर, अकोला, यवतमाल, गोंदिया और वाशिम जिलों की जगहों पर जरूरी कार्रवाई करके प्रस्ताव सरकार को भेजने को कहा गया है। कुछ जगहों पर जमीन देने का फैसला सरकार के स्तर पर हो चुका है, फिर भी वहां की प्रॉपर्टी कार्ड की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है, इसलिए आगे का काम अटका हुआ है। जिलाधिकारियों को सूचना दी गई कि प्रॉपर्टी कार्ड का काम पूरा करें और जरूरी कागजात के साथ प्रस्ताव सरकार के पास जमा करें।
बावनकुले ने जिलाधिकारियों से अपील की कि जगह सुझाते समय छात्रों के नजरिए से सोचें। हॉस्टल की जगह शैक्षणिक संस्थानों, सार्वजनिक परिवहन, स्वास्थ्य सुविधाओं, बाजार और दूसरी जरूरी सुविधाओं के लिहाज से सुविधाजनक हो। साथ ही भविष्य में बढ़ोतरी को देखते हुए बुनियादी सुविधाएं खड़ी करने के लिए वहां काफी जगह भी होनी चाहिए।
महाज्योति की जगहों के लिए जिलाधिकारी ऐसे प्रस्ताव बनाएं, जिनमें कम से कम 1 हजार छात्रों की क्षमता का हॉस्टल बन सके। प्रस्ताव में उपलब्ध जमीन, उसका क्षेत्रफल, लोकेशन, आने-जाने की सुविधा, इलाके की शैक्षणिक और शहरी सुविधाएं और आगे विस्तार की संभावना, इन सबका ब्योरा देना होगा। बावनकुले ने बताया कि जिलों से आने वाले प्रस्तावों के आधार पर सभी समाजों के छात्रों के लिए एकत्रित हॉस्टल योजना का सरकारी स्तर का खाका तैयार किया जाएगा।