गुरूवार, 8 अक्टूबर 2026

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21:08 IST

वाशिम की 291 स्कूलों में एक भी बच्चा निपुण नहीं, कलेक्टर ने दिए सख्त निर्देश

वाशिम के जिलाधिकारी योगेश कुंभेजकर ने शून्य निपुण स्कूलों पर खास ध्यान देने को कहा है। जिला स्तरीय संचालन समिति की बैठक में 291 स्कूलों के लिए विशेष टास्क फोर्स की जानकारी दी गई।

वाशिम की 291 स्कूलों में एक भी बच्चा निपुण नहीं, कलेक्टर ने दिए सख्त निर्देश तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

वाशिम जिले का हर बच्चा बुनियादी पढ़ना-लिखना और गिनती सीख सके, यह जरूरी है। जिलाधिकारी योगेश कुंभेजकर ने निर्देश दिए हैं कि जिन स्कूलों को 'शून्य निपुण' माना गया है, वहां खास ध्यान देकर असरदार उपाय किए जाएं। उन्होंने कहा कि शून्य निपुण स्कूलों की संख्या को शून्य पर लाने के लिए योजना बनाकर काम होना चाहिए।

यह बात उन्होंने जिलास्तरीय संचालन समिति की बैठक में कही। बैठक जिलाधिकारी कार्यालय के काटेपूर्णा सभागार में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में हुई। इसका आयोजन जिला शिक्षण व प्रशिक्षण संस्था डायट, वाशिम और जिला परिषद, वाशिम के शिक्षा विभाग ने मिलकर किया था।

बैठक में संचालन समिति के उपाध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी अर्पित चौहान मौजूद थे। समिति के सचिव और डायट के प्राचार्य डॉ. राजेंद्र महाजन, शिक्षाधिकारी (प्राथमिक) विठ्ठल भुसारे, डायट के अधिव्याख्याता डॉ. राजेश गवई, शिवाजी साखरे और सय्यद भी आए। उपशिक्षाधिकारी कृष्णा बिरादार और वेनगुलवार समेत कई लोग भी शामिल हुए।

कुंभेजकर ने बताया कि 291 शून्य निपुण स्कूलों के लिए विशेष टास्क फोर्स काम पर लगाया गया है। इसमें खंड शिक्षा अधिकारियों की सीधी जवाबदेही तय की गई है। केंद्र प्रमुख और विस्तार अधिकारी इन स्कूलों को गोद लेंगे। वे हर हफ्ते खुद जाकर कक्षाएं देखेंगे और मार्गदर्शन करेंगे।

'निपुण महाराष्ट्र' की रिपोर्ट के मुताबिक वाशिम जिले की 795 प्राथमिक स्कूलों के 42 हजार 549 विद्यार्थियों का सीधा मूल्यांकन किया गया। जिले की निपुण औसत 17.3 प्रतिशत रही और 7 हजार 362 विद्यार्थी निपुण पाए गए। जिले की 291 स्कूलों में, यानी 36.6 प्रतिशत स्कूलों में, एक भी विद्यार्थी निपुण नहीं निकला।

तहसील के हिसाब से देखें तो कारंजा लाड 26.6 प्रतिशत और वाशिम 22.5 प्रतिशत के साथ आगे हैं। मानोरा 8.8 प्रतिशत और रिसोड 10.7 प्रतिशत के साथ पीछे हैं। मानोरा तहसील की पूरे 50 प्रतिशत स्कूलों में निपुणता शून्य है।

जिलाधिकारी ने यह भी कहा कि मंगरूळपीर का अफझलपूर विद्यालय 100 प्रतिशत निपुण रहा है। कारंजा की कंकुबाई कन्या शाला ने 98.33 प्रतिशत निपुणता हासिल की है। बाकी स्कूलों को इनके पढ़ाने के खास तरीकों से सीखना चाहिए। इन स्कूलों में चल रही 'वाचन चौपाल' और 'संख्या पेटी' पहल खास तौर पर उल्लेखनीय रही हैं।

बैठक में जानकारी का प्रेजेंटेशन डॉ. महाजन ने दिया। जिले के सभी खंड शिक्षा अधिकारी, संचालन समिति के सदस्य और चुने हुए केंद्र प्रमुख व विस्तार अधिकारी भी आए। विशेषज्ञ शिक्षक विश्वंभर आळणे भी बैठक में मौजूद थे।

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