दीक्षा प्लेटफॉर्म पर पीएम मोदी बोले, दूर-दराज के बच्चों तक पहुंच रही पढ़ाई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडिया मोबाइल कांग्रेस में कहा कि मोबाइल और इंटरनेट से गरीब परिवारों के बच्चों के लिए पढ़ाई के नए रास्ते खुले हैं।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडिया मोबाइल कांग्रेस के समारोह में बोलते हुए कहा कि मोबाइल और इंटरनेट की वजह से देश के दूर-दराज इलाकों में रहने वाले बच्चों और गरीब परिवारों के लिए पढ़ाई के नए रास्ते खुल गए हैं। उन्होंने बताया कि कोविड के दौरान भी ऑनलाइन पढ़ाई के जरिए बड़ी संख्या में विद्यार्थियों तक शिक्षा पहुंची। 2022 तक दीक्षा प्लेटफॉर्म पर 500 करोड़ से ज्यादा लर्निंग सेशन्स दर्ज किए गए।
मोदी के मुताबिक सरकार की कोशिश है कि समाज के जिन तबकों को पढ़ाई की सबसे ज्यादा जरूरत है, उन तक ऑनलाइन शिक्षा के सारे माध्यम पहुंचाए जाएं।
स्कूल की किताबों में क्यूआर कोड, ऑनलाइन कोड, ऑनलाइन पढ़ाई या टीचर ट्रेनिंग, इन सबके लिए दीक्षा एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है। इसमें पाठ्यपुस्तकों से लेकर वीडियो, इंटरैक्टिव सामग्री, कोर्सेस और दूसरी डिजिटल शैक्षिक सामग्री मिल जाती है। इसे शिक्षा मंत्रालय के तहत एनसीईआरटी (NCERT) की पहल पर सीआईईटी (CIET) के सहयोग से बनाया गया है। इसकी शुरुआत 2017 में हुई थी।
आसान शब्दों में कहें तो DIKSHA ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म है जहां विद्यार्थी, टीचर, अभिभावक और दूसरे संबंधित लोग पढ़ाई से जुड़ी डिजिटल सामग्री पा सकते हैं। यह 'पीएम ई-विद्या' (PM e-VIDYA) का एक अहम हिस्सा है और स्कूली शिक्षा के लिए 'वन नेशन, वन डिजिटल प्लेटफॉर्म' के तौर पर इस्तेमाल होता है। यह किसी एक कक्षा या बोर्ड तक सीमित नहीं है। अधिकृत जानकारी के मुताबिक DIKSHA पर के-12 (K-12) यानी प्राथमिक स्कूली शिक्षा से लेकर उच्च माध्यमिक स्तर तक का डिजिटल लर्निंग मटेरियल मौजूद है। इसमें NCERT, CBSE, NIOS और राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों के बोर्डों से जुड़ी सामग्री भी शामिल है।
यहां एक बात समझना जरूरी है कि कोर्सेस की कोई एक तय संस्था या गिनी-चुनी कैटेगरी नहीं है। दीक्षा के कोर्स अलग-अलग तरीकों से खोजे और देखे जा सकते हैं। ये कोर्स विद्यार्थियों के रिवीजन प्रोग्राम, टीचरों की क्षमता बढ़ाने और व्यावसायिक विकास से जुड़े हैं, और अलग-अलग विषयों के हैं। इसलिए विद्यार्थी सिर्फ कोर्स ही नहीं, अपनी कक्षा और विषय के हिसाब से पढ़ाई की दूसरी डिजिटल सामग्री भी ढूंढ सकता है।
दीक्षा की सबसे काम की सुविधाओं में से एक है क्यूआर कोड वाली एनर्जाइज्ड टेक्स्टबुक्स यानी पाठ्यपुस्तकें। कई पाठ्यपुस्तकों में दिया क्यूआर कोड DIKSHA ऐप या पोर्टल से स्कैन करने पर उस पाठ से जुड़ी डिजिटल सामग्री खुल जाती है। इसमें वीडियो, इंटरैक्टिव सामग्री और दूसरी शैक्षिक सामग्री मिल सकती है। फायदा यह है कि विद्यार्थी जो अध्याय किताब में पढ़ रहा है, उसी से जुड़ी डिजिटल सामग्री सीधे देख सकता है। उसे इंटरनेट पर अलग से खोजने की जरूरत नहीं पड़ती।
DIKSHA का इस्तेमाल विद्यार्थी, टीचर, अभिभावक, स्कूल प्रमुख, स्कूल अधिकारी और दूसरे यूजर कर सकते हैं। हालांकि हर कोर्स की पात्रता और उसमें शामिल होने के नियम एक जैसे नहीं होते। किसी खास कोर्स का क्रिएटर या मेंटर तय कर सकता है कि उसमें कौन शामिल हो सकता है। गेस्ट यानी लॉगिन न किए हुए यूजर भी DIKSHA पर काफी सामग्री देख सकते हैं। लेकिन कोर्स में औपचारिक रूप से शामिल होने जैसी सुविधाओं के लिए आम तौर पर रजिस्ट्रेशन और लॉगिन करना जरूरी होता है।