गुरूवार, 8 अक्टूबर 2026

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21:30 IST

जीएसटी कौंसिल की बैठक: रिफंड 10 दिन में, मनमानी गिरफ्तारी का अधिकार खत्म

जीएसटी कौंसिल की बैठक: रिफंड 10 दिन में, मनमानी गिरफ्तारी का अधिकार खत्म तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

केंद्रीय अर्थमंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई जीएसटी कौंसिल की 57वीं बैठक में व्यापारियों और करदाताओं के हित में कई अहम फैसले लिए गए हैं। इस बैठक का मुख्य जोर टैक्स की दरें बदलने पर नहीं, बल्कि प्रक्रिया को सीधा-सादा बनाने और 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ावा देने पर रहा। 'जीएसटी 2.0' की तरफ कदम बढ़ाते हुए कागजी कार्रवाई और इंस्पेक्टर राज खत्म करके पूरी व्यवस्था को डेटा और ऑटोमेशन पर टिकाया गया है। आइए इन 10 बड़े बदलावों को एक-एक करके देखते हैं।

पहले रजिस्ट्रेशन की बात। कम जोखिम वाले यानी लो-रिस्क व्यापारियों को अब सिस्टम की तरफ से सिर्फ 3 दिन में अपने आप रजिस्ट्रेशन मिल रहा है। इसमें किसी अधिकारी का दखल नहीं होता और 61 टक्के रजिस्ट्रेशन इसी तरीके से हो रहे हैं। नाम, पता या डायरेक्टर बदलने जैसी अर्जियों को भी अब अपने आप मंजूरी मिलेगी।

रिटर्न की गलतियों को लेकर भी राहत दी गई है। रिटर्न में फर्क की वजह से पहले हजारों नोटिस अपने आप निकल जाते थे। अब अगर विक्रेता से बिल में कोई गलती रह जाती है, तो वह सीधे अपने सेल्स स्टेटमेंट में सुधार कर सकेगा और उसका फायदा खरीदार को अपने आप मिल जाएगा। पुरानी गलतियां और गलत रजिस्ट्रेशन नंबर सुधारने की बड़ी छूट भी दी गई है।

रिफंड की व्यवस्था तेज की गई है। रिफंड क्लेम स्वीकार करने की अवधि 15 दिन से घटाकर 10 दिन कर दी गई है। 90 टक्के मामलों में अब कोई अधिकारी नहीं, बल्कि सिस्टम खुद 3 दिन में रिफंड मंजूर करेगा। 'कैश लेजर' में पड़ी ज्यादा रकम भी सीधे खाते में जमा होगी।

कानूनी विवाद और नोटिस के मामले में, 10,000 रुपये से कम रकम वाले मामलों में कोई नोटिस नहीं भेजा जाएगा। नोटिस भेजने, सुनवाई करने और आदेश देने की प्रक्रिया को अब ज्यादा पारदर्शी और एक जैसी बनाया गया है।

इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी आईटीसी को लेकर ईमानदार खरीदारों की सुरक्षा के लिए अधिकारियों की एक खास समिति बनाई जाएगी, जो 3 महीने में रिपोर्ट देगी। कर्मचारियों का स्वास्थ्य और जीवन बीमा, टेलीकॉम टावर, फैक्टरी के बाहर की पाइपलाइन और एक्सपायर हो चुके फ्री सैंपल (जिन्हें नष्ट करना जरूरी है) पर भी अब 'आईटीसी' मिलेगा। एक ही चेन की सेवाओं पर डबल टैक्स नहीं लगेगा।

कारोबार करना भी आसान किया गया है। छोटे करदाताओं के लिए कारोबार बंद करने यानी कैंसिलेशन की प्रक्रिया ऑटोमैटिक कर दी गई है। 5 करोड़ रुपये तक का टर्नओवर रखने वाले और सीधे ग्राहकों को माल बेचने वाले छोटे व्यापारी अब साल में एक बार रिटर्न भर सकेंगे, जबकि टैक्स तिमाही यानी क्वार्टरली भरना होगा। सड़कों पर बेवजह गाड़ियां रोकने पर पाबंदी लगाई गई है।

गिरफ्तारी, मुकदमे और जुर्माने में बड़ी छूट मिली है। जीएसटी के तहत मनमाने तरीके से गिरफ्तारी करने का अधिकार पूरी तरह हटा दिया गया है। मुकदमा चलाने की सीमा 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये कर दी गई है। आम जुर्माना 25 हजार रुपये से घटाकर 10 हजार रुपये किया गया है।

निर्यातकों को भी फायदा होगा। अगर कोई भारतीय कंपनी विदेश में अपनी ही ब्रांच के जरिए क्लाइंट को सेवा देती है, तो उसे एक्सपोर्ट का फायदा मिलेगा। इसी तरह विदेशी क्लाइंट भारत में माल भेजकर टेस्टिंग या रिपेयरिंग करवाए, तो उसे भी सेवा का निर्यात माना जाएगा।

ई-कॉमर्स के छोटे विक्रेताओं को राहत मिली है। वे अब अमेजन, फ्लिपकार्ट जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के दूसरे राज्य के गोदाम को ही अपना प्रिंसिपल प्लेस ऑफ बिजनेस दिखा सकेंगे। इससे वे अपने ही राज्य में बैठकर पूरे देश में माल बेच सकेंगे।

आखिर में, इस बैठक में किसी भी वस्तु या सेवा की टैक्स दर में कोई बदलाव नहीं किया गया है। दरों से जुड़े मुद्दे अब साल में सिर्फ एक बार एक अलग बैठक में विचार के लिए लिए जाएंगे।

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