गुरूवार, 8 अक्टूबर 2026

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21:43 IST

GST कौन्सिल की बैठक में व्यापारियों को राहत, गिरफ्तारी का अधिकार खत्म, आम जुर्माना भी कम

नई दिल्ली में हुई 57वीं GST काउंसिल की बैठक में गिरफ्तारी का अधिकार हटाने, जुर्माना घटाने और रिफंड की मियाद कम करने का फैसला हुआ।

GST कौन्सिल की बैठक में व्यापारियों को राहत, गिरफ्तारी का अधिकार खत्म, आम जुर्माना भी कम तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

नई दिल्ली में केंद्रीय अर्थमंत्री निर्मला सीतारामन की अध्यक्षता में GST काउंसिल की 57वीं बैठक हुई। इस बैठक में व्यापारियों और उद्योग क्षेत्र से जुड़े कई अहम फैसले लिए गए। GST कानून का पालन आसान बनाने और कानूनी प्रक्रिया को सरल करने के मकसद से काउंसिल ने कई बदलावों को मंजूरी दी है।

बैठक का सबसे बड़ा फैसला यह रहा कि GST कानून के तहत अधिकारियों के पास जो गिरफ्तारी का अधिकार था, उसे रद्द कर दिया गया। इससे करदाताओं और कारोबारियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

GST नियमों के उल्लंघन के मामलों में सीधे मुकदमा दाखिल करने की सीमा अब 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये कर दी गई है। साथ ही अपराधों के लिए जो न्यूनतम सजा का प्रावधान था, उसे हटा दिया गया है। अब जुर्माना या सजा कैसी होगी, यह अदालत के फैसले पर निर्भर करेगा।

छोटे व्यापारियों को राहत देते हुए GST काउंसिल ने आम जुर्माने की रकम भी घटा दी है। जिन उल्लंघनों के लिए अलग से जुर्माने का प्रावधान नहीं था, उनमें पहले 25 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जाता था। अब यह सीमा 10 हजार रुपये कर दी गई है।

कारोबारियों के लिए एक और अहम फैसला GST रिफंड को लेकर है। रिफंड मंजूर करने की मियाद 15 दिन से घटाकर 10 दिन कर दी गई है। इससे कारोबारियों का जो पैसा अटका रहता है, वह तुलनात्मक रूप से जल्दी उन्हें मिल सकेगा।

जो करदाता समय पर रिटर्न दाखिल नहीं करते या टैक्स भरने में देरी करते हैं, उनसे टैक्स की वसूली की जाएगी। ऐसे मामलों में लागू नियमों के मुताबिक ब्याज और अनुपात के हिसाब से जुर्माना लगाया जा सकता है। हालांकि यह साफ किया गया है कि सिर्फ टैक्स भरने में देरी होने की वजह से सख्त या परेशान करने वाली कार्रवाई नहीं की जाएगी।

इस बैठक में फिलहाल GST की टैक्स दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। दरों से जुड़े मुद्दों की समीक्षा साल में एक बार करने का फैसला लिया गया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन ने साफ किया कि सरकार का जोर टैक्स दरों से ज्यादा टैक्स व्यवस्था को और आसान, पारदर्शी और फेसलेस बनाने पर है।

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