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11:46 IST

पुर्तगाल के कई शहरों में घरों की बढ़ती कीमतों पर हजारों लोग सड़क पर उतरे

लिस्बन, पोर्तो और कोइंब्रा समेत कई शहरों में किराए और घरों के दाम के खिलाफ प्रदर्शन हुए। प्रदर्शनकारी निवेश फंडों पर सख्त कानून की मांग कर रहे हैं।

पुर्तगाल के कई शहरों में घरों की बढ़ती कीमतों पर हजारों लोग सड़क पर उतरे तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

फ्रांस और इटली में हुए उग्र आंदोलनों के बाद अब पुर्तगाल में भी लोगों का गुस्सा सड़कों पर दिख रहा है। राजधानी लिस्बन के साथ पोर्तो, कोइंब्रा और देश के दूसरे बड़े शहरों में हजारों लोग उतरकर सरकार की नीतियों का खुलेआम विरोध कर रहे हैं। यह वही देश है जो क्रिस्टियानो रोनाल्डो का वतन है।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि आसमान छूता घर का किराया, मकानों की पहुंच से बाहर गई कीमतें और दिन-ब-दिन बढ़ती महंगाई ने लोगों को बेहाल कर दिया है। वे चाहते हैं कि सरकार इस पर फौरन ठोस कदम उठाए।

लिस्बन के बीच के इलाके में प्रदर्शनकारियों ने तंबू गाड़कर धरना शुरू कर दिया है। लोगों के हाथों में जो तख्तियां थीं, उन पर सस्ते घरों की मांग और बड़े उद्योगपतियों के खिलाफ नारे लिखे थे। आम लोगों का कहना है कि देश में नौकरियों की तनख्वाह बहुत कम है, जबकि घरों के किराए और दाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंच गए हैं। नतीजा यह है कि नौजवान पीढ़ी, मिडिल क्लास परिवार और स्थानीय लोगों के लिए अपना घर खरीदना तो दूर, किराए के घर में रहना भी मुमकिन नहीं रहा।

इस आंदोलन में प्रदर्शनकारियों ने खासकर बड़े रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट फंडों को निशाना बनाया है। उनका कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर के ये बड़े फंड देश में रिहायशी जायदाद बड़े पैमाने पर खरीद रहे हैं और उसे कारोबार या छोटी अवधि के पर्यटन किराए (शॉर्ट-टर्म रेंटल) के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे रिहायशी बाजार में घरों की भारी कमी हो गई है और जो मकान उपलब्ध हैं, उनके दाम आसमान छू रहे हैं।

प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि सरकार ऐसे निवेश फंडों पर बेहद सख्त कानून लागू करे। उन्होंने साफ चेतावनी दी है कि बाजार में घर सट्टेबाजी या सिर्फ मुनाफे के लिए नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों के रहने के लिए होने चाहिए। लोगों को डर है कि अगर सरकार ने रियल एस्टेट में इस बेलगाम निवेश पर लगाम नहीं कसी, तो स्थानीय लोग अपने ही देश में बेघर हो जाएंगे।

लिस्बन में कई तख्तियों पर पोर्तो में हुई हिंसक घटना का कड़ा विरोध दर्ज किया गया था। गुरुवार तड़के पोर्तो में घर के हक के लिए शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे लोगों को हटाने के लिए पुलिस ने ताकत का इस्तेमाल किया था। इस कार्रवाई में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई झड़प में 37 लोग जख्मी हुए, जिनमें से दो की हालत बहुत गंभीर बताई जा रही है।

इस पुलिस कार्रवाई से प्रदर्शनकारियों का गुस्सा और भड़क गया। लोगों ने "डोकी फोडू नका, घरे द्या!" यानी "Don't break heads, give houses" जैसे तीखे नारों वाली तख्तियां हाथ में लेकर प्रशासन की दबंगई का विरोध किया। प्रदर्शनकारियों ने कहा है कि लोकतांत्रिक तरीके से अपने रहने के बुनियादी हक के लिए लड़ रहे नागरिकों पर इस तरह जोर-जबरदस्ती करना बेहद निंदनीय है।

इन आंदोलनों और बढ़ते सामाजिक तनाव के बीच पुर्तगाल के राष्ट्रपति अंटोनियो जोसे सेगुरो का बयान अहम रहा। राष्ट्रपति की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी संदेश में उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक और आगे बढ़े हुए समाज में गरीबी को किस्मत या मजबूरी मानकर कबूल नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि समाज के हर कमजोर तबके को बुनियादी सुविधाएं और सुरक्षा देना सरकार की पहली जिम्मेदारी है।

शिन्हुआ के आंकड़ों के मुताबिक पुर्तगाल में इस वक्त करीब 16.6 लाख लोग गरीबी रेखा के नीचे या गरीबी के गंभीर खतरे में जी रहे हैं। 2015 के बाद पहली बार यह संख्या 20 लाख से नीचे आई है, फिर भी 16 लाख से ज्यादा लोगों का गरीबी में होना देश के सामने एक गंभीर सच्चाई है। बढ़ती महंगाई और आवास संकट की वजह से गरीबी का यह प्रतिशत फिर बढ़ने का डर जताया जा रहा है। यूरोप में फैल रही इस बेचैनी के बीच पुर्तगाल सरकार के सामने आर्थिक और राजनीतिक, दोनों मोर्चों पर बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

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