शनिवार, 10 अक्टूबर 2026

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03:30 IST

दक्षिण अफ्रीका में प्रवासी विरोधी प्रदर्शन हिंसक, सोवेटो और डरबन में 24 गाड़ियां जलीं

जोहान्सबर्ग के सोवेटो इलाके और डरबन में 8 अक्टूबर को हुए प्रदर्शन में गाड़ियां जलाई गईं और विदेशी नागरिकों की दुकानों में लूट की खबर है। गृह मंत्रालय ने 9 अक्टूबर को आश्रय आवेदन से जुड़ा निर्देश वापस ले लिया।

दक्षिण अफ्रीका में प्रवासी विरोधी प्रदर्शन हिंसक, सोवेटो और डरबन में 24 गाड़ियां जलीं तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

दक्षिण अफ्रीका में प्रवासियों के खिलाफ चल रहा आंदोलन 8 अक्टूबर को हिंसक हो गया। जोहान्सबर्ग के सोवेटो इलाके और डरबन शहर में प्रदर्शनकारियों ने गाड़ियों को आग लगा दी। खबर है कि विदेशी नागरिकों की दुकानों में लूटपाट भी हुई।

गुरुवार को भड़की इस हिंसा में कुल 24 गाड़ियां जलाई गईं। इनमें से 10 गाड़ियां सोवेटो में और 14 गाड़ियां डरबन में जलीं। कुछ दुकानों में तोड़फोड़ और लूट भी हुई। हालात काबू में लाने के लिए पुलिस को अतिरिक्त बंदोबस्त लगाना पड़ा। डरबन में फायर ब्रिगेड को आग पर काबू पाने के लिए मशक्कत करनी पड़ी।

जिन दुकानों को निशाना बनाया गया, वे विदेशी नागरिकों की थीं। इससे स्थानीय व्यापारियों और प्रवासियों, दोनों में डर का माहौल बन गया। पुलिस ने चेतावनी दी कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी।

बताया जा रहा है कि इस आंदोलन के पीछे आश्रय मांगने वाले विदेशी नागरिकों के आवेदनों से जुड़ा अदालती फैसला है। दक्षिण अफ्रीका की संवैधानिक अदालत ने जुलाई में अपने फैसले में कहा था कि किसी व्यक्ति को सिर्फ इस वजह से आश्रय के लिए आवेदन करने का मौका नहीं ठुकराया जा सकता कि वह गैरकानूनी तरीके से देश में दाखिल हुआ या उसने कुछ प्रक्रियागत शर्तें पूरी नहीं कीं।

हालांकि इस फैसले का मतलब यह नहीं है कि सभी गैरकानूनी प्रवासियों को अपने आप स्थायी निवास या शरणार्थी का दर्जा मिल गया। सरकार के मुताबिक फैसले को लेकर गलत जानकारी फैलाई गई और इससे लोगों में गुस्सा बढ़ा। प्रदर्शनकारियों ने मांग की थी कि आश्रय आवेदन लेने की प्रक्रिया रोकी जाए।

हिंसा के बाद दक्षिण अफ्रीका के गृह मंत्रालय ने 9 अक्टूबर को आश्रय आवेदन स्वीकार करने की इजाजत देने वाला हाल का प्रशासकीय निर्देश वापस ले लिया। आवेदकों की संख्या बढ़ने से शरणार्थियों के लिए बने दफ्तर क्षमता से ज्यादा भर गए थे। कर्मचारियों की सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था का सवाल भी खड़ा हो गया था।

इस बीच पुलिस ने बताया कि सोवेटो और डरबन में हालात अब स्थिर हैं। हिंसा से जुड़े मामलों में तीन विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। पुलिस ने गाड़ियां जलाने और दुकानों में लूट करने वालों पर कार्रवाई की चेतावनी दी है।

दक्षिण अफ्रीका में बेरोजगारी, आर्थिक असमानता और प्रवास के सवाल पर पहले भी आंदोलन हो चुके हैं। विदेशी नागरिकों की वजह से बेरोजगारी और अपराध बढ़ते हैं, इस दावे के पक्ष में ठोस सबूत नहीं हैं, ऐसा सामाजिक शास्त्रज्ञ कहते हैं। इस हिंसा के बाद प्रवासियों की सुरक्षा और देश के सामाजिक सौहार्द का सवाल फिर सामने आ गया है।

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