सोम‌वार, 19 अक्टूबर 2026

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12:36 IST

ट्यूनीशिया में राष्ट्रपति कैस सईद की सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरे हजारों लोग

राजधानी ट्यूनिस में हजारों लोगों ने सरकार की नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने लोकतंत्र कमजोर करने, विरोधियों पर कार्रवाई और अर्थव्यवस्था संभालने में नाकामी के आरोप लगाए।

ट्यूनीशिया में राष्ट्रपति कैस सईद की सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरे हजारों लोग तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

ट्यूनीशिया में राष्ट्रपति कैस सईद की सरकार के खिलाफ लोगों की नाराजगी एक बार फिर सड़कों पर दिखी। राजधानी ट्यूनिस में हजारों लोग इकट्ठा हुए और सरकार की नीतियों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार ने देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर किया है, विरोधियों पर कार्रवाई की है और अर्थव्यवस्था को ठीक से संभालने में नाकाम रही है। उन्होंने राजनीतिक आजादी, लोकतांत्रिक अधिकारों और आर्थिक स्थिरता की मांग उठाई।

कैस सईद ने 2021 में संसद भंग कर दी थी और कार्यकारी अधिकार अपने हाथ में ले लिए थे। इसके बाद ट्यूनीशिया की राजनीतिक व्यवस्था में बड़े बदलाव हुए। विपक्षी पार्टियां और मानवाधिकार संगठन इन फैसलों की लगातार आलोचना करते आए हैं। विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने संसद, न्यायपालिका और दूसरी लोकतांत्रिक संस्थाओं पर अपना नियंत्रण बढ़ाया है।

प्रदर्शन के दौरान लोगों ने राजनीतिक आजादी की हिफाजत की मांग की। विपक्षी नेताओं और सरकार के खिलाफ रुख रखने वाले कार्यकर्ताओं पर होने वाली कार्रवाई का मुद्दा भी उठाया गया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि देश में लोगों को सरकार की नीतियों की आलोचना करने और अपनी बात रखने की आजादी मिलनी चाहिए।

राजनीतिक नाराजगी के साथ ट्यूनीशिया में आर्थिक संकट भी गहरा गया है। बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और रोजमर्रा की जरूरी चीजों के दाम ने आम लोगों का घरेलू बजट बिगाड़ दिया है। खासतौर पर नौजवानों को रोजगार के पूरे मौके नहीं मिल रहे, जिससे नाराजगी बढ़ रही है।

कई परिवारों को रोजमर्रा का खर्च चलाने में दिक्कत हो रही है। अनाज, ईंधन और दूसरी जरूरी चीजों के बढ़ते दामों से लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ा है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि सरकार रोजगार पैदा करने, महंगाई पर काबू पाने और आर्थिक सुधारों के लिए ठोस कदम उठाए।

राष्ट्रपति कैस सईद की अगुवाई वाली सरकार को अब राजनीतिक और आर्थिक, दोनों मोर्चों पर आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। सरकार के समर्थकों का कहना है कि देश में भ्रष्टाचार और राजनीतिक अस्थिरता को रोकने के लिए सख्त फैसले लेना जरूरी था। वहीं विपक्ष का कहना है कि इन फैसलों से लोकतांत्रिक व्यवस्था और नागरिकों के बुनियादी अधिकार खतरे में पड़ गए हैं।

इस प्रदर्शन से सरकार के खिलाफ नाराजगी फिर चर्चा में आ गई है। अब सबकी नजर इस पर है कि सरकार लोगों की मांगों पर क्या रुख अपनाती है और आर्थिक हालात सुधारने के लिए कौन से कदम उठाती है। आने वाले दिनों में यह भी देखना अहम होगा कि इस आंदोलन का देश की राजनीति पर क्या असर पड़ता है।

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