शरद पवार का सवाल: ज्ञानेश कुमार पर केंद्र ने वक्त पर फैसला क्यों नहीं लिया
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शरद पवार ने बारामती में कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त पर सरकार को समय पर फैसला लेना चाहिए था। दिल्ली के आंदोलन में सुप्रिया सुळे शामिल होंगी।
वरिष्ठ नेता शरद पवार ने कहा है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के मामले में केंद्र सरकार से समय पर फैसला लेने की उम्मीद थी। पवार के मुताबिक सरकार की तरफ से इस बारे में कोई फैसला नहीं हुआ, इसी वजह से विपक्षी पार्टियों को एक साथ आकर आंदोलन करना पड़ रहा है।
पवार रविवार, 1 नवंबर को बारामती तालुका के मालेगाव में अपने निवास गोविंद बाग पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोल रहे थे। उन्होंने साफ किया कि दिल्ली में होने वाले आंदोलन में राष्ट्रवादी कांग्रेस शरदचंद्र पवार पार्टी की तरफ से सांसद सुप्रिया सुले और दूसरे नेता हिस्सा लेंगे।
यह आंदोलन दिल्ली के रामलीला मैदान पर इंडिया गठबंधन की ओर से रखा गया है। आंदोलन की मांग है कि मुख्य चुनाव आयुक्त इस्तीफा दें। मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका को लेकर विपक्षी दलों ने कड़ा रुख अपनाया है।
पवार ने बताया कि विपक्ष की तरफ से चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और चुनाव आयोग के कामकाज के तरीके पर सवाल उठाए जा रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में अलग अलग विपक्षी पार्टियों के नेता एक मंच पर आ रहे हैं, ऐसा उन्होंने कहा।
चुनाव आयोग के मुद्दे के साथ ही पवार ने राज्य के सूखे का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक राज्य में सूखे के हालात और गंभीर होते जा रहे हैं। कई इलाकों में पीने के पानी की दिक्कत खड़ी हो गई है और जानवरों के चारे का सवाल भी सामने आया है।
इसलिए, पवार ने कहा, फिलहाल उनका पूरा ध्यान सूखे से जूझ रहे लोगों की समस्याओं पर है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सूखे की मार झेल रहे किसानों और गांव के लोगों को राहत मिलना जरूरी है।
एक तरफ चुनाव आयोग के मुद्दे पर देश का राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है, तो दूसरी तरफ महाराष्ट्र में सूखे ने गांवों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। इन दोनों बातों के बीच शरद पवार ने राज्य में पानी, चारे और सूखा राहत के सवालों को पहली प्राथमिकता दी है।
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