वनपुरी के भैरवनाथ प्रतिष्ठान ने पुरंदर उपसा के पानी से भरे तालाब, बांध
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बारिश कम होने से पुरंदर तालुका में अक्टूबर में ही पानी की किल्लत शुरू हो गई है। वनपुरी के श्री भैरवनाथ प्रतिष्ठान ने अपने खर्च से पुरंदर उपसा योजना का पानी लेकर गांव के तालाब और बांध भरे।
सासवड: इस बार बारिश के मौसम में पानी मन मुताबिक नहीं बरसा, इसलिए पुरंदर तालुका में फसलों का भविष्य अधर में लटक गया है। अक्टूबर में ही पानी की किल्लत महसूस होने लगी है और किसान अभी से फसल बचाने की जद्दोजहद में लग गए हैं। ऐसे में सामाजिक कामों में आगे रहने वाला वनपुरी का श्री भैरवनाथ प्रतिष्ठान किसानों की मदद के लिए आगे आया है। प्रतिष्ठान ने गांव के आसपास के गांव तालाब, बांध और नाले पुरंदर उपसा के पानी से मुफ्त में भरवाकर किसानों और खेती की फसलों को राहत देने का बड़ा काम किया है।
इस साल का खरीफ सीजन जैसे-तैसे निकल गया और अब रब्बी सीजन शुरू हो चुका है। ज्वार की बुवाई पहले ही हो चुकी है, जबकि चना, गेहूं जैसी मुख्य फसलों और दूसरी फसलों की बुवाई अभी चल रही है। जगह-जगह प्याज की लगवाई भी होती दिख रही है। दूध का अच्छा भाव मिलने से किसानों का झुकाव पशुपालन की तरफ भी बढ़ा है, इसलिए जानवरों के लिए चारे की खेती करते भी किसान नजर आ रहे हैं। एक तरफ खेती के कामों की भागदौड़ है, तो दूसरी तरफ पानी की किल्लत ने सबके चेहरे का रंग उड़ा दिया है।
खेतों में खड़ी फसलों को जिंदा रखने के लिए हर कोई कोशिश कर रहा है। कुओं का पानी अभी से तली तक पहुंचने लगा है। किसानों के सामने कई सवाल हैं: खेत की फसलों का क्या होगा? पानी ही नहीं मिला तो फसल कैसे आएगी? अगले पूरे साल जानवरों के लिए चारा कहां से लाएंगे? साल भर का अनाज कहां से आएगा?
श्री भैरवनाथ प्रतिष्ठान गांव के किसानों को सरकारी योजनाओं की जानकारी देने और रियायत और अनुदान दिलाने में मदद करता है। हर साल नवरात्र उत्सव में प्रतिष्ठान मुलशी तालुका के शिरकोली में शिरकाई देवी के दर्शन के लिए यात्रा भी निकालता है। हमेशा की तरह इस साल भी गांव के लोगों को देवी के दर्शन की आस थी। लेकिन किसानों की तकलीफ और फसलों की बदहाली देखकर प्रतिष्ठान ने तय किया कि देवदर्शन अगले साल भी हो सकता है, पर खेतों में खड़ी फसलों को बचाना ज्यादा जरूरी है, इसलिए उसी को पहली प्राथमिकता दी जाए।
प्रतिष्ठान के संस्थापक अध्यक्ष संतोष राजाभाऊ कुंभारकर ने इस बार देवदर्शन के बजाय अपने खर्च से पुरंदर उपसा योजना के जरिए खेती को पानी देने का फैसला किया। संचालिका वसुंधरा कुंभारकर के साथ प्रतिष्ठान के सोमनाथ कुंभारकर, महेश मगर, माणिक कुंभारकर, तुकाराम महामुनी, शांताराम कुंभारकर, संतोष कुंभारकर, माऊली कुंभारकर, शरद कुंभारकर, सुनिल कुंभारकर, ज्ञानदेव खेडेकर, किरण कुंभारकर और दूसरे सदस्यों ने इस फैसले का समर्थन किया। इसके बाद सदस्यों ने योजना के कार्यालय में पैसे जमा कराए और वनपुरी का गांव तालाब, शेरी का मला का बांध और आसपास के तालाब पानी से भरवा लिए। तालाब भरने के बाद सबकी मौजूदगी में जलपूजन किया गया।
प्रतिष्ठान की ओर से कहा गया कि इस साल पानी की किल्लत बहुत ज्यादा है और फसलों के भविष्य के साथ जानवरों के चारे और पीने के पानी की भी बड़ी समस्या है। आने वाले कुछ महीनों तक पानी का नियोजन करना पड़ेगा, और इसकी शुरुआत अपने से करने का फैसला लिया गया। इस पानी से फसलों को कुछ हद तक सहारा मिलेगा और आसपास के कुओं और बोअर का जलस्तर बनाए रखने में मदद होगी। किसानों की मांग के मुताबिक कुछ दिन बाद फिर से पानी दिया जाएगा।
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