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पुणे के IISER की लाइब्रेरी से उमर खालिद की किताब हटाई गई, सोशल मीडिया पर उठा था सवाल

जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद की पीएचडी पर आधारित किताब 'फ्रैक्चर्ड कम्युनिटीज' पुणे की केंद्र सरकार की लाइब्रेरी में मिलने पर विवाद हुआ और किताब हटा दी गई।

पुणे के IISER की लाइब्रेरी से उमर खालिद की किताब हटाई गई, सोशल मीडिया पर उठा था सवाल तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

जेएनयू के पूर्व छात्र और कार्यकर्ता उमर खालिद एक बार फिर चर्चा में हैं। पुणे में केंद्र सरकार की एक लाइब्रेरी में उनकी किताब 'फ्रैक्चर्ड कम्युनिटीज' मिलने के बाद विवाद खड़ा हो गया। सोशल मीडिया पर यह मामला उठा, तो 'इंडियन इन्स्टिट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च' की लाइब्रेरी से यह किताब हटा दी गई।

यह किताब उमर खालिद की पीएचडी रिसर्च पर आधारित है। दिल्ली दंगों के आरोप में जेल में बंद खालिद ने 2015 में झारखंड के सिंहभूम इलाके के आदिवासी समुदायों के इतिहास पर अपना थीसिस जेएनयू में जमा किया था। जुलाई 2018 में यह थीसिस जेएनयू के सेंटर फॉर हिस्टोरिकल स्टडीज में जमा हुआ था और तभी इसने कई लोगों का ध्यान खींचा था। अब यही रिसर्च पहली बार 'फ्रैक्चर्ड कम्युनिटीज: आदिवासी हिस्टरीज़ एंड द पॉलिटिक्स ऑफ पावर' नाम से किताब की शक्ल में छपी है। पुणे की लाइब्रेरी वाला विवाद इसी किताब को लेकर सामने आया।

सोशल मीडिया पर आपत्ति दर्ज होने के बाद IISER पुणे की लाइब्रेरी में इस किताब के होने पर सवाल उठने लगे। फिर खबर आई कि किताब को लाइब्रेरी के संग्रह से हटा दिया गया है। सोशल मीडिया पर खालिद की कुछ और किताबों का भी जिक्र मिलता है, लेकिन ये किताबें उन्हीं ने लिखी हैं, इसकी कोई पुष्टि नहीं हुई है। कई धार्मिक किताबों के साथ भी उनका नाम जोड़ा जाता है, पर जानकारों के मुताबिक यह सिर्फ एक गलतफहमी है।

किताब का मुख्य विषय झारखंड के सिंहभूम इलाके में ब्रिटिश राज के दौर के आदिवासी समाज का इतिहास और उसकी सामाजिक व राजनीतिक बनावट है। किताब बताती है कि ब्रिटिश जमाने की प्रशासनिक व्यवस्था और पावर रिलेशन्स ने आदिवासी समाज को कैसे गढ़ा। साथ ही इस इलाके को बड़े ऐतिहासिक और राजनीतिक संदर्भ में रखकर दिखाती है। यह काम खालिद के डॉक्टरेट थीसिस पर टिका है। थीसिस जमा करने के बाद उन्हें 2019 में पीएचडी की डिग्री मिली थी।

खालिद से जुड़ा एक और विवाद जेएनयू में भी सामने आया है। शनिवार को कैंपस की दीवारों पर 'फ्री उमर खालिद' के नारे लिखे मिले। इसके बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन ने मामले की जांच की। जेएनयू प्रशासन का कहना है कि विश्वविद्यालय की शांति भंग करने वाली ऐसी हरकतें कभी बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। इससे पहले जामिया में चल रहे विवाद में भी 'फ्री कश्मीर' जैसे नारों पर बवाल हो चुका है।

उमर खालिद जेएनयू के पूर्व रिसर्च स्कॉलर हैं और 2020 से दिल्ली दंगों की बड़ी साजिश के आरोप में जेल में हैं। उन पर UAPA के तहत आरोप लगाए गए हैं। जिस दिल्ली दंगे की साजिश के मामले में वे जेल में हैं, उसमें करीब 53 लोगों की जान गई थी।

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