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09:13 IST

पापांकुशा एकादशी 22 अक्टूबर को, पद्मनाभ रूप की पूजा और व्रत की विधि

अश्विन महीने के शुक्ल पक्ष की पापांकुशा एकादशी का व्रत गुरुवार, 22 अक्टूबर को रखा जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु के पद्मनाभ रूप की पूजा की जाती है।

पापांकुशा एकादशी 22 अक्टूबर को, पद्मनाभ रूप की पूजा और व्रत की विधि तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

हिंदू धर्म में एकादशी के उपवास को खास जगह दी गई है। अश्विन महीने के शुक्ल पक्ष में आने वाली पापंकुश एकादशी का उपवास सभी भक्तों के लिए बहुत फलदायी और लाभदायक बताया गया है। पंचांग के मुताबिक यह उपवास गुरुवार, 22 अक्टूबर को श्रद्धा के साथ रखा जाएगा।

जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और पुण्य पाने के लिए इस एकादशी को बहुत खास माना जाता है। व्रत रखने वाले भक्तों से कहा गया है कि वे तय विधि और नियमों का पालन करते हुए भगवान विष्णु की उपासना करें। भगवान विष्णु के किस रूप की पूजा होती है और उसका क्या महत्त्व है, यह नीचे बताया गया है।

पापंकुश एकादशी के दिन विश्व के रक्षक भगवान विष्णु के पद्मनाभ रूप की खास पूजा की जाती है। धार्मिक श्रद्धा के मुताबिक भगवान का यह रूप भक्तों के जीवन के सारे दुख दूर करता है। मान्यता है कि जब कोई भक्त इस पवित्र दिन सच्चे मन से पद्मनाभ रूप की पूजा करता है, तो उसे भगवान का असीम आशीर्वाद मिलता है।

इस दिन मंदिर में या घर के देवघर में विधि के साथ भगवान विष्णु की स्थापना की जाती है और सारे नियम भक्तिभाव से निभाए जाते हैं। कहा गया है कि भगवान विष्णु का यह रूप जीवन में सद्गुण और भक्ति का रास्ता दिखाता है और हर चुनौती से पार पाने की ताकत देता है।

पूजा में चढ़ाई जाने वाली चीजों में सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु को पीले फूल, वस्त्र, तुलसी के पत्ते, मौसमी फल और नैवेद्य अर्पित किए जाते हैं। विष्णु की पूजा में तुलसी के पत्ते जरूरी माने जाते हैं, क्योंकि उनके बिना की गई पूजा अधूरी समझी जाती है। पीले वस्त्र और पीले फूल देवता को बहुत प्रिय हैं, इसलिए पूजा में इनका इस्तेमाल होता है।

भक्त दिन भर उपवास रखते हैं और इन्हीं नैवेद्यों से भगवान हरि की पूजा करते हैं। मान्यता है कि सही विधि और सच्ची भक्ति से ये नैवेद्य चढ़ाने पर भगवान प्रसन्न होते हैं, घर में सुख-समृद्धि आती है और जीवन के सारे दुख धीरे-धीरे दूर हो जाते हैं।

रात में भगवान के नाम का जप करने और 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करने की खास परंपरा है। एकादशी की रात सोना नहीं चाहिए, बल्कि वक्त भगवान का गुणगान करने में बिताना चाहिए। कहा गया है कि यह एक शक्तिशाली मंत्र है और इसके लगातार जाप से मन को शांति मिलती है और आत्मा शुद्ध होती है।

जो लोग रात भर जागकर सच्ची भक्ति से इस मंत्र का जाप करते हैं, उनकी सारी इच्छाएं पूरी होती हैं। भगवान विष्णु की कृपा से उनका घर और परिवार हमेशा सकारात्मक ऊर्जा से भरा रहता है। इस तरह पापंकुश एकादशी का पूरा दिन और रात भगवान की भक्ति में बिताने से इंसान का जीवन पूरी तरह धन्य हो जाता है।

पूजा की विधि यह है कि सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। फिर हाथ में पानी लेकर उपवास का संकल्प करें। इसके बाद देवघर पूरी तरह साफ करके एक चौकी पर पीले रंग का कपड़ा बिछाएं और उस पर भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर रखें। भगवान को पीले फूल, वस्त्र, तुलसी के पत्ते, मौसमी फल और नैवेद्य चढ़ाएं। एकादशी की पूजा के लिए तुलसी जरूरी मानी जाती है। देवता को फल और मिठाई भी अर्पित करें।

इसके बाद धूप और दीये जलाएं, भगवान हरि की आरती करें और विष्णु सहस्रनाम या मंत्रों का पाठ करें। उस दिन दिन भर उपवास रखें। हो सके तो रात में स्तोत्र गाएं, भगवान के नाम का जप करें और जागरण करें। द्वादशी तिथि की सुबह स्नान करके ब्राह्मणों या जरूरतमंद लोगों को अन्नदान करें और उसके बाद ही उपवास खोलें।

(धर्म, ज्योतिष, वास्तु, फेंगशुई जैसे विषयों के लेख और खबरें सिर्फ पाठकों की जानकारी के लिए हैं। इनसे जुड़ा कोई भी प्रयोग करने से पहले जानकारों की सलाह जरूरी है।)

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