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11:23 IST

नवरात्रि 2026: गुजरात के गरबा से कन्याकुमारी तक, देश भर में अलग-अलग परंपराएं

शारदीय नवरात्रि रविवार, 11 अक्टूबर से शुरू होगी। काश्मीर, गुजरात, पश्चिम बंगाल, हिमाचल और कन्याकुमारी में इसे अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है।

नवरात्रि 2026: गुजरात के गरबा से कन्याकुमारी तक, देश भर में अलग-अलग परंपराएं तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

पंचांग के मुताबिक शारदीय नवरात्रि की शुरुआत रविवार, 11 अक्टूबर को होगी। नौ दिन का यह उत्सव 19 अक्टूबर को महानवमी के दिन खत्म होगा। उसके अगले दिन नवरात्रि के बाद विजय के दिन के तौर पर दशहरा मनाया जाता है।

देश के अलग-अलग राज्यों में यही नवरात्रि उत्सव काफी अलग दिखता है। कुछ जगहों पर देवी दुर्गा की भव्य पूजा होती है, तो कुछ जगहों पर विजयादशमी के दिन कुंकू लगाने का एक खास विधि-विधान होता है। इसी वजह से काश्मीर से कन्याकुमारी तक और गुजरात से पश्चिम बंगाल तक नवरात्रि की अपनी एक अलग पहचान है। आइए देखते हैं कि देश के अलग-अलग हिस्सों में नवरात्रि कैसे मनाई जाती है और इसके पीछे कौन-सी खास परंपराएं हैं।

काश्मीर में नवरात्रि का त्योहार बड़ी भक्ति और श्रद्धा से मनाया जाता है। वहां माता खीर भवानी का बहुत प्रसिद्ध मंदिर है। नवरात्रि के दौरान भक्त देवी की पूजा करते हैं और उपवास रखते हैं। माता खीर भवानी को समर्पित यह मंदिर काश्मीर की धार्मिक परंपराओं से गहराई से जुड़ा हुआ है। नवरात्रि में यहां भक्तों की श्रद्धा और भक्ति का एक अनोखा रूप दिखाई देता है।

नवरात्रि का नाम लेते ही सबसे पहले गुजरात के गरबा और दांडिया याद आते हैं। वहां नवरात्रि की नौ रातें संगीत, नृत्य और उमंग से भरी होती हैं। लोग पारंपरिक पोशाक पहनकर गरबा और दांडिया में हिस्सा लेते हैं। देवी अंबा की पूजा से शुरू होने वाला यह नृत्य धीरे-धीरे पूरे माहौल को उत्सव में बदल देता है।

पश्चिम बंगाल में नवरात्रि के दौरान दुर्गा पूजा बड़े धूमधाम से मनाई जाती है। देवी दुर्गा की भव्य मूर्तियां, आकर्षक पंडाल और खास पूजाएं माहौल को उत्सव जैसा बना देती हैं। विजयादशमी के दिन होने वाला सिंदूर खेला खास आकर्षण का केंद्र होता है। इस विधि में शादीशुदा महिलाएं पहले देवी दुर्गा को कुंकू चढ़ाती हैं और फिर एक-दूसरे को लगाती हैं। माना जाता है कि यह परंपरा देवी दुर्गा से वैवाहिक सुख और परिवार की भलाई के लिए की जाने वाली प्रार्थना से जुड़ी है।

हिमाचल प्रदेश का कुल्लू दशहरा भी नवरात्रि की परंपरा का एक खास हिस्सा है। यहां दशहरा देश के बाकी हिस्सों से थोड़े अलग तरीके से मनाया जाता है। कुल्लू में नवरात्रि खत्म होने के बाद भव्य दशहरा उत्सव शुरू होता है। इस दौरान भगवान रघुनाथ की भव्य रथयात्रा निकाली जाती है और अलग-अलग इलाकों के देवताओं की शोभायात्राएं भी आती हैं। कुल्लू की घाटियों के सजे हुए रथ, देवी-देवताओं की पालकियां और पारंपरिक वाद्य इस उत्सव को बहुत खास बना देते हैं।

देश के सबसे दक्षिणी छोर पर बसे कन्याकुमारी में भी नवरात्रि की अपनी अनोखी परंपराएं हैं। नवरात्रि के दौरान प्रमुख मंदिरों से देवताओं की भव्य मूर्तियों और प्रतिमाओं की पारंपरिक शोभायात्रा निकाली जाती है। इन धार्मिक जुलूसों में स्थानीय परंपराओं और दक्षिण भारतीय संस्कृति की झलक देखने को मिलती है। मंदिरों की सजावट, विधि-विधान और जुलूसों का अपना अलग आकर्षण होता है। इसी वजह से कन्याकुमारी की नवरात्रि देश के दूसरे हिस्सों में मनाए जाने वाले त्योहारों से अलग ठहरती है।

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