गुरूवार, 8 अक्टूबर 2026

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16:35 IST

नोबेल घोषणाओं के बीच ट्रंप ने फिर ठोका शांति पुरस्कार पर दावा, कहा आठ युद्ध सुलझाए

व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद को नोबेल शांति पुरस्कार का असली हकदार बताया। उन्होंने ईरान और रूस की एक प्रयोगशाला की घटना पर भी सवालों के जवाब दिए।

नोबेल घोषणाओं के बीच ट्रंप ने फिर ठोका शांति पुरस्कार पर दावा, कहा आठ युद्ध सुलझाए तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

नोबेल समिति ने 2026 के अलग-अलग नोबेल पुरस्कारों का ऐलान शुरू किया है और इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर नोबेल शांति पुरस्कार पर अपना दावा जताया है। उन्होंने दुनिया में शांति कायम करने में अपनी कूटनीतिक कामयाबियों का हवाला दिया।

व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने साफ कहा कि उन्होंने दुनिया के कई बड़े टकराव और तनाव खत्म करवाए हैं, इसलिए वे इस सम्मान के सच्चे हकदार हैं। ट्रंप ने कहा, "मैंने ऐसे काम करके दिखाए हैं जो मुझसे पहले किसी राष्ट्रपति ने कभी नहीं किए। मैं कोई डींग नहीं मार रहा, सिर्फ सच्चाई रख रहा हूं। शायद आज तक किसी राष्ट्रपति ने एक भी युद्ध नहीं सुलझाया होगा, लेकिन मैंने अब तक कुल आठ युद्ध और अंतरराष्ट्रीय विवाद निपटाए हैं।"

पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा को 2009 में मिले नोबेल का जिक्र करते हुए ट्रंप ने उन पर निशाना साधा। उनका कहना था कि ओबामा को यह पुरस्कार क्यों मिला, यह उन्हें आज भी पता नहीं, जबकि उन्होंने असल में शांति के लिए बड़ा काम किया है। ट्रंप ने यह भी कहा, "नोबेल के इतिहास में कोई इसका मुझसे ज्यादा हकदार नहीं रहा। मैंने आठ युद्ध सुलझाए। मैंने दुनिया को पूरी तरह तबाह होने से रोका।"

अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे सैन्य तनाव पर ट्रंप ने दावा किया कि ईरान का मसला जल्दी सुलझने की राह पर है। उन्होंने कहा, "हमारा मुख्य मकसद ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना था और हमने उसकी परमाणु क्षमता पूरी तरह खत्म कर दी है। ईरान की फौज अब पूरी तरह कमजोर हो चुकी है और यह जंग जल्द से जल्द खत्म होगी।" ट्रंप ने यह भी जोड़ा कि जंग खत्म होते ही दुनिया के बाजार में कच्चे तेल के दाम तेजी से नीचे आएंगे।

हालांकि अंतरराष्ट्रीय फैक्ट-चेकर और राजनीतिक विश्लेषक ट्रंप के "आठ युद्ध खत्म करने" के दावे पर सवाल उठा रहे हैं। विश्लेषकों के मुताबिक ट्रंप ने जिन मामलों का नाम लिया, उनमें से कई औपचारिक सैन्य युद्ध नहीं थे, बल्कि सिर्फ कूटनीतिक तनाव थे। सर्बिया-कोसोवो या मध्य पूर्व के टकरावों में अमेरिका की भूमिका और उसे मिली कामयाबी को लेकर भी अलग-अलग राय सामने आ रही हैं।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप से रूस के साइबेरिया में स्थित इरकुत्स्क एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट की एक संदिग्ध घटना के बारे में भी पूछा गया। इस संस्थान की एक 28 साल की महिला कर्मचारी दार्या शिपालोवा की निमोनिया से रहस्यमय मौत हुई थी। उसके संपर्क में आए करीब 200 से ज्यादा लोगों को मेडिकल निगरानी में रखा गया था। इस घटना से दुनिया भर में प्लेग के खतरे और जैविक हथियारों (Bioweapons) को लेकर चिंता जताई जा रही थी।

इस घटना का रिश्ता रूस के जैविक हथियार परीक्षण या किसी हादसे से हो सकता है या नहीं, इस सवाल पर ट्रंप ने कहा, "अमेरिकी विशेषज्ञों की टीम और स्वास्थ्य एजेंसियां अभी इस पर बारीक नजर रखे हुए हैं। रूसी अधिकारियों ने बताया है कि हालात पूरी तरह काबू में हैं। हमें नहीं लगता कि यह कोई जैविक हथियार है या जैविक हथियार से जुड़ा कोई हादसा है।" ट्रंप ने साफ किया कि अमेरिकी स्वास्थ्य संस्था CDC और विश्व स्वास्थ्य संगठन WHO इस मामले की समीक्षा कर रहे हैं और अमेरिका को इससे कोई सीधा खतरा नहीं है।

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