बुधवार, 7 अक्टूबर 2026

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19:01 IST

रूस पेचोरा S-125 को मोबाइल लॉन्चर पर उतार रहा है, भारत के लिए अहम माना जा रहा

रूस सोवियत जमाने की पेचोरा S-125 मिसाइल प्रणाली को चलते-फिरते रूप में विकसित कर रहा है, पहली खेप जल्द उसकी सेना में शामिल होगी।

रूस पेचोरा S-125 को मोबाइल लॉन्चर पर उतार रहा है, भारत के लिए अहम माना जा रहा तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

रूस अपनी सोवियत जमाने की मशहूर पेचोरा S-125 को नए और मोबाइल रूप में तैयार कर रहा है। यह जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली है। इस अपग्रेडेड पेचोरा की पहली खेप जल्द ही रूसी सेना में शामिल की जाएगी। इस फैसले से अमेरिका के आधुनिक F-35 स्टेल्थ फाइटर जेट के दबदबे को सीधी चुनौती मिली है। इस खबर को सिर्फ अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए नहीं, बल्कि भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और हवाई सुरक्षा के लिहाज से भी बेहद अहम माना जा रहा है।

पेचोरा का इतिहास भी कम दिलचस्प नहीं है। यह वही प्रणाली है जिसने 27 मार्च 1999 को कोसोवो युद्ध के दौरान सर्बिया की जमीन से अमेरिकी वायुसेना का F-117 नाइटहॉक स्टेल्थ फाइटर-बॉम्बर विमान गिराया था। F-117 दुनिया में चालू हुआ पहला स्टेल्थ विमान था और उसे रडार पर देख पाना नामुमकिन माना जाता था। उस वक्त पेचोरा एक जगह खड़ी रहने वाली प्रणाली थी, फिर भी उसने स्टेल्थ विमान को निशाना बनाकर पूरी दुनिया को चौंका दिया था। अब वही प्रणाली मोबाइल वर्जन में आ रही है, तो उसकी ताकत और असर कई गुना बढ़ने की बात कही जा रही है।

पेचोरा S-125 मूल रूप से सोवियत दौर में 1961 में बनी एक स्थिर, कम से मध्यम दूरी की हवाई सुरक्षा प्रणाली है। भारतीय वायुसेना के बेड़े में यह 1970 के दशक में शामिल की गई थी। इसकी आम मारक दूरी 30 से 35.4 किलोमीटर है। यह सिर्फ 20 मीटर की ऊंचाई पर उड़ने वाले निशाने से लेकर 20 से 25 किलोमीटर की ऊंचाई तक जाने वाले दुश्मन के विमानों पर सटीक वार कर सकती है। इसे कम और मध्यम ऊंचाई से आने वाले लड़ाकू विमान, क्रूज मिसाइल और आधुनिक स्टेल्थ ड्रोन गिराने के लिए बनाया गया है। इसमें लगा 4R90 यागाटन रडार करीब 100 किलोमीटर दूर दुश्मन की उड़ानें पकड़ सकता है। इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और भारी जैमिंग वाले माहौल में भी यह अपना काम कर सकती है, और अकेले भी चल सकती है या पूरे देश के हवाई सुरक्षा नेटवर्क का हिस्सा बन सकती है।

भारतीय वायुसेना काफी समय से पेचोरा पर भरोसा करती आ रही है। करीब 50 साल पुरानी इस सोवियत प्रणाली को पूरी तरह आधुनिक और डिजिटल बनाने का फैसला भारत ने कुछ साल पहले ही ले लिया था। इसके तहत रक्षा मंत्रालय ने 16 पेचोरा प्रणालियों के आधुनिकीकरण का करीब Rs 591.3 करोड़ का ठेका बेंगलुरु की निजी रक्षा कंपनी अल्फा डिजाइन टेक्नोलॉजीज लिमिटेड (ADTL) को दिया था।

इस देसी अपग्रेड में पुराने जमाने की वैक्यूम ट्यूब और ट्रांजिस्टर वाली एनालॉग व्यवस्था पूरी तरह हटा दी गई। उसकी जगह आधुनिक सेमीकंडक्टर डिजिटल चिप और ज्यादा क्षमता वाले प्रोसेसर लगाए गए। राजस्थान की पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में इस अपडेटेड सिस्टम का सफल टेस्ट किया गया। डिजिटलीकरण से रिस्पॉन्स टाइम यानी प्रतिक्रिया का समय बहुत घट गया, जिससे अचानक आने वाली दुश्मन की मिसाइलों को चंद सेकंड में खत्म करना मुमकिन हुआ।

भारत ने सिर्फ चिप नहीं बदली, मिसाइल गाइडेंस और ट्रैकिंग रडार को भी पूरी तरह डिजिटल कर दिया है। नए ट्रांसमीटर लगे हैं, जिनसे दुश्मन के स्टेल्थ विमान और छोटे ड्रोन को ट्रैक करना ज्यादा सटीक हो गया है। ऑपरेटर केबिन में आधुनिक विजुअल डिस्प्ले, डिजिटल कंट्रोलर और अपने आप चलने वाला हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम जोड़ा गया है। साथ ही देसी सॉफ्टवेयर-डिफाइंड रेडियो (SDR), थर्मल इमेजिंग फायर कंट्रोल सिस्टम और मिसाइल लॉन्च डिटेक्टर लगाकर इसे वायुसेना के IACCS (Integrated Air Command and Control System) नेटवर्क से सीधे जोड़ दिया गया है।

अब सवाल यह है कि रूस का मोबाइल चेसिस अपग्रेड भारत के लिए गेमचेंजर क्यों माना जा रहा है। स्थिर हवाई सुरक्षा प्रणालियों का बड़ा नुकसान यह है कि दुश्मन के सैटेलाइट और निगरानी विमान उनकी जगह आसानी से ढूंढ लेते हैं। भारत के दो मुख्य प्रतिद्वंद्वी, चीन और पाकिस्तान, भारतीय सीमाओं पर हवा और सैटेलाइट से लगातार नजर रखते हैं। स्थिर पेचोरा की लोकेशन पता होने पर वे उसे घेरकर निकल सकते थे या पहले ही उस पर हमला कर सकते थे।

रूस अब इस सिस्टम को भारी सैन्य गाड़ियों, यानी MZKT-8021-021, MZKT-8022-021 और MZKT-80211-021 चेसिस पर लगाकर पूरी तरह मोबाइल बना रहा है। अगर भारत रूसी चेसिस अपग्रेड अपनाता है, या अपनी डिजिटल पेचोरा को देसी तकनीक से मोबाइल गाड़ियों पर तैनात करता है, तो यह प्रणाली कुछ मिनटों में एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाई जा सकेगी। चीन के पास J-20 जैसे 5वीं पीढ़ी के स्टेल्थ फाइटर पहले से हैं, और पाकिस्तान को भी चीन से स्टेल्थ क्षमता वाले विमान मिलने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में रडार से गायब होने वाले स्टेल्थ विमानों को सटीक पकड़ने वाली और लगातार जगह बदलने वाली मोबाइल पेचोरा S-125 को भारत की सीमा पर एक अभेद्य सुरक्षा कवच बनाने वाली प्रणाली माना जा रहा है।

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