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17:07 IST

सेंसेक्स 1,200 अंक टूटा, निफ्टी 22,200 के आसपास; तेल से RBI तक पांच वजहें

गुरुवार को शेयर बाजार में भारी बिकवाली हुई। बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों की मार्केट वैल्यू करीब 8 लाख करोड़ रुपये घट गई।

सेंसेक्स 1,200 अंक टूटा, निफ्टी 22,200 के आसपास; तेल से RBI तक पांच वजहें तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

गुरुवार को शेयर बाजार में निवेशकों ने जमकर बिकवाली की। सेंसेक्स 1,200 अंक गिर गया और निफ्टी नीचे आकर करीब 22,200 के आसपास पहुंच गया। दोपहर तक हालत इतनी खराब हो चुकी थी कि बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों की कुल मार्केट वैल्यू में अनुमानित तौर पर 8 लाख करोड़ रुपये की कमी आ गई।

रेपो रेट बढ़ने के बाद बाजार पर इतना दबाव क्यों आया, इसकी वजहें एक साथ सामने आईं। महंगा कच्चा तेल, RBI की सख्त नीति, विदेशी निवेशकों की बिकवाली, दुनिया के बाजारों के कमजोर संकेत और कुछ बड़े शेयरों में गिरावट, इन सबका असर एक ही वक्त पर पड़ा। यानी निवेशकों के सामने इस वक्त एक नहीं, कई फिक्र खड़ी हैं।

पहली वजह कच्चा तेल है। ब्रेंट क्रूड 3 प्रतिशत से ज्यादा चढ़कर करीब 103 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। पश्चिम एशिया में तनाव है और खाड़ी इलाके व होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है। इसी से तेल के दाम ऊपर गए। भारत अपनी जरूरत के कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा बाहर से मंगाता है, इसलिए दाम बढ़ें तो इंपोर्ट बिल बढ़ता है। इसका असर रुपये, महंगाई और कंपनियों के खर्च पर पड़ सकता है। कंपनियां अगर बढ़ा हुआ खर्च पूरी तरह ग्राहकों पर न डाल पाएं, तो मुनाफे पर दबाव आता है। बाजार को यही डर सता रहा है।

दूसरा झटका RBI से लगा। बुधवार को रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी करके उसे 5.50 प्रतिशत कर दिया। करीब चार साल में यह पहली बढ़ोतरी है। इससे भी बड़ी बात यह कि RBI ने अपना पॉलिसी रुख 'न्यूट्रल' से बदलकर 'नियंत्रित सख्त नीति' कर दिया। मतलब ब्याज दरें लंबे वक्त तक ऊंची रह सकती हैं, और बाजार इसी बात से बेचैन है। RBI गवर्नर ने भी इशारा दिया है कि नजदीक के वक्त में दर घटने की गुंजाइश कम है और आगे का कदम महंगाई और आर्थिक हालात पर निर्भर करेगा। ब्याज दरें बढ़ने से कंपनियों के लिए कर्ज महंगा होता है, और निवेशकों को शेयरों के बजाय ब्याज देने वाले सुरक्षित विकल्प ज्यादा अच्छे लगने लगते हैं।

तीसरी वजह विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी है। 7 अक्टूबर को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय शेयर बाजार से Rs 6,121.40 करोड़ निकाल लिए। अक्टूबर में एक दिन की यह दूसरी सबसे बड़ी FII बिकवाली थी। दूसरी तरफ घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने करीब Rs 4,597 करोड़ की खरीदारी की। विदेशी निवेशकों की इतनी बड़ी बिकवाली बाजार पर सीधा दबाव डालती है, खासकर तब जब महंगा तेल, ग्लोबल बॉन्ड पर ऊंचा रिटर्न और भारत की सख्त होती मौद्रिक नीति जैसी फिक्रें साथ में हों।

चौथी वजह दुनिया के बाजारों से मिला कमजोर साथ है। सिर्फ भारत ही नहीं, एशियाई बाजार भी कमजोर रहे। पिछले सत्र में अमेरिकी बाजार दबाव में थे और अमेरिकी बॉन्ड पर रिटर्न ऊंचा बना हुआ है। ऐसे माहौल में दुनिया भर के निवेशक जोखिम वाले एसेट में पैसा लगाने को लेकर ज्यादा सावधान हो जाते हैं। ग्लोबल फंड एक देश से दूसरे देश में पैसा लगाते और निकालते रहते हैं, इसलिए बाहर की कमजोरी का असर भारत पर भी पड़ता है। अमेरिका और दूसरे बड़े बाजारों में जोखिम बढ़ने से उभरते बाजारों से पैसा निकलने का दबाव बढ़ सकता है।

पांचवीं वजह अदाणी समेत कई बड़े शेयरों की गिरावट है। यह गिरावट सिर्फ इंडेक्स तक सीमित नहीं थी। अदाणी एंटरप्राइजेज के शेयर में बड़ी गिरावट आई, अदाणी पोर्ट्स पर भी दबाव रहा और अदाणी ग्रीन एनर्जी में भी खासी कमजोरी दिखी। इस बिकवाली से निफ्टी पर, खासकर मेटल और एनर्जी सेक्टर पर दबाव बढ़ा। निफ्टी मेटल करीब 3 प्रतिशत टूटा, जबकि निफ्टी एनर्जी भी करीब 2 प्रतिशत कमजोर रहा। यानी बिकवाली कई सेक्टरों में फैली दिखी।

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