रुबियो बोले: ट्रम्प के रहते ईरान को परमाणु बम नहीं बनाने देंगे
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने एथेंस में कहा कि ईरान को किसी हाल में परमाणु हथियार नहीं मिलेगा।
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अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ईरान को लेकर बेहद सख्त रुख दिखाया है। एथेंस में हुई एक अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने साफ कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की अगुवाई वाला अमेरिका ईरान को कभी परमाणु बम या परमाणु हथियार नहीं बनाने देगा। रुबियो ने इसे अमेरिका की आखिरी और अलिखित 'लक्ष्मणरेखा' बताया, जिस पर कोई समझौता नहीं होगा। मध्यपूर्व में राजनीतिक और सैन्य तनाव बढ़ने के बीच यह बयान आया है।
रुबियो यह बात ग्रीस के विदेश मंत्री जॉर्ज गेरापेट्रिस के साथ हुई संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोल रहे थे। इस मौके पर उन्होंने अमेरिकी विदेश नीति की आक्रामक दिशा भी साफ की।
ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु बातचीत पिछले कुछ सालों से बहुत नाजुक मोड़ पर पहुंची हुई है। रुबियो से सीधा सवाल पूछा गया कि भविष्य में किसी भी संभावित समझौते के दौरान क्या अमेरिका ईरान को एक तय सीमा तक यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) की इजाजत देगा। इसके जवाब में उन्होंने कहा कि समझौते की शर्तें चाहे जो भी हों, उसका आखिरी मकसद यही होगा कि ईरान परमाणु हथियार वाला देश न बन सके। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जे. डी. वेंस भी इससे पहले मांग कर चुके हैं कि ईरान अपनी यूरेनियम संवर्धन क्षमता तुरंत कम करे। रुबियो के बयान में उसी बात को दोहराया गया।
अमेरिकी विदेश मंत्री ने दावा किया कि तेहरान अपनी सैन्य ताकत को रणनीति के तहत ऐसे मुकाम तक ले जाने की कोशिश में था, जहां दुनिया का कोई भी देश उसकी परमाणु सुविधाओं (Nuclear Facilities) पर हमले की सोचे तो उसे बड़े जवाबी हमले का डर सताए। इसके लिए ईरान ने बड़ी तादाद में आधुनिक मिसाइलें, ड्रोन और लॉन्चर (Launchers) जमा कर रखे थे। वॉशिंगटन का गंभीर आरोप है कि इसी पारंपरिक सैन्य ताकत के सहारे ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम के चारों तरफ सुरक्षा कवच खड़ा करना चाहता था।
रुबियो ने यह भी दावा किया कि ट्रम्प प्रशासन ने ईरान की यह योजना वक्त रहते नाकाम कर दी। उनके मुताबिक राष्ट्रपति ट्रम्प के सीधे आदेश के बाद अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में ईरान की ड्रोन बनाने की क्षमता और ड्रोन नेटवर्क बड़े पैमाने पर तबाह कर दिए गए। रुबियो ने कहा कि ईरान के मिसाइल लॉन्चर कमजोर कर दिए गए हैं और उसकी नौसेना व वायुसेना भी काफी कमजोर हो चुकी हैं। सैन्य नुकसान के इन दावों की स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, फिर भी अमेरिका के इन बयानों से अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मच गई है।
सोशल मीडिया पर सामने आई एक रिपोर्ट के मुताबिक रुबियो ने बुधवार को सीबीएस न्यूज की ओलिविया गाजिस से कहा कि वे इस पर ब्योरे में नहीं जाएंगे कि क्या मंजूर होगा और क्या नहीं। उन्होंने यह जोड़ा कि ईरान के पास "कभी परमाणु हथियार नहीं होगा"। यह बात उपराष्ट्रपति वेंस के उस बयान के बाद आई, जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरान को अपनी संवर्धन क्षमता में "ठोस" कमी करनी होगी।
सैन्य ताकत के साथ रुबियो ने ईरान की बिगड़ती आर्थिक हालत पर भी बात की। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान में इस वक्त जो गंभीर आर्थिक संकट है, उसके लिए वहां का राजनीतिक नेतृत्व ही पूरी तरह जिम्मेदार है। अमेरिका समेत दुनिया के देशों की ओर से लगाई गई सख्त आर्थिक और व्यापारिक पाबंदियों से ईरान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। लोग महंगाई और रोजगार की समस्या से परेशान हैं, जबकि सरकार की आमदनी तेजी से घट रही है।
रुबियो के मुताबिक ईरान की सैन्य हालत अब इतनी कमजोर हो गई है कि तेहरान अपनी पारंपरिक सैन्य ताकत के दम पर परमाणु कार्यक्रम के खिलाफ दुनिया की कार्रवाई को नहीं रोक सकता। उन्होंने दोहराया कि जब तक डोनाल्ड ट्रम्प अमेरिका के राष्ट्रपति हैं, ईरान का परमाणु हथियार पाने का सपना कभी पूरा नहीं होने दिया जाएगा। अमेरिका के इस सख्त रुख से आने वाले दिनों में मध्यपूर्व के भू-राजनीतिक समीकरण और तीखे और उलझे हुए होने की संभावना जताई जा रही है।